भीमा कोरेगांव हिंसा मामले में आरोपी शोमा सेन के जमानत मामले में सुनवाई टल गई है. आरोपी की मेडिकल आधार पर जमानत की मांग करती हुई याचिका पर अब 6 दिसंबर को सुनवाई होगी. कोर्ट के समक्ष ASG केएम नटराज ने कहा कि हम एक हफ्ते में मेडिकल बोर्ड का गठन कर सकते हैं. वहीं वरिष्ठ वकील आनंद ग्रोवर ने कहा कि उन्हें (शोमा सेन) अपनी बेटी के साथ नागपुर में रहने दें, सेन साढ़े 5 साल से जेल में हैं.
एनआईए ने विरोध करते हुए कहा कि वह सामान्य बीमारियों से पीड़ित हैं और इसमें कुछ खास नहीं है. एनआईए की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल केएम नटराज ने न्यायमूर्ति अनिरुद्ध बोस और न्यायमूर्ति ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की पीठ को बताया कि सेन की चिकित्सा स्थिति को सत्यापित करने के लिए एक मेडिकल बोर्ड का गठन किया जा सकता है और ऐसा कुछ भी नहीं है जिसके लिए तत्काल उपचार की आवश्यकता हो.
अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ने सेन को किसी भी राहत का कड़ा विरोध किया और कहा कि वह जमानत से संबंधित मुख्य मामले पर बहस करने के लिए तैयार हैं. इसके बाद शीर्ष अदालत ने कहा कि वह इस मामले की सुनवाई छह दिसंबर को करेगी. साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने संकेत दिए कि कड़ी शर्तों के तहत चार हफ्ते के लिए अंतरिम जमानत दी जा सकती है.
बता दें कि अंग्रेजी की प्रोफेसर शोमा सेन 2018 से जेल में बंद हैं. पुणे के भीमा कोरेगांव में भड़की जातीय हिंसा के बाद एनआईए ने उन्हें गिरफ्तार किया था. उनके खिलाफ UAPA एक्ट के तहत केस दर्ज किया गया था. जांच एजेंसी का कहना है कि शोमा का सीपीआई (माओवादी) से संबंध है.