सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने बिलकिस बानो मामले में दो दोषियों की अंतरिम जमानत याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया है. मामले दोषी पाए गए राधाश्याम भगवानदास और राजूभाई बाबूलाल सोनी ने अंतरिम जमानत के लिए कोर्ट में याचिका दायर की थी. जस्टिस संजीव खन्ना और जस्टिस संजय कुमार की बेंच ने मामले की सुनवाई से इनकार कर दिया. सुप्रीम कोर्ट ने याचिका पर सुनवाई से इंकार करते हुए कहा कि ये गलत तरीके से तैयार की गई याचिका है.
वहीं, एडवोकेट ऋषि मल्होत्रा ने कहा कि मैं अपनी याचिका वापस ले लूंगा.
'ये बिल्कुल गलत है...'
सुप्रीम कोर्ट ने याचिका पर सवाल उठाते हुए कहा कि यह कैसे स्वीकार्य है? ये बिल्कुल गलत है. जनहित याचिका में हम अपील पर कैसे बैठ सकते हैं? जनहित याचिका के खिलाफ अपील पर सुनवाई उचित नहीं है.
बता दें कि याचिकाकर्ताओं ने मांग की थी कि जब तक उनकी सजा में छूट पर नया फैसला नहीं आ जाता, तब तक अंतरिम जमानत दी जाए.
एडवोकेट ऋषि मल्होत्रा ने कहा कि इस मामले में अब दो कोर्ट के फैसले हैं. मुझे अथॉरिटी से संपर्क करने की अनुमति दी जाए. लेकिन जस्टिस संजीव खन्ना ने कहा कि दूसरा फैसला ही मान्य होगा.
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दरअसल, इस मामले मे जनवरी में दिए गए आदेश में सभी 11 दोषियों को दी गई सजा में छूट यानी आजीवन कारावास की सजा पूरी होने से पहले रिहाई को रद्द कर दिया था. सुप्रीम कोर्ट के जनवरी में आए इस आदेश को चुनौती दी गई थी.
क्या है पूरा मामला?
27 फरवरी 2002 को गुजरात के गोधरा स्टेशन पर साबरमती एक्सप्रेस के कोच को जला दिया गया था. इस ट्रेन से कारसेवक लौट रहे थे. इससे कोच में बैठे 59 कारसेवकों की मौत हो गई थी.
इसके बाद दंगे भड़क गए थे. दंगों की आग से बचने के लिए बिलकिस बानो अपनी बच्ची और परिवार के साथ गांव छोड़कर चली गई थीं.
बिलकिस बानो और उनका परिवार जहां छिपा था, वहां 3 मार्च 2002 को 20-30 लोगों की भीड़ ने तलवार और लाठियों से हमला कर दिया.
भीड़ ने बिलकिस बानो के साथ बलात्कार किया. उस समय बिलकिस 5 महीने की गर्भवती थीं. इतना ही नहीं, उनके परिवार के 7 सदस्यों की हत्या भी कर दी थी. बाकी 6 सदस्य वहां से भाग गए थे.
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