देश में कोयले और बिजली की स्थिति को लेकर मंगलवार को गृह मंत्रालय में बड़ी बैठक हुई. सूत्रों के मुताबिक ऐसी आशंका जताई गई थी कि NTPC को चलाने के लिए कई राज्यों में कोयले के भंडार की कमी की वजह से बिजली संकट (Electricity Crisis) पैदा हो सकता है, इसको लेकर कुछ राज्यों ने केंद्र को पत्र लिखा था. इसी के बाद यह बैठक हुई है. गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में केंद्रीय ऊर्जा मंत्री आर.के. सिंह, केंद्रीय कोयला मंत्री प्रह्लाद जोशी के अलावा रेल मंत्री, कैबिनेट सेक्रेटरी, नावेली लिग्नाईट कॉरपोरेशन के CMD, कोल डिपार्टमेंट के अधिकारी मौजूद रहे.
12 राज्यों में बिजली संकट: राउत
बता दें कि देश में भीषण गर्मी के बीच दिल्ली महाराष्ट्र में बिजली की भारी मांग है. इस वजह से कई राज्यों में बिजली की कमी हो रही है. महाराष्ट्र के ऊर्जा मंत्री नितिन राउत ने मंगलवार को कहा कि कोयले की कमी के कारण 12 राज्यों को बिजली संकट का सामना करना पड़ रहा है. उनका विभाग इस कमी को कम करने के लिए माइक्रो लेवल की योजना पर काम कर रहा है. उन्होंने दावा किया कि इस योजना के कारण ही पिछले छह दिनों से महाराष्ट्र में कोई लोड-शेडिंग नहीं हुई और बिजली की कमी 15 प्रतिशत तक आकर रुक गई है.
कम भेजी जा रहीं कोयला लदी ट्रेनें
ऊर्जा मंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने एक लाख मीट्रिक टन कोयले के आयात के लिए निविदाएं जारी की हैं. कोयले की कमी रेक (ट्रेन) की कमी के कारण है. हमें प्रति दिन 37 रेक की जरूरत होती है, जबकि हमें केवल 26 मिलते हैं. हर रैक 4,000 मीट्रिक टन कोयले का परिवहन कर सकता है.
दिल्ली : 19 दिन में 28% बढ़ गई बिजली की खपत
वहीं दिल्ली में भी बिजली की मांग बढ़ी है. डिस्कॉम के अधिकारियों ने बताया कि गर्मी की वजह से मंगलवार को दिल्ली में बिजली की मांग 5,735 मेगावॉट तक पहुंची गई, जो अप्रैल में अब तक की सबसे ज्यादा है. 1 अप्रैल के मुकाबले इसमें 28 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि हो गई है. उस समय बिजली की मांग 4,469 मेगावॉट दर्ज की गई थी. वहीं एक दिन पहले बिजली की पीक डिमांड 5,641 मेगावॉट थी. उन्होंने कहा कि इससे पहले 30 अप्रैल 2019 को मांग 5,664 मेगावॉट तक पहुंच गई थी.
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