बिहार में विधानसभा चुनाव साल के अंत तक होने हैं, लेकिन मुख्यमंत्री के चेहरे को लेकर सियासी घमासान अभी से शुरू हो गया है. बिहार बीजेपी अध्यक्ष दिलीप जायसवाल ने आजतक से बातचीत में कहा कि राज्य में मुख्यमंत्री का चेहरा कौन होगा, यह बीजेपी संसदीय बोर्ड तय करेगा. हालांकि, इतना तय है कि चुनाव नीतीश कुमार के नेतृत्व में लड़ा जाएगा, लेकिन मुख्यमंत्री पद पर अंतिम फैसला एनडीए के घटक दल मिलकर करेंगे.
दिलीप जायसवाल के इस बयान के बाद मुख्यमंत्री के चेहरे को लेकर सवाल उठने लगे. साथ ही नीतीश कुमार के राजनीतिक भविष्य को लेकर भी चर्चाएं तेज हो गईं. विपक्ष ने बीजेपी की मंशा पर सवाल उठाते हुए नीतीश कुमार को आगाह किया, जिससे बिहार में बीजेपी और एनडीए के बड़े नेताओं को डैमेज कंट्रोल के लिए सामने आना पड़ा.
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सबसे पहले बिहार के डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी ने स्थिति को संभालते हुए स्पष्ट किया कि नीतीश कुमार आगे भी मुख्यमंत्री बने रहेंगे. उन्होंने कहा, 'नीतीश कुमार पहले भी बिहार के मुख्यमंत्री थे, आज भी हैं और कल भी रहेंगे.' उन्होंने यह भी जोड़ा कि 1996 से बिहार में उन्हीं के नेतृत्व में काम हो रहा है और आगे भी जारी रहेगा.
सम्राट चौधरी के बाद NDA के अन्य नेताओं को भी डैमेज कंट्रोल के लिए सामने आना पड़ा. इसी क्रम में बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री और मोदी सरकार में मंत्री जीतन राम मांझी ने भी स्पष्ट किया कि बिहार में NDA नीतीश कुमार की अगुवाई में ही चुनाव लड़ेगा और मुख्यमंत्री भी वही बनेंगे. हालांकि, मांझी ने बाद में यह भी कहा कि फिलहाल यही फार्मूला तय है, लेकिन भविष्य में कोई नया फैसला लिया जाता है तो इस पर अभी कुछ नहीं कहा जा सकता.
इसके अलावा जीतन राम मांझी के बेटे और बिहार सरकार में मंत्री संतोष सुमन मांझी भी नीतीश कुमार के समर्थन में बोलते नजर आए. अपने पिता की ही तरह उन्होंने कहा कि राज्य में NDA नीतीश कुमार के नेतृत्व में ही चुनाव लड़ेगा. अगर आगामी बिहार विधानसभा चुनाव में NDA जीतती है तो मुख्यमंत्री भी नीतीश कुमार ही बनेंगे.
बीजेपी अध्यक्ष दिलीप जायसवाल के बयान के बाद बीजेपी और एनडीए नेताओं के इन बयानों को राज्य की राजनीति में मचे उथल-पुथल को शांत करने की रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है.