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अयोध्या: राम मंदिर में 12 घंटे में दर्शन करेंगे 75 हजार लोग, रामलला को निहारने के लिए मिलेगा एक मिनट

अयोध्या राम मंदिर निर्माण समिति के चेयरमैन नृपेंद्र मिश्रा का कहना है कि हमारा मौजूदा अनुमान है कि लगभग 12 घंटे में 70000 से 75000 लोग रामलला के दर्शन कर सकते हैं. अगर मंदिर 12 घंटे के लिए खुलता है तो लगभग 75000 लोग दर्शन कर सकते हैं, जिसका मतलब है कि एक भक्त लगभग एक मिनट तक रामलला का दर्शन कर सकेगा. अनुमान ये भी है कि अगर आगे एक दिन में 1.25 लाख भक्तों की भीड़ जुटती है तो दर्शन के समय की अवधि लगभग 20 सेकंड घट सकती है.

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राममंदिर
राममंदिर

अयोध्या में भगवान राम के मंदिर का निर्माण कार्य जोरों पर है. इस तीन मंजिला राम मंदिर का निर्माण दिसंबर के अंत तक पूरा होगा. ऐसे में अनुमान है कि 12 घंटे की अवधि में लगभग 75000 भक्त रामलला के दर्शन कर सकते हैं.

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अयोध्या राम मंदिर निर्माण समिति के चेयरमैन नृपेंद्र मिश्रा का कहना है कि हमारा मौजूदा अनुमान है कि लगभग 12 घंटे में 70000 से 75000 लोग रामलला के दर्शन कर सकते हैं. अगर मंदिर 12 घंटे के लिए खुलता है तो लगभग 75000 लोग दर्शन कर सकते हैं, जिसका मतलब है कि एक भक्त लगभग एक मिनट तक रामलला का दर्शन कर सकेगा. अनुमान ये भी है कि अगर आगे एक दिन में 1.25 लाख भक्तों की भीड़ जुटती है तो दर्शन के समय की अवधि लगभग 20 सेकंड घट सकती है.

नृपेंद्र मिश्रा ने कहा कि हमारे ट्रस्ट श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र के महासचिव चंपत राय ने अन्य संगठनों से मदद ली है और कोशिश की है कि कार्यकर्ता चार लाख गांवों का दौरा करेंगे, भक्तों से मुलाकात करेंगे और दान इकट्ठा करेंगे. ऐसे भी भक्त हैं, जिन्होंने दस करोड़, पचास करोड़ रुपये का चंदा दिया है और इस तरह लगभग 3500 करोड़ रुपये इकट्ठा हुए हैं. 

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दो चरण में पूरा होगा मंदिर का निर्माण

उन्होंने बताया कि लोग जानना चाहते हैं कि मंदिर कब तक बनकर तैयार हो जाएगा, उनका सपना कब साकार होगा. यह मंदिर एक वास्तविकता है. मंदिर का निर्माण दो भागों में पूरा होगा. पहले चरण दिसंबर 2023 तक पूरा होगा. पहले चरण में मंदिर का ग्राउंड फ्लोर बनकर तैयार होगा जो लगभग 2.6 एकड़ जमीन में फैला हुआ है. ग्राउंड फ्लोर पर पांच मंडप होंगे, जिनकी शुरुआत मंदिर के गर्भग्रह से होगी, जहां रामलला की मूर्ति स्थापित की जाएगी. ग्राउंड फ्लोर पर 160 स्तंभ होंगे. हर स्तंभ पर अलग-अलग तरह की नक्काशी होगी. 

मंदिर निर्माण में लोहे का इस्तेमाल नहीं

आर्किटेक्चर और कंस्ट्रक्शन मटैरियल पर बात करते हुए मिश्रा ने बताया कि मंदिर निर्माण में लोहे का इस्तेमाल नहीं किया गया है. इसकी बजाय पत्थरों को जोड़ने के लिए तांबे का इस्तेमाल हुआ है.

उन्होंने बताया कि राम मंदिर ढाई एकड़ में बना हुआ है. लेकिन अगर इसमें 'परिक्रमा पथ' भी जोड़ लिया जाए तो ये पूरा परिसर आठ एकड़ का हो जाता है.

मिश्रा के मुताबिक, मंदिर निर्माण में अब तक करीब 900 करोड़ रुपये खर्च हो चुके हैं. और पूरा मंदिर परिसर बनने में 1,700 से 1,800 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है.

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उन्होंने बताया कि कुछ कलाकृतियां एएसआई को खुदाई के दौरान मिली थीं और कुछ निर्माण कार्य के दौरान मिली हैं. इनमें से कुछ को ट्रस्ट के देखरेख में सुरक्षित रखा गया है. एएसआई से अनुमति मिलने के बाद इन्हें मंदिर परिसर में बन रहे संग्रहालय में रखा जाएगा.

51 इंच की होगी रामलला की मूर्ति

मंदिर के गर्भगृह में एक चबूतरा बनाया जाएगा. इसी चबूतरे पर रामलला की मूर्ति को स्थापित किया जाएगा. रामलला की ये मूर्ति 51 इंच की होगी.

ऐसा होगा राम मंदिर

अयोध्या में राम जन्मभूमि क्षेत्र में 2.7 एकड़ में राम मंदिर बन रहा है. ये तीन मंजिला होगा और इसकी ऊंचाई 162 फीट होगी. 

मंदिर निर्माण के लिए राजस्थान से नक्काशीदार पत्थर लाए गए हैं. मंदिर के चारों ओर आठ एकड़ की परिधि में 48 फीट ऊंची प्राचीर भी बनाई जा रही है.

मंदिर परिसर में राम मंदिर के अलावा छह और मंदिर बनाए जा रहे हैं. सिंह द्वार से राम मंदिर में प्रवेश करने से पहले पूर्वी दिशा में एक मुख्य द्वार होगा, जहां से श्रद्धालु परिसर में आएंगे.

मुख्य द्वार के बगल में ही निकास द्वार भी बनाया जा रहा है. इसके अलावा एक सुरंग भी बन रही है, जहां से भी भक्त आ और जा सकेंगे. प्राण प्रतिष्ठा से पहले परिसर का मुख्य द्वार बन जाएगा.

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बता दें कि तीन मंजिला राम मंदिर के भूतल का निर्माण दिसंबर के अंत तक पूरा हो जाएगा और प्रतिष्ठा समारोह 22 जनवरी को होगा.

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