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Bhasan Char Island: जानिए उस आईलैंड के बारे में जहां रोहिंग्याओं को छोड़ रहा बांग्लादेश

Bhasan Char Island: एक अनुमान के मुताबिक, बांग्लादेश के Cox's Bazar में करीब 8 लाख से ज्यादा रोहिंग्या शरणार्थी रह रहे हैं. लेकिन अब धीरे-धीरे इनमें से करीब 1 लाख शरणार्थियों को यहां से दूर 'भासन चार' आईलैंड पर भेजा जा रहा है.  

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रोहिंग्या मुस्लिम
रोहिंग्या मुस्लिम
स्टोरी हाइलाइट्स
  • 'भासन चार'आईलैंड में रोहिंग्याओं को छोड़ रहा बांग्लादेश
  • ये आईलैंड बंगाल की खाड़ी पर बसा है
  • यहां अक्सर बाढ़ आ जाती है

Bhasan Char Island: रोहिंग्या शरणार्थियों (Rohingya Refugees) के मसले पर बांग्लादेश एक बार फिर चर्चा में है. यहां की सरकार 1,600 से अधिक रोहिंग्या शरणार्थियों को बंगाल की खाड़ी में 'भासन चार' (Bhasan Char) नाम के एक आईलैंड पर भेज रही है. हालांकि, दावा है कि इन शरणार्थियों को जबरन द्वीप पर नहीं भेजा जा रहा है. लेकिन, कुछ मानवाधिकार समूहों ने इस प्रक्रिया पर सवाल उठाएं हैं.

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एक अनुमान के मुताबिक, बांग्लादेश के Cox's Bazar में करीब 8 लाख से ज्यादा रोहिंग्या शरणार्थी रह रहे हैं. लेकिन अब धीरे-धीरे इनमें से करीब 1 लाख शरणार्थियों को यहां से दूर 'भासन चार' आईलैंड पर भेजा जा रहा है.  

आपको बता दें कि 'भासन चार' आईलैंड बंगाल की खाड़ी पर बसा है. ये आइलैंड हिमालय की गाद से बना था. इसको 20 साल पहले समुद्र में खोजा गया था. यहां अक्सर बाढ़ आ जाती है. यहां का अधिकांश हिस्सा मानसून के दौरान जलमग्न रहता है. खबरों की मानें तो बांग्लादेश सरकार इस आईलैंड पर हजार से ज्यादा बिल्डिंग बनाने की तैयारी में है जिनमें लाखों रोहिंग्या शरणार्थियों को रखा जाएगा. एसोसिएटेड प्रेस के अनुसार, 1642 रोहिंग्या लोगों का पहला समूह 4 दिसंबर को 'भासन चार' पहुंचा, जिसे चटगांव से नौसैनिक जहाजों द्वारा ले जाया गया. 

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वहीं, यूनाइटेड नेशन में Human Rights पर रिपोर्ट कर रहीं Yanghee lee के मुताबिक, ये कहना मुश्किल है कि 'भासन चार' आईलैंड इंसानों के रहने लायक है या नहीं. बिना ठोस योजना और सहमति के रोहिंग्याओं को यहां भेजना एक नई मुसीबत को बुलावा दे सकता है. इस आईलैंड पर बाढ़ और साइक्लोन का खतरा मंडराता रहता है. 

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मालूम हो कि रोहिंग्या शरणार्थियों को 'भासन चार' लाने की यह योजना साल 2017 से चल रही है. 2018 में, प्रधानमंत्री शेख हसीना ने कहा था कि यह एक अस्थायी व्यवस्था होगी. जबकि उनके एक मंत्री ने कहा था कि रोहिंग्याओं को तब तक यहां से बाहर नहीं जाने दिया जाएगा जब तक कि ये वापस म्यांमार नहीं जाते. 
 
आपको बता दें कि रोहिंग्या शरणार्थी मुसलमान मूल रूप से म्यांमार के रखाइन प्रान्त के रहने वाले वाले हैं. म्यांमार की अधिकांश आबादी बौद्ध है. म्यांमार की सरकार इन रोहिंग्या मुसलमानों को नागरिकता देने से हमेशा से इनकार करती रही है. रखाइन में कई सालों से जारी सांप्रदायिक हिंसा की वजह से कई लाख लोग विस्थापित हुए हैं. म्यांमार में बचे हुए रोहिंग्या मुसलमान आज भी कैंपों में रह रहे हैं. 

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