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आजम खान पर 28 अगस्त को आएगा MP MLA कोर्ट का फैसला, आचार संहिता के उल्लंघन का केस

आजम खान के खिलाफ एमपी एमएलए कोर्ट में आचार संहिता के उल्लंघन का मामला चल रहा था. आरोप है कि 2019 के लोकसभा चुनाव में वह गाड़ी से वोट डालने पहुंचे थे, जो चुनाव आयोग द्वारा तय किए गए नियमों का उल्लंघन था. कोर्ट इस मामले पर 28 अगस्त को फैसला सुनाएगा.

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वरिष्ठ सपा नेता आजम खान
वरिष्ठ सपा नेता आजम खान

सीतापुर जेल में बंद समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता मोहम्मद आजम खान की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही है. उनके विरुद्ध रामपुर की एमपी एमएलए कोर्ट में चल रहे चुनाव आचार संहिता उल्लंघन मामले में अब सुनवाई पूरी हो चुकी है. 28 अगस्त फैसले के लिए तारीख तह कर दी गई है, जब माना जा रहा है कि कोर्ट फैसला सुना सकता है.

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आजम खान पर आरोप है कि वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव में मतदान केंद्र राजा डिग्री कॉलेज पर वह अपने वाहन से वोट डालने पहुंचे थे, जो कि मतदान केंद्र से 200 मीटर दायरे के अंदर थी. 200 मीटर के दायरे के अंदर कोई वाहन से नहीं आ सकता है. इस नियम का उन्होंने उल्लंघन किया था. इसी संबंध में तत्कालीन रिटर्निंग ऑफिसर ने मुकदमा दर्ज कराया था, जो कि रामपुर की एमपी एमएलए कोर्ट में विचराधीन है.

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रिटर्निंग ऑफिसर ने दर्ज कराया था मुकदमा

कोर्ट में मामले पर सुनवाई पूरी हो चुकी है. अब कोर्ट 28 अगस्त को अपना फैसला सुना सकता है. मामले पर बातचीत में वरिष्ठ वकील अमरनाथ तिवारी ने बताया कि एनसीआर नंबर 33/2019, थाना गंज पर तत्कालीन उप जिलाधिकारी सदर और रिटर्निंग ऑफिसर के द्वारा 2019 में मोहम्मद आजम खान के खिलाफ आईपीसी की धारा 171एफ और 133 लोक प्रतिनिधि अधिनियम के अंतर्गत मुकदमा दर्ज कराया गया था.

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आजम खान पर क्या हैं आरोप?

शिकायत में कहा गया था कि 2019 के लोकसभा चुनाव में मतदान के दिन राजा डिग्री कॉलेज में मोहम्मद आजम खान वोट डालने पहुंचे थे, जो कि तब एक मतदान केंद्र था. ऐसा करके उन्होंने वाहनों को 200 मीटर के दायरे में न लाने वाले नियमों का उल्लंघन किया था. आरोप के मुताबिक, यह परस्पर रूप से चुनाव आचार संहिता का उल्लंघन था.

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कोर्ट में दाखिल किया गया था आरोपपत्र

इसके संबंध में तत्कालीन रिटर्निंग ऑफिसर पीपी तिवारी ने मुकदमा दर्ज कराया था. कोर्ट में एक आरोप पत्र भी दाखिल किया गया था. ट्रायल विशेष न्यायिक मजिस्ट्रेट एमपी एमएलए कोर्ट में चल रहा था. इसमें अभियोजन के द्वारा गवाह प्रेषित कराए गए थे. पीपी तिवारी की मौत हो गई थी, जो कि तब उप जिला अधिकारी थे. दोनों पक्षों द्वारा बहस फाइनल हो चुकी है और अब फैसले के लिए कोर्ट ने 28 अगस्त की तारीख तय की है.

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