scorecardresearch
 

असम: बरसों तक सरकार ने नहीं सुनी, ग्रामीणों ने खुद ही चंदा इकट्ठा कर नदी पर खड़ा किया बांस का पुल

ग्रामीणों के मुताबिक, बरसात के दिनों में नदी को पार करने के दौरान पहले कई हादसे हो चुके हैं. इनमें इंसानों और मवेशियों की नदी में बहने से मौत हुई. नदी पर पुल बनने का इंतजार करते करते लोग थक गए तो उन्होंने आपस में ही चंदा इकट्ठा कर बांस का पुल बनाने का फैसला किया. कुछ स्थानीय एनजीओ भी इस काम में मदद के लिए आगे आए. 

Advertisement
X
असम में ग्रामीणों द्वारा बनाया जा रहा बांस का पुल
असम में ग्रामीणों द्वारा बनाया जा रहा बांस का पुल
स्टोरी हाइलाइट्स
  • असम सरकार से लगा चुके हैं कई बार गुहार
  • किसी ने नहीं सुनी तो चंदे से पुल बनाने का लिया निर्णय
  • नदी पार करते समय बह जाते थे आदमी और पशु

असम के गोलपाड़ा जिले के कई गांवों के लोग सालों से नदी पर पुल बनवाने के लिए गुहार लगाते-लगाते थक गए, लेकिन उनकी कोई सुनवाई नहीं हुई. बरसात के दिनों में उन्हें होने वाली दिक्कतों को दूर करने के लिए न तो स्थानीय जनप्रतिनिधि जागे और न ही सरकारी अधिकारियों की कुंभकर्णी नींद टूटी. ऐसे में थक हार कर चपलाई अम्बारी क्षेत्र के लोगों ने खुद ही ये बीड़ा उठाया और देओसिला नदी पर बांस का पुल खड़ा कर दिया.   

Advertisement

चपलाई अम्बारी इलाका गोलपाड़ा और कामरूप जिलों की सीमा के पास स्थित है. यहां के लोगों ने स्थानीय विधायकों और सरकार से कई बार देओसिला नदी पर पुल निर्माण के लिए आग्रह किया. लेकिन उन्हें कोई सकारात्मक जवाब नहीं मिला. बरसात के दिनों में नदी के उफान पर होने की वजह से लोगों को इसे पार करना मुश्किल हो जाता है. अपनी खेती के लिए अधिकतर ग्रामीणों को नदी के पार जाना पड़ता है. 

असम: 'लव जिहाद' पर बोले CM हिमंत बिस्वा सरमा- 'हिंदू या मुस्लिम, धोखा बर्दाश्त नहीं'

ग्रामीणों के मुताबिक, बरसात के दिनों में नदी को पार करने के दौरान पहले कई हादसे हो चुके हैं. इनमें इंसानों और मवेशियों  की नदी में बहने से मौत हुई. नदी पर पुल बनने का इंतजार करते करते लोग थक गए तो उन्होंने आपस में ही चंदा इकट्ठा कर बांस का पुल बनाने का फैसला किया. कुछ स्थानीय एनजीओ भी इस काम में मदद के लिए आगे आए. 

Advertisement

चपलाई अम्बारी गांव के स्थानीय नागरिक मोहम्मद अली का कहना है कि स्थानीय विधायकों और सरकार के पास पुल बनाने के लिए कई बार अर्जी भेजी गई लेकिन कुछ नहीं हुआ. मुहम्मद अली ने कहा, “हम लंबे अरसे से पुल नहीं होने की वजह से दिक्कतों का सामना कर रहे हैं. पिछले साल ही एक शख्स की नदी पार करने की कोशिश में डूबने से मौत हो गई. हमने खुद ही बांस का पुल बनाना शुरू कर दिया. हमें अब भी उम्मीद है कि सरकार हमारी दिक्कतों को समझेगी.

चपलाई अम्बारी गांव में ही रहने वाले रमेश दास ने कहा कि “क्षेत्र के लोगों ने आपस में ही पुल बनाने के लिए पैसे दान दिए, कुछ स्थानीय संगठनों ने भी इस काम में मदद की.” 

 

Advertisement
Advertisement