दिल्ली के टिकरी बॉर्डर पर किसानों का आंदोलन जारी है. इस बीच बीते दिन एक पोस्टर को लेकर काफी विवाद हुआ. भारतीय किसान यूनियन एकता (उगराहां) के एक पोस्टर में उमर खालिद, शरजील इमाम समेत अन्य कुछ लोगों के पोस्टर को लेकर आपत्ति जताई गई. लेकिन अब यूनियन की ओर से इसपर सफाई दी गई है.
भारतीय किसान यूनियन एकता (उगराहां) के नेता झंडा सिंह का कहना है कि ये सिर्फ हमारे संगठन की ओर से पोस्टर लगाए गए थे. ये सभी बुद्धिजीवी हैं और हमारी मांग है कि जिन बुद्धिजीवियों को जेल में डाला गया है, उन्हें रिहा किया जाए.
झंडा सिंह के मुताबिक, 30 संगठनों ने सरकार को जो मांग पत्र दिया था, उनमें बुद्धिजीवियों और किसानों को रिहा करने की मांग थी. ये सभी बुद्धिजीवी हैं, ऐसे में कोई विवाद नहीं होना चाहिए.
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आपको बता दें कि किसान आंदोलन के बीच गुरुवार को मानवाधिकार दिवस के मौके पर टिकरी बॉर्डर पर प्रदर्शन किया गया. इस दौरान किसानों के मंच पर एक पोस्टर लगाया गया, जिसमें उमर खालिद, शरजील इमाम, गौतम नवलखा, सुधा भारद्वाज, वरवरा राव समेत अन्य लोगों की रिहाई की मांग की गई थी.
आरोप लगाया गया है कि इन सभी को झूठे केसों में अंदर डाला गया है, ऐसे में सरकार को इन्हें तुरंत रिहा करना चाहिए. हालांकि, अन्य किसान नेताओं ने इस पोस्टर की जानकारी होने से इनकार किया.
किसान नेता राकेश टिकैत ने भी कहा कि हम किसी को कोई मंच नहीं देना चाहते हैं, हम सिर्फ किसानों की बात और अपने मुद्दों को आगे रख रहे हैं. अगर कोई बाहरी गतिविधि यहां होती है, तो पुलिस को उनपर निगाह रखनी चाहिए. गौरतलब है कि जिन एक्टिविस्ट के पोस्टर लगाए गए, उनमें से कई हिंसा भड़काने और राजद्रोह से जुड़े मामलों को लेकर जेल में हैं.
इस मसले पर कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने भी आपत्ति जताई है. शुक्रवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने आरोप लगाया कि एमएसपी, एएमपीसी और अन्य मुद्दे किसानों से संबंधित हैं, लेकिन ये पोस्टर किसान का मुद्दा कैसे हो सकते हैं. यह खतरनाक है और यूनियनों को इससे खुद को दूर रखना चाहिए. यह सिर्फ मुद्दों को हटाने और विचलित करने के लिए है.