बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे (Nishikant Dubey) के तृणमूल कांग्रेस (TMC) की महुआ मोइत्रा (Mahua Moitra) पर लगाए गए 'बिहारी गुंडा' (Bihari Gunda) बोलने के आरोपों के बाद विवाद बढ़ता जा रहा है. हालांकि, मोइत्रा ने ऐसा कुछ बोलने से इनकार किया है, लेकिन निशिकांत दुबे अपनी बात पर अडिग हैं. इस बीच, निशिकांत दुबे ने कहा कि महुआ मोइत्रा को यह नहीं पता कि कमेटी में 31 लोग हैं.
दो सांसद- निसिथ प्रमाणिक, भानु प्रताप वर्मा मंत्री बन चुके हैं, उनकी जगह पर प्रवेश वर्मा और गणेश सिंह बैठक में मौजूद थे. नए सदस्य बैठक में मौजूद थे, लेकिन महुआ मोइत्रा को नहीं मालूम कि नए सदस्य कौन आ गए. दुबे ने दावा किया कि महुआ मोइत्रा के इन शब्दों का इस्तेमाल करने के बाद कांग्रेस सांसद शक्ति सिंह गोहिल ने माफी भी मांगी थी.
आजतक के कार्यक्रम 'हल्ला बोल' में कांग्रेस सांसद शशि थरूर पर हमला बोलते हुए निशिकांत दुबे ने कहा, ''शशि थरूर ने ट्वीट करके डिलीट कर दिया. उन्हें यह नहीं मालूम है कि जब प्रिविलेज होता है तो एक सदस्य करता है. उन्होंने ट्वीट कर लिखा कि जब 25 सदस्य खड़े ही नहीं हुए तो प्रिविलेज कैसे हो गया. दोनों को नियम-कानून की कोई जानकारी नहीं है. वहीं, जब सत्र चलता है तो मैं किसी भी कमेटी की बैठक में भाग नहीं लेता हूं.''
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उन्होंने आगे कहा कि जब हम सभी लोग कमेटी में पहुंचे तो जैसे ही कमेटी के चेयरमैन ने बोला शुरू किया तो मैंने कहा कि अध्यक्ष महोदय, पहले आप यह बताइए कि आपके पास कोरम है या नहीं. कोरम में सिर्फ आठ लोग थे. इसी दौरान, टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा ने मुझे बिहारी गुंडा कह दिया.
'शक्तिसिंह गोहिल ने मुझसे मांगी माफी'
बीजेपी सांसद ने मीटिंग में साइन नहीं करने वाले आरोपों पर कहा कि बैठक की पूरी कॉपी मेरे पास मौजूद है. उसके बाद कांग्रेस सांसद शक्तिसिंह गोहिल ने मुझसे ऑनरिकॉर्ड माफी मांगी और कहा कि संसदीय जीवन के इतिहास में इस तरह की घटना और महिला की ओर से ऐसी घटना नहीं देखी. इस वजह से वे कांग्रेस और कमेटी की ओर से उन्होंने माफी मांगी. वहीं, डीएमके की सांसद भी थीं, उन्होंने भी कहा कि यह गलत हुआ है. बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने कहा कि जब लोकसभा और राज्यसभा में चर्चा होगी तो कांग्रेस का क्या रुख है, उसके बारे में पता चलेगा, लेकिन जब स्टैंडिंग कमेटी में क्या हुआ, इस पर जबतक रिपोर्ट नहीं दी जाएगी तब तक कोई देख नहीं सकेगा.
'कमेटी में भाग लेने के लिए साइन की जरूरत नहीं'
उन्होंने आगे कहा, ''मैंने कल शशि थरूर के खिलाफ प्रिविलेज फाइल किया और शाम छह बजे तक साइन भी नहीं किए. इसका मतलब यह नहीं हआ कि मैं वहां मौजूद नहीं था या फिर नहीं बोला. मैंने दो हजार रुपये अपना मेहनताना छोड़ दिया. इतनी ही सिर्फ बात है. मुझे फिजिकली किसी भी कमेटी में भाग लेने के लिए साइन करने की जरूरत नहीं है, बल्कि मुझे उस सदन में जाने की जरूरत है. महुआ मोइत्रा अभी दो साल पहले आई हैं, इसलिए नियम-कानून नहीं पता. इन लोगों को हिंदी भाषियों के खिलाफ जाना है.''
जानिए, क्या है पूरा मामला?
दरअसल, बुधवार को निशिकांत दुबे ने ट्वीट करके आरोप लगाया था कि आईटी से जुड़ी संसदीय समिति की बैठक के दौरान तृणमूल कांग्रेस की सांसद महुआ मोइत्रा ने उन्हें 'बिहारी गुंडा' कहा. ट्विटर पर टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी को टैग करते हुए निशिकांत दुबे ने कहा कि ममता जी आप की सांसद महुआ मोइत्रा की इस गाली ने उत्तर भारतीय व खासकर हिंदी भाषी लोगों के प्रति आपकी पार्टी के नफरत को देश के सामने लाया है. वहीं, दुबे के इन आरोपों पर महुआ मोइत्रा ने भी जवाब दिया. उन्होंने कहा कि उन्हें आरोपों पर हंसी आ रही है, जब आईटी से जुड़ी संसदीय समिति की बैठक में दुबे मौजूद ही नहीं थे तो उन्हें कुछ कहने का सवाल ही कहां से आया.