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सरकार ने दोषियों को छोड़ा तो सीधा SC क्यों पहुंचीं बिलकिस बानो, जानें रिहाई के खिलाफ हाई कोर्ट में क्यों नहीं की अपील

बिलकिस बानो मामले में फैसला सुनाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने बताया कि वह (बिलकिस) SC के बजाए हाईकोर्ट क्यों नहीं जा सकती थी. अदालत ने कहा कि कुछ मामलों में तुरंत न्याय की जरूरत होती है और इस वजह से हम उनकी याचिका को खारिज नहीं कर सकते थे.

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सरकार ने दोषियों को छोड़ा तो सीधा SC क्यों पहुंचीं बिलकिस बानो. (फाइल फोटो)
सरकार ने दोषियों को छोड़ा तो सीधा SC क्यों पहुंचीं बिलकिस बानो. (फाइल फोटो)

सुप्रीम कोर्ट ने बिलकिस बानो बलात्कार मामले में गुजरात सरकार के फैसले को पटल दिया है. उच्चतम न्यायालय ने 11 दोषियों को दो हफ्ते के अंदर सरेंडर करने का आदेश दिया है, जहां से उन्हें फिर से जेल भेजा जाएगा. बिलकिस बानो मामले में उनके सुप्रीम कोर्ट पहुंचे पर भी कुछ लोगों ने सवाल उठाया, जिस पर कोर्ट ने स्पष्ट करते हुए बताया कि वह (बिलकिस बानो) सुप्रीम कोर्ट के बजाए हाईकोर्ट क्यों नहीं जा सकती थी.

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HC नहीं निपटा सकता था मुद्दा: SC

अदालत ने तर्क देते हुए कहा कि गुजरात सरकार इस मामले में 11 दोषियों को सजा से छूट देने आदेशों की वैधता पर विचार करने के लिए सक्षम राज्य नहीं  है और गुजरात हाईकोर्ट न्यायिक प्रिंसिपल के आधार पर इस मुद्दे को निपटा नहीं सकता था.

इतना ही नहीं SC ने बिलकिस बानो केस के दोषियों की रिहाई के खिलाफ याचिकाओं को सुनवाई के लिए स्वीकार करते हुए योग्य माना था. कोर्ट ने मई 2022 को आदेश में गुजरात सरकार को रिहाई पर विचार करने का निर्देश दिया था.

सुप्रीम कोर्ट ने यह भी बताया कि एक दोषी ने सजा माफी की गुहार लगाई थी, जिसमें गुजरात सरकार ने बताया कि इस सजा माफ करने उनके अधिकार क्षेत्र में नहीं है.

क्या SC जाना बिलकिस के लिए था सही

अदालत ने कहा कि बिलकिस बानो ने अनुच्छेद 32 के तहत याचिका दायर करके इस न्यायालय का दरवाजा खटखटाया है. यह एक मौलिक अधिकार है, जिसमें कहा गया है कि व्यक्तियों को संविधान द्वारा मान्यता प्राप्त अन्य मौलिक अधिकारों को लागू करने के लिए सुप्रीम कोर्ट पहुंचने का अधिकार है.

संविधान के अनुच्छेद 32 को संविधान की आत्मा भी कहा जाता है. संविधान के भाग-III में अन्य मौलिक अधिकारों को लागू करना है. यह संवैधानिक उपाय संविधान की प्रस्तावना में निहित लक्ष्यों को लागू करने के लिए भी है जो न्याय, स्वतंत्रता, समानता और भाईचारे की बात करते हैं.

अदालत ने बिलकिस के सुप्रीम कोर्ट का रुख करने की बात पर कहा कि किसी-किसी मामले में तुरंत न्याय की जरूरत होती है और इसी आधार पर उनकी याचिका को खारिज नहीं किया जा सकता है.

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क्या है मामला

बता दें कि सोमवार यानी 8 जनवरी 2023 को सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस बीवी नागरत्ना और जस्टिस उज्जल भुइयां की बेंच ने बिलकिस बानो बलात्कार के 11 दोषियों की सजा माफ करने वाले गुजरात सरकार के फैसले को रद्द कर दिया है. पीठ ने लगातार 11 दिन तक सुनवाई कर पिछले साल 12 अक्टूबर को इस मामले में अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था. उम्रकैद की सजा में वक्त से पहले दोषियों की रिहाई पर सुप्रीम कोर्ट ने सवाल उठाए थे. कोर्ट का कहना है कि ये साफ होना चाहिए कि दोषी कैसे माफी के योग्य पाए. और सरकार को फटकार भी लगाई. 

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