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BBC को नेताजी क्यों कहते थे Bluff Corporation, टक्कर देने को लेकर आए थे आजाद हिंद रेडियो

बीबीसी का भारत के साथ टकराव का इतिहास आजादी से पहले तक जाता है. दूसरे विश्व युद्ध के दौरान अंग्रेज बीबीसी के जरिये भारत की आजादी की आंकाओं को दबाने की भरपूर कोशिश करते. अंग्रेजों की ये चालाकी सुभाष चंद्र बोस ने न छिप सकी. बीबीसी को टक्कर देने के लिए वे आजाद हिंद रेडियो लकर आए.

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BBC से टक्कर के लिए आजाद हिंद रेडियो लेकर आए सुभाष चंद्र बोस
BBC से टक्कर के लिए आजाद हिंद रेडियो लेकर आए सुभाष चंद्र बोस

बीबीसी के दफ्तरों पर आयकर विभाग का एक्शन जारी है. आयकर विभाग की टीम 24 घंटे से भी ज्यादा समय से कथित रूप से टैक्स गड़बड़ी को लेकर बीबीसी के खातों की जांच कर रही है. इनकम टैक्स की ये कार्रवाई सोमवार दोपहर 12 बजे शुरू हुई थी. बीबीसी पर आयकर विभाग की इस कार्रवाई को विपक्ष मीडिया को डराने के लिए उठाया गया कदम बता रहा है तो वहीं सत्ता पक्ष का कहना है कि कानून से ऊपर कोई नहीं है. 

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गौरतलब है कि बीबीसी पर छापेमारी की कार्रवाई उस समय हो रही है जब कुछ ही दिन पहले गुजरात दंगों पर बनी बीबीसी की एक डॉक्यूमेंट्री को केंद्र सरकार ने बैन कर दिया था. इस डॉक्यूमेंट्री में गुजरात के तत्कालीन सीएम और मौजूदा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की भूमिका पर सवाल उठाया गया है. 

बीजेपी ने बीबीसी को दुनिया का सबसे बकवास और भ्रष्ट कॉरपोरेशन बताया है. बीजेपी ने कहा है कि अगर बीबीसी के कृत्य देखें, तो यह पूरे विश्व की सबसे भ्रष्ट और बकवास कॉरपोरेशन हो गई है. 

बता दें कि बीबीसी की स्थापना के साथ ही इसका भारत की सत्ता से गाहे-बगाहे टकराव होता रहा है. आजादी के पहले बीबीसी ब्रिटेन की औपनिवेशिक नीतियों का पोषक बन गया था. 

1940 के दशक में नेताजी सुभाष चंद्र बोस की लोकप्रियता देश में चरम पर भी. उन्होंने बीबीसी की कवरेज, रिपोर्टिंग में पक्षपात का तीखा अनुभव हुआ. इसके जवाब में नेताजी आजाद हिंद रेडियो लेकर आए. नेताजी बीबीसी की पक्षपतापूर्ण रिपोर्टिंग की वजह से ब्रिटिश ब्रॉडकास्टिंग कॉरपोरेशन (BBC) को Bluff and Bluster corporation कहा करते थे.  

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आजादी की लड़ाई के दौरान दुनिया के सामने नहीं आ रहा था भारत का पक्ष

दूसरे विश्व युद्ध के दौरान बीबीसी रेडियो सेवा साम्राज्यवादी ब्रिटेन के हाथों में प्रोपगैंडा वार का हथियार बन चुकी थी. बीबीसी भारत के स्वतंत्रता संग्राम की खबरों को, आजादी की लड़ाई में भारतीयों के संघर्ष को अंग्रेजी नजरिये से दुनिया के सामने पेश कर रहा था. लिहाजा भारत की बात, भारत का पक्ष दुनिया के सामने आ ही नहीं पा रहा था. 

इसी दौर में नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने अंग्रेजों के प्रोपगैंडा वार का जवाब देने के लिए भारत की धरती से हजारों किलोमीटर दूर 1942 में जर्मनी में आजाद हिंद रेडियो की स्थापना की थी. आजाद हिंद रेडियो विश्व युद्ध की दो धुव्रीय दुनिया (Allied power versus Axis power) में भारत की स्वतंत्र आवाज बनकर उभरा.

बीबीसी की टक्कर में आजाद हिंद रेडियो लेकर आए सुभाष बाबू

सुभाष चंद्र बोस अंग्रेजों को चकमा देकर 1941 में जर्मनी के बर्लिन शहर पहुंच गए थे. तब जर्मनी हिटलर के अधीन था और यहां नाजियों की हुकूमत चलती थी. यहां से ही सुभाष चंद्र बोस ने ब्रिटेन के खिलाफ रेडियो वार की रूपरेखा तैयार की. सुभाष चंद्र बोस ने 2 नवंबर 1941 को यहां सबसे पहले फ्री इंडिया सेंटर की स्थापना की. अब नेताजी को एक ऐसे प्लेटफॉर्म की जरूरत थी जिसके जरिये वे अपनी बात दुनिभा भर में फैले हिन्दुस्तानियों तक पहुंचा सकें. 

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विशुद्ध राष्ट्रवादी नजरिये से खबरों का प्रसारण

रेडियो अपने साइज, सहजता और दुनिया भर में प्रसारण की क्षमता रखने की वजह से इस मकसद के लिए सबसे सटीक औजार बन गया. सुभाष बाबू ने 7 जनवरी 1942 को आजाद हिंद रेडियो की स्थापना की. बीबीसी के जरिये ब्रिटेन के प्रोपगैंडा वार को टक्कर देने के लिए आजाद हिंद रेडियो से 19 जनवरी 1942 से प्रसारण शुरू किया गया. इस प्लेटफॉर्म से विशुद्ध रूप से राष्ट्रवादी दृष्टिकोण से दुनिया और भारत के मामलों को विश्व के सामने रखा जाने लगा.

इस रेडियो स्टेशन से अंग्रेजी, हिन्दी, तमिल, बंगाली, मराठी, पंजाबी, पश्तो, गुजराती और उर्दू में समाचार प्रसारण होता था. इस रेडियो स्टेशन के जरिये ही नेताजी के संदेशों का प्रसारण दुनिया भर में फैले हिन्दुस्तानियों तक किया जाता था.

आजाद हिंद रेडियो से ही 23 अक्टूबर 1943 को सुभाष चंद्र बोस ने ब्रिटेन और मित्र राष्ट्रों के खिलाफ जंग की घोषणा की थी. आजाद हिंद रेडियो पर प्रसारित होने वाले नेताजी के जोशीले भाषण देशवासियों में नई ऊर्जा का संचार कर रहे थे. 

बीबीसी से आगे निकल गया आजाद हिंद रेडियो

दिल्ली स्थित आईआईएमसी की एक स्टडी में बताया गया है कि भारत में रेडियो रखने वाला हर व्यक्ति बर्लिन से होने वाले प्रसारण को जरूर सुनता था. आजाद हिंद रेडियो की लोकप्रियता की चर्चा करते हुए जोधपुर के महाराजा के हवाले से लिखा गया है कि बहुत जल्द ही जर्मनी से होने वाले इस प्रसारण ने ब्रिटिश रेडियो को पीछे छोड़ दिया. 

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आजाद हिंद रेडियो ने दक्षिण-पूर्व एशिया में बसे भारतीयों और युद्धबंदियों को एकजुट करने में प्रेरक शक्ति के रूप में काम किया और पूर्वी सीमा पर एक मजबूत मोर्चा बनाने में मदद की. 

प्रोपगैंडा वार में बीबीसी ने जॉर्ज ऑरवेल- मुल्क राज आनंद की नियुक्ति की 

इस दौरान बीबीसी चुपचाप नहीं था. दूसरा विश्व युद्ध शुरू होते ही बीबीसी ने धुरी शक्तियों के खिलाफ प्रचार करना शुरू कर दिया और जहां भी मौका मिलता भारत की आजादी की पुकार को दबाने से नहीं रुकता. इसी परिस्थिति में बीबीसी ने अपने प्रोपगैंडा वार को धार देने के लिए प्रख्यात लेखक जॉर्ज ऑरवेल को अपने रेडियो में नौकरी दी. 

जॉर्ज ऑरवेल की नियुक्ति के बाद बीबीसी ने 11 मई 1940 को अपने इंडियन सेक्शन से भी प्रसारण शुरू कर दिया था. यहां से अंग्रेजी और पांच भारतीय भाषाओं में समाचार और करेंट अफेयर के कार्यक्रम का प्रसारण किया जाता था. बीबीसी ने अपने पक्ष में माहौल बनाने के लिए उस समय दिग्गज भारतीयों की नियुक्ति बीबीसी रेडियो में की थी. इनमें नारायण मेनन, एमजे थंबीमुट्टू, आईबी सरिन, वेणु चिताले, मुल्क राज आनंद और कपूरथला की इंदिरा देवी शामिल थीं. ये लोग उस समय के बौद्धिक और शिक्षित भारत का चेहरा थे. 

बीबीसी का पक्ष भी समझिए

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उस समय बीबीसी पर भले ही अपना प्रोपगैंडा चलाने का आरोप लगता रहा हो, लेकिन बीबीसी का कहना है कि वो इन सेवाओं के जरिये एक्सिस पावर्स के प्रोपेगैंडा का जवाब दे रहा था. यहां यह भी जानना जरूरी है कि जब आजाद हिंद रेडियो का प्रसारण शुरू हुआ तो उस समय इसे जर्मनी की तत्कालीन सरकार से काफी मदद मिली थी और इसके प्रसारणों में भी जर्मनी की नाजी सरकार का प्रभाव दिखता था. इसलिए बीबीसी के जरिए इस नैरेटिव को काउंटर किया जा रहा था. बीबीसी का कहना है कि 'Through Eastern Eyes' और 'Open Letters' जैसे कार्यक्रमों के जरिये सुभाष चंद्र बोस के प्रसारणों का जवाब दिया जा रहा था. 

BBC को सुभाष बाबू ने कहा  Bluff and Bluster corporation

बता दें कि बीबीसी स्थापना के समय से ही अपने कार्यक्रमों में ब्रिटेन की औपनिवेशिक नीति का समर्थन करता था और उसे येन-केन प्रकारेण जायज ही ठहराता था. इसलिए सुभाष चंद्र बोस बीबीसी को  Bluff and Bluster corporation यानी कि झूठ फैलाने वाला और धोखे देने वाला कॉरपोरेशन कहते थे. सुभाष चंद्र बोस उस समय ऑल इंडिया रेडियो को एंटी इंडिया रेडियो कहा करते थे. ये वो दौर था जब ऑल इंडिया रेडियो का स्वामित्व ब्रिटिश सरकार के हाथों में था. 

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जापान के खिलाफ स्टोरी चलाकर भारतीयों को प्रभावित किया

बीबीसी और आजाद हिंद रेडियो के बीच प्रोपेगैंडा वार किस तरह चल रहा था. इसका उदाहरण आईआईएमसी के एक रिसर्च पेपर में मिलता है. जब दूसरा विश्व युद्द जापान पहुंचा तो बोस ने भी देश की आजादी के लिए अंग्रेजों के खिलाफ पूर्वी बॉर्डर से आजाद हिंद फौज के साथ लड़ाई शुरू कर दी. इसी दौरान बीबीसी के जरिये अंग्रेजों ने एक चाल चली. जॉर्ज ऑरवेल ने बीबीसी पर एक स्टोरी चलाई जिसमें चीनियों पर जापानियों के अत्याचार का जिक्र था. जब ये स्टोरी बीबीसी पर प्रसारित हुई तो गांधीजी चीनियों के प्रति जापानियों के व्यवहार से दुखी हुए. उन्होंने भारतीयों से कहा कि वे जापानियों से अपने रिश्तों को विराम दे दें. पूर्वी बॉर्डर पर इससे सुभाष चंद्र बोस का ऑपरेशन भी प्रभावित हुआ. 

रिसर्च पेपर के मुताबिक आजाद हिंद रेडियो के प्रसारण ने अंग्रेजों को पब्लिक ब्रॉडकास्टिंग के क्षेत्र में तगड़ी चुनौती दी. आजाद हिंद रेडियो के बाद बीबीसी को अपनी नीति बदलनी पड़ी और वे आजादी की आवाज को दबाने के लिए नीतियां बनाने लगे. बावजूद इसके बीबीसी और आजाद हिंद रेडियो के बीच की इस प्रतिद्वंदविता ने भारत के स्वतंत्रता संग्राम को पूरी तरह से वैश्विक मंच पर ला खड़ा कर दिया.

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