केंद्र और पश्चिम बंगाल के बीच जारी तनातनी की नई कड़ी के किरदार राज्य के पूर्व चीफ सेक्रेटरी अलपन बंदोपाध्याय ने भारत सरकार को नोटिस का जवाब भेज दिया है. केंद्र सरकार की ओर से 31 मई को अलपन बंदोपाध्याय को नोटिस भेजा गया था.
सूत्रों के अनुसार, अलपन बंदोपाध्याय ने अपने जवाब में कहा है कि उन्होंने वही किया जो मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने निर्देश दिया. सूत्रों के अनुसार अलपन ने समीक्षा बैठक के दिन समय सीमा के साथ चीजों को स्पष्ट करते हुए जवाब दिया है. उन्होंने कहा कि वह उस समय मुख्यमंत्री के साथ थे और उत्तर और दक्षिण 24 परगना में हवाई सर्वेक्षण कर रहे थे. वह प्रधानमंत्री से मुलाकात के बाद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की अनुमति पर दीघा गए थे.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले महीने साइक्लोन यास के बाद बंगाल में जाकर बैठक की थी, लेकिन अलपन उस मीटिंग में नहीं पहुंचे थे. केंद्र सरकार ने कल तीन दिन में उनसे बैठक में शामिल ना होने का कारण मांगा था.
ममता ने सलाहकार नियुक्त किया
केंद्र सरकार की ओर से डिजास्टर मैनेजमेंट एक्ट के सेक्शन 51 (B) का इस्तेमाल किया गया है. नोटिस में अलपन बंदोपाध्याय से पूछा गया कि उनके खिलाफ क्यों ना एक्शन लिया जाए, इसका कारण तीन दिनों में बताएं.
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की समीक्षा बैठक में नहीं आने के बाद केंद्र ने पहले ही अलपन बंदोपाध्याय पर कड़ा रुख अपनाया. पहले केंद्रीय कार्मिक मंत्रालय ने अलपन को दिल्ली बुलाया, लेकिन ममता बनर्जी ने उन्हें दिल्ली नहीं भेजा. अब मुख्यमंत्री ममता ने उन्हें चीफ सेक्रेटरी के पद से हटाकर अपना सलाहकार नियुक्त कर दिया है.
हालांकि, ममता के इस फैसले के बाद भी केंद्र सरकार के पास ताकत है कि वह इस मामले में अलपन बंदोपाध्याय के खिलाफ एक्शन ले सकती है. अलपन को पिछले मंगलवार को भी नॉर्थ ब्लॉक में रिपोर्ट करने को कहा गया था, लेकिन उन्होंने नहीं किया.