बिलकिस बानो केस में आजीवन कारावास की सजा भुगत रहे 11 आरोपी अब जेल की सलाखों के बाहर आ चुके हैं. देश जब आजादी के 75 साल पूरे होने का जश्न मना रहा था, उसी दिन 2002 के बिलकिस बानो केस के 11 गुनहगार भी खुली हवा में सांस लेने के लिए रिहा हो रहे थे. आजीवन कारावास की सजा भुगत रहे ये 11 दोषी जेल से रिहा हुए तो बिलकिस बानो का 20 साल पुराना जख्म हरा हो आया वहीं विपक्षी दलों ने भी भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) और गुजरात सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया.
लोग विरोध में कोर्ट को चिट्ठी लिखने लगे. बिलकिस बानो के समर्थन में आंदोलन सा खड़ा होने लगा. अब इसे लेकर बिलकिस बानो के गुनहगारों को दोषी ठहराने और सजा देने वाले निचली अदालत के जज (अब सेवानिवृत्त) यूडी साल्वी की प्रतिक्रिया आई है. आजतक से बात करते हुए सेवानिवृत्त जज यूडी साल्वी ने बिलकिस बानो केस के गुनहगारों के जेल से बाहर निकलने और इस पर मिठाई बांटे जाने, माला पहनाकर स्वागत किए जाने को लेकर कहा है कि ये सही नहीं है.
उन्होंने कहा कि एक बार जब उन्हें दोषी ठहराया गया और सुप्रीम कोर्ट ने भी दोषसिद्धि को बरकरार रखा तो इसका मतलब है कि उन्होंने अपराध किया है. यूडी साल्वी ने कहा कि अपराधियों को माला पहनाना सही नहीं है. मैं कहूंगा कि ये बैड टेस्ट है लेकिन क्या किया जा सकता है. कोर्ट में सुनवाई के दौरान बिलकिस बानो ने कितनी बहादुरी के साथ अपना पक्ष रखा, इसे याद करते हुए उन्होंने कहा कि आरोपी उसके ही गांव के थे. वह आरोपियों को जानती थी. बिलकिस बानो ने भीड़ में से आरोपियों की पहचान की थी और उनके नाम भी लिए थे.
दोषियों की रिहाई के विरोध को लेकर निचली अदालत के पूर्व जज ने कहा कि लोग अधिकारियों से संपर्क कर सकते हैं. सुप्रीम कोर्ट के पास न्यायिक समीक्षा का अधिकार है कि क्या ये विशेष अधिनियम उचित था? गौरतलब है कि यूडी साल्वी निचली अदालत के न्यायाधीश थे और इनकी अदालत ने ही साक्ष्यों और गवाहों के बयान के आधार पर 15 अगस्त के दिन रिहा हुए इन 11 आरोपियों को दोषी ठहराया था. यूडी साल्वी की कोर्ट ने ही साल 2008 में 11 दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी.
जस्टिस साल्वी ने याद करते हुए बताया कि अभियोजन पक्ष चाहता था कि दोषियों को मौत की सजा दी जाए. अपने फैसले के अंतिम पैराग्राफ में मैंने ये भी बताया था कि मौत की सजा क्यों नहीं दी जा सकती. उन्होंने कहा कि बॉम्बे हाईकोर्ट ने भी उनकी कोर्ट की ओर से दी गई सजा को बरकरार रखा था और सजा नहीं बढ़ाने का फैसला किया था.
यूडी साल्वी की कोर्ट के फैसले को पहले हाईकोर्ट में चुनौती दी गई और फिर हाईकोर्ट के फैसला बरकरार रखने पर सुप्रीम कोर्ट में. हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट ने उनके फैसले को बरकरार रखा था. बता दें कि बिलकिस बानो केस के 11 दोषियों को गुजरात सरकार ने सजा में रियायत देने का फैसला किया और इन सभी को 15 अगस्त के दिन रिहा कर दिया गया था.