पश्चिम बंगाल में पंचायत चुनाव को लेकर गहमा-गहमा जारी है. जुलाई में होनी वाली मतदान प्रक्रिया के लिए नामांकन शुरू हो चुके हैं. नामांकन की अवधि बढ़ाने की अपील के बाद शुक्रवार को हाईकोर्ट की तरफ से कुछ प्रखंडों के लिए नामांकन की अवधि बढ़ाई गई है. जानकारी के मुताबिक, कलकत्ता हाईकोर्ट ने बशीरहाट के पांच प्रखंडों के बीजेपी उम्मीदवारों के लिए नामांकन दाखिल करने के लिए अतिरिक्त समय दिया है. शुक्रवार को कलकत्ता हाईकोर्ट की न्यायाधीश अमृता सिन्हा ने यह आदेश दिया.
इन प्रखंडों के उम्मीदवारों को मिला मौका
जस्टिस अमृता सिन्हा के मुताबिक, बशीरहाट के संदेशखाली 1 और संदेशखाली 2, मीनाखान, नजत और हरोआ प्रखंड से नामांकन नहीं भर पाने वाले बीजेपी उम्मीदवारों को यह मौका मिलेगा. लेकिन नामांकन का चरण बीडीओ कार्यालय में नहीं बल्कि एसडीओ कार्यालय में पूरा होना है.
सुरक्षा मुहैया कराने के निर्देश
जस्टिस अमृता सिन्हा ने लगभग 60 उम्मीदवारों को शाम चार बजे तक अनुमंडल कार्यालय पहुंचकर नामांकन जमा करने का निर्देश दिया. उन्होंने कहा कि बशीरहाट पुलिस जिला एसपी व बशीरहाट थाना प्रभारी को आवश्यक सुरक्षा मुहैया कराएं. रिटर्निंग ऑफिसर को सभी नामांकन स्वीकार करने के निर्देश दिए गए हैं.
बीजेपी ने हाईकोर्ट को दी थी शिकायत
बता दें कि पंचायत चुनाव के लिए राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा नामांकन दाखिल करने की निर्धारित समय सीमा गुरुवार को समाप्त हो गई थी, लेकिन शुक्रवार सुबह ही बीजेपी के वकीलों ने हाईकोर्ट में शिकायत की है कि कोर्ट के आदेश के बावजूद पुलिस ने बशीरहाट में उनके पार्टी के उम्मीदवारों को नामांकन पेश करने के लिए जरूरी सुरक्षा मुहैया नहीं कराई.
पहले नामांकन की तारीख बढ़ाने से था हाईकोर्ट का इनकार
बता दें कि इससे पहले कलकत्ता हाईकोर्ट ने पश्चिम बंगाल में विपक्षी पार्टियों को झटका दिया था. हाईकोर्ट ने राज्य में पंचायत चुनाव के लिए नामांकन की तारीख बढ़ाने से इनकार कर दिया था. बंगाल पंचायत चुनाव की तारीखों की घोषणा होने के बाद कलकत्ता हाईकोर्ट में दो जनहित याचिकाएं दाखिल की गई थीं. जिनमें पंचायत चुनाव के लिए राज्य निर्वाचन आयोग की ओर से जारी नोटिफिकेशन के कुछ हिस्सों को चुनौती दी गई थी. एक याचिका राज्य कांग्रेस अध्यक्ष अधीररंजन चौधरी ने और दूसरी याचिका शुभेंदु अधिकारी ने दाखिल की थी. बता दें कि पंश्चिम बंगाल में 8 जुलाई को ग्राम पंचायत, पंचायत समिति और जिला परिषद के लिए चुनाव होने हैं.
अदालत ने दिए थे ये तर्क
कोर्ट ने कहा था कि, याचिका में 9 जून की अधिसूचना को रद्द करने की मांग की गई है. यदि हम अधिसूचना को रद्द कर देते हैं, तो यह चुनाव पर ही सवाल खड़ा करने जैसा होगा. यह अदालत इस याचिका पर विचार करने के लिए इच्छुक नहीं है. कोर्ट ने कहा कि नामांकन दाखिल करने के लिए समय बढ़ाने का निर्देश देने वाले आदेश पर विचार नहीं किया जा सकता है. इसके साथ ही अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि, समय बढ़ाने का विवेक पूरी तरह से एसईसी के पास है. एसईसी ऐसे मुद्दे से निपटने के लिए सक्षम है और अदालत इसे आयोग के विवेक पर छोड़ती है.
हालांकि शुक्रवार को बीजेपी की ओर से दी गई शिकायत के बाद कोर्ट ने कुछ प्रखंडों के लिए नामांकन दाखिल करने के लिए अतिरिक्त समय दिया है.