अयोध्या के राम मंदिर ट्रस्ट ने अभी तक इस पर अंतिम निर्णय नहीं लिया है कि पिछले महीनों में गढ़ी जा रही तीन राम लल्ला की मूर्तियों में से कौन सी मूर्ति मंदिर में स्थापित की जाएगी. ट्रस्ट से जुड़े लोगों ने यह जानकारी दी.
येदियुरप्पा ने दी अरुण योगीराज को बधाई
भाजपा नेता और कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा ने राज्य के मूर्तिकार अरुण योगीराज को बधाई देते हुए कहा था कि उनके द्वारा बनाई गई मूर्ति को नए मंदिर अयोध्या में स्थापित करने के लिए चुना गया है. लेकिन मंदिर का निर्माण करा रहे राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने अपना फैसला नहीं बताया है.
ट्रस्ट पदाधिकारियों ने कहा कि ट्रस्ट द्वारा शंकराचार्य विजयेंद्र सरस्वती और अन्य संतों के परामर्श से निर्णय लिया जाएगा. ट्रस्ट के कार्यालय प्रभारी प्रकाश गुप्ता ने बताया, 'ट्रस्ट का जो भी निर्णय होगा, उसे उचित समय पर सार्वजनिक किया जाएगा.' चुनी गई मूर्ति को गर्भगृह में स्थापित किया जाएगा और 22 जनवरी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उपस्थिति में एक समारोह में प्रतिष्ठित किया जाएगा. मंदिर के निर्माण का पहला चरण अब समाप्त हो गया है.
1949 से भक्त राम लला की मूर्ति वाले अस्थायी मंदिर में पूजा-अर्चना करते रहे हैं. ट्रस्ट के अधिकारियों का कहना है कि पुरानी "चल" मूर्ति को अब उत्सव के अवसरों के लिए परिसर में रखा जाएगा. तीन मूर्तिकारों ने अलग-अलग पत्थरों पर अलग-अलग काम करके भगवान की मूर्तियां बनाईं. उनमें से दो के लिए पत्थर कर्नाटक से आया था और तीसरी मूर्ति राजस्थान से लाई गई चट्टान से बनाई जा रही थी. मूर्तियों की नक्काशी जयपुर के मूर्तिकार सत्यनारायण पांडे और कर्नाटक के गणेश भट्ट और अरुण योगीराज ने की थी.
ट्रस्ट के अधिकारियों के मुताबिक, गर्भगृह के लिए मूर्ति का चयन करते समय उसकी चमक लंबे समय तक टिके रहने जैसे पहलुओं पर एक तकनीकी रिपोर्ट को भी ध्यान में रखा जाएगा. येदियुरप्पा ने सोशल मीडिया पर कर्नाटक के मूर्तिकार को उनके काम के "चयन" के लिए बधाई दी थी.
उन्होंने कहा, मैसूर के मूर्तिकार अरुण योगीराज द्वारा बनाई गई भगवान राम की मूर्ति को अयोध्या के भव्य श्री राम मंदिर में स्थापना के लिए चुना गया है, जिससे राज्य के सभी राम भक्तों का गौरव और खुशी दोगुनी हो गई है. येदियुरप्पा के बेटे और भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष बी वाई विजयेंद्र ने भी योगीराज की सराहना की.
योगीराज ने बताया कि उन्हें अभी तक उनकी मूर्ति स्वीकार किए जाने के बारे में कोई आधिकारिक सूचना नहीं मिली है. उन्होंने कहा, "मुझे खुशी है कि मैं देश के उन तीन मूर्तिकारों में शामिल था, जिन्हें 'राम लला' की मूर्ति तराशने के लिए चुना गया था." इससे पहले वह उत्तराखंड के केदारनाथ में लगी आदि शंकराचार्य की मूर्ति और इंडिया गेट के पास लगी सुभाष चंद्र बोस की मूर्ति भी बना चुके हैं.