प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शुक्रवार (3 जनवरी) को दिल्ली के अशोक विहार के रामलीला मैदान में आयोजित कार्यक्रम में शामिल हुए. यहां उन्होंने कई सरकारी योजनाओं की शुरुआत की. इस दौरान पीएम मोदी ने जब जनसभा को संबोधित किया तब उन्होंने कहा कि, 'मैं तो दिल्ली वालों को मुफ्त इलाज की सुविधा देने वाली 'आयुष्मान भारत' योजना का लाभ देना चाहता हूं. आप-दा सरकार को दिल्ली वालों से बड़ी दुश्मनी है. पूरे देश में आयुष्मान योजना लागू है, लेकिन इस योजना को आप-दा वाले यहां (दिल्ली) लागू नहीं होने दे रहे. इसका नुकसान दिल्ली वालों को उठाना पड़ रहा है.
क्या बोले पीएम मोदी?
पीएम मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि दिल्ली वालों को आयुष्मान योजना का लाभ नहीं मिल रहा है, और इससे उन्हें नुकसान उठाना पड़ रहा है. अब सवाल उठता है कि जिन प्रदेशों में केंद्र द्वारा की आयुष्मान योजना लागू नहीं की गई है, तो क्या उन्हें किसी अन्य प्रदेश में भी इसका लाभ नहीं मिल रहा है? अगर दिल्ली का कोई निवासी किसी अन्य राज्य में जाता है तो क्या आपात स्थिति में वह आयुष्मान योजना का लाभार्थी बन सकता है. सवाल यह भी है कि अगर वह दिल्ली में किसी स्वास्थ्य योजना का लाभार्थी है तो क्या किसी अन्य प्रदेश में दिल्ली की इस योजना से उसे लाभ मिल सकता है? इन सवालों पर विस्तार से चर्चा करते हैं.
इन प्रदेशों में नहीं लागू है 'आयुष्मान योजना'
केंद्र सरकार ने साल 2018 में देश के गरीब-जरूरतमंद लोगों को 5 लाख तक का फ्री इलाज देने के लिए प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत योजना शुरू की थी. सरकार की इस योजना के तहत पात्र परिवारों को 5 लाख तक का इलाज फ्री मिलता है. भारत के लगभग सभी राज्यों में यह योजना लागू है. लेकिन आज भी देश के कुछ ऐसे राज्य और केन्द्र शासित प्रदेश हैं जिनमें प्रधानमंत्री आयुष्मान योजना लागू नहीं की गई है.
यानी उन प्रदेशों के लोगों को 5 लाख रुपये तक के फ्री इलाज का लाभ नहीं मिल पा रहा है. इन राज्यों में अभी पश्चिम बंगाल और दिल्ली शामिल हैं. दिल्ली ऐसा केन्द्र शासित प्रदेश है , जहां केंद्र सरकार की आयुष्मान भारत योजना लागू नहीं है. ऐसे में सवाल आता है कि इन प्रदेशों में जबकि आयुष्मान भारत योजना लागू नहीं है तो क्या यहां के नागरिकों को फ्री इलाज की सुविधा मिलती है.
दिल्ली में कौन सी हेल्थ स्कीम?
जानकारी के मुताबिक, भारत सरकार की प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत योजना केंद्र शासित प्रदेश दिल्ली में लागू नहीं है. यानी दिल्ली में रहने वाला कोई भी नागरिक प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत योजना के तहत 5 लाख तक का फ्री इलाज का फायदा नहीं उठा सकता. हालांकि दिल्ली में लोगों को स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ मिल रहा है. आयुष्मान भारत योजना की जगह दिल्ली में जिन गरीब परिवारों की आय 1 लाख सालाना या उससे कम है उन्हें दिल्ली आरोग्य निधि के तहत डेढ़ लाख रुपये तक की आर्थिक सहायता दी जाती है. वहीं दिल्ली आरोग्य कोष की ओर से सरकारी अस्पताल में 5 लाख रुपये तक के इलाज के लिए सरकार की ओर से मदद दी जाती है. इसके लिए परिवारों की सालाना इनकम 3 लाख रुपये से ज्यादा नहीं होनी चाहिए.
केजरीवाल ने लॉन्च की है 'संजीवनी योजना'
वहीं, अब आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल ने 18 दिसंबर 2024 को बुजुर्गों के लिए 'संजीवनी योजना' लॉन्च की. इसके तहत राजधानी के 60 साल से ज्यादा उम्र के बुजुर्गों का इलाज निशुल्क होगा. इसके तहत सरकारी या प्राइवेट दोनों तरह के अस्पतालों में निशुल्क इलाज होगा. इस योजना का लाभ उठाने के लिए आय की कोई सीमा नहीं है. दिल्ली सरकार इलाज का पूरा खर्चा उठाएगी.
क्या अन्य राज्यों में मिलेगा इसका लाभ?
हालांकि दिल्ली की इन स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ उठा रहा कोई भी लाभार्थी अगर किसी अन्य राज्य में गया है और वहां आपात स्थिति में फंस जाता है तो इन सुविधाओं का लाभ उसे वहां नहीं मिल सकेगा. क्योंकि दिल्ली के हेल्थ एंड फैमिली वेलफेयर वेबसाइट की मानें तो दिल्ली आरोग्य निधि और आरोग्य कोष की सुविधा दिल्ली के नागरिकों के लिए दिल्ली में ही है. वहीं आप मुखिया केजरीवाल ने जिस 'संजीवनी योजना' की घोषणा की है, वह अभी अस्तित्व में नहीं आई है, इसलिए इसके विस्तार पर अभी कुछ कहना जल्दबाजी होगी.
हालांकि पूर्व सीएम ने इस योजना का ऐलान करते हुए इसमें भी सिर्फ दिल्ली के अस्पतालों और राजधानी के 60 साल से ज्यादा के उम्र के बुजुर्गों का जिक्र किया है. इसलिए अभी यह कह पाना मुश्किल है कि दिल्ली की इस हेल्थ स्कीम का लाभ किसी अन्य प्रदेश में आपात स्थिति में मिलेगा या नहीं.
'आयुष्मान' और 'संजीवनी' योजना में क्या है बेसिक फर्क
बीते साल ही (सितंबर2024) में केंद्र सरकार ने आयुष्मान भारत योजना (Ayushman Bharat Yojna) के तहत 70 साल या इससे अधिक के सीनियर सिटीजंस को इसमें शामिल किया है और अब इस आयुवर्ग के बुजुर्गों को परिवार से अलग 5 लाख रुपये तक का फ्री इलाज मिल सकेगा. इसके जवाब में बीते दिनों ही दिल्ली सरकार ने संजीवनी योजना लाने की घोषणा की है.
दोनों में क्या अंतर है...
संजीवनी योजना की खास बातें
- अरविंद केजरीवाल ने बुजुर्गों के लिए संजीवनी योजना लॉन्च कर दी है. इसके तहत राजधानी के 60 साल से ज्यादा उम्र के बुजुर्गों का इलाज निशुल्क होगा.
- दिल्ली में 60 साल से ज्यादा उम्र के सभी नागरिक मुफ्त इलाज होगा. केजरीवाल के मुताबिक इलाज में जितना खर्च होगा, सब सरकार वहन करेगी.
- केजरीवाल ने कहा कि आने वाले दिनों में आप कार्यकर्ताओं द्वारा घर-घर जाकर पंजीकरण शुरू किया जाएगा.
- संजीवनी योजना का लाभ हर आय वर्ग के लोगों को मिलेगा, यानी आय को लेकर कोई सीमा नहीं होगी.
आयुष्मान भारत यानी प्रधानमंत्री-जन आरोग्य योजना (AB PM-JAY) की खास बातें
- आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री-जन आरोग्य योजना (AB PM-JAY) के तहत 70 वर्ष और उससे अधिक उम्र के बुजुर्गों को 5 लाख रुपये तक का मुफ्त स्वास्थ्य बीमा मिलेगा. 70 साल से अधिक अवस्था वाले सभी लोगों का व्यक्तिगत गोल्डन कार्ड बनेगा.
- इस फैसले से 4.5 करोड़ परिवारों के 6 करोड़ वरिष्ठ नागरिकों (Senior Citizens) को फायदा होगा. इस स्कीम के तहत कई बड़ी बीमारियों को कवर किया जाता है, इसमें कैंसर, हार्ट डिसीज और किडनी से जुड़ी बीमारी के अलावा Corona, मोतियाबिंद तक शामिल हैं.
- आधार कार्ड में जो जन्मतिथि लिखी होगी, उसके आधार पर अगर बुजुर्ग की आयु 70 वर्ष हो रही है तो उन सभी को अब इस योजना का लाभ मिलेगा, चाहे उनकी इनकम कुछ भी हो, ये एक नया दायरा बनाया गया है. यहां तक कि पेंशनर को भी इसका लाभ मिलेगा.
- नेशनल हेल्थ अथॉरिटी के ऑनलाइन पोर्टल या फिर आयुष्मान ऐप के जरिए आवेदन कर ऑनलाइन कार्ड जनरेट किया जा सकेगा. मंत्रालय इसके लिए बड़े स्तर पर कैंपेन चलाएगा. अस्पतालों में भी हेल्प डेस्क होंगे और बुजुर्गों के स्पेशल कार्ड बनवाने में मदद की जाएगी. हेल्थ वर्कर्स भी फील्ड में जाकर बुजुर्गों की मदद करेंगे. ओल्ड एज होम में भी कैंप होगा.
- स्वास्थ्य मंत्रालय का कहना है कि जन आरोग्य योजना में देश भर में करीब 30 हजार अस्पताल इम्पैनल है, जिसमें से 13 हजार प्राइवेट और 17 हजार सरकारी अस्पताल है. इन सभी अस्पतालों में मरीज को भर्ती होने की स्थिति में पांच लाख रुपये तक के मुफ्त इलाज की सुविधा मिलेगी.
- इस योजना में 70 वर्ष से ज्यादा उम्र के जो बुजुर्ग पहले से ही रजिस्टर्ड हैं, उन्हें स्पेशल कार्ड के लिए फिर से अप्लाई करना होगा, अगर उस परिवार में पति- पत्नी दोनों लोग 70 वर्ष से ज्यादा हैं, तो दोनों को टॉप अप का फायदा मिलेगा. पहले 5 लाख रुपये तक के खर्च पर इलाज होगा और उसके बाद पांच लाख रुपये का टॉप अप भी होगा.
पश्चिम बंगाल में है यह स्कीम
दिल्ली की तरह पश्चिम बंगाल में भी प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत योजना लागू नहीं है, लेकिन राज्य सरकार की ओर से प्रदेश के नागरिकों के लिए 'स्वास्थ्य साथी' नाम से एक योजना चलाई जा रही है. इस योजना के तहत लाभार्थियों को 5 लाख रुपये तक के कैशलेस इलाज की सुविधा मिलती है. इसके लिए पश्चिम बंगाल सरकार स्मार्ट कार्ड जारी करती है. इसके जरिए इलाज के बाद अस्पताल को भुगतान किया जा सकता है.
क्या है स्कीम में खास
सरकारी पोर्टल https://wbhealthscheme.gov.in/ के मुताबिक, 1 दिसंबर, 2020 को 'स्वास्थ्य साथी' का दायरा बढ़ाया गया था. प्रत्येक परिवार, व्यक्ति, बुजुर्ग, बच्चे, महिला सभी को इसका लाभ देने का फैसला किया लिया गया था. पहले राज्य के 7.5 करोड़ लोगों के लिए ही योजना लागू थी. इस योजना के बारे में बताते हुए मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा था कि आयुष्मान भारत के तहत केंद्र सिर्फ 60 प्रतिशत धनराशि देता है तो 40 प्रतिशत कौन देगा? जबकि स्वास्थ्य साथी योजना के तहत सौ फीसदी खर्च राज्य सरकार उठा रही है.
योजना की मुख्य विशेषताएं:
प्रत्येक परिवार को सेकेंड्री और tertiary देखभाल के लिए सालाना ₹5 लाख तक का स्वास्थ्य कवर. यह पेपरलेस, कैशलेस, स्मार्ट कार्ड आधारित सेवा है, जिसमें सभी पूर्व-मौजूदा बीमारियां शामिल हैं. फैमिली कैप साइज की कोई सीमा नहीं है, पति-पत्नी दोनों के माता-पिता शामिल हैं. परिवार में शारीरिक रूप से अक्षम आश्रित व्यक्ति भी कवर किए जाते हैं. योजना का पूरा खर्च राज्य सरकार उठाती है, लाभार्थियों से कोई योगदान नहीं लिया जाता.
इसके कार्ड होल्डर को 24 घंटे के अंदर 100% ऑनलाइन प्री-ऑथराइजेशन और कार्ड ब्लॉक होने पर लाभार्थियों को एसएमएस और अलर्ट. छुट्टी के समय लाभार्थियों के ई-हेल्थ रिकॉर्ड का रीयल-टाइम अपलोड. अस्पताल को दावे का भुगतान 30 दिनों के भीतर, देरी होने पर ब्याज भी देना पड़ता है.
क्या 'स्वास्थ्य साथी' योजना का लाभ पश्चिम बंगाल से बाहर लिया जा सकता है?
बीते साल ही मार्च 2024 में पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने प्रवासी श्रमिकों के लिए एक अलग स्वास्थ्य कार्ड लॉन्च किया था. यह कार्ड स्वास्थ्य साथी योजना का ही स्पेशल एडिशन है, जो प्रत्येक परिवार को सालाना ₹5 लाख तक के मेडिकल खर्च की सुविधा देता है. इस तरह बीते साल ही पश्चिम बंगाल में 'स्वास्थ्य साथी' योजना का दायरा बढ़ा दिया गया है.
राज्य सरकार ने अन्य राज्यों में काम करने वाले बंगाल के प्रवासी श्रमिकों के लिए इसका दायरा बढ़ा दिया है. इसके बाद से प्रवासी श्रमिक अपने वर्कप्लेस के पास किसी भी अस्पताल में प्रारंभिक प्रवेश का लाभ उठा सकते हैं, जबकि उपचार लंबा चलने पर मरीज की हालत थोड़ी सामान्य होने पर बंगाल में किसी अस्पताल में ट्रांसफर किया जा सकता है. इस तरह इस योजना का लाभ पश्चिम बंगाल के बाहर भी किसी अन्य राज्य में उठाया जा सकता है.