भारत सरकार ने नए सीडीएस पद के लिए पूर्वी कमांड के पूर्व कमांडर और डीजीएमओ रिटायर्ड लेफ्टिनेंट जनरल अनिल चौहान को चुना है. अब उन्हें नया चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ बनाया जाएगा. पिछले साल सीडीएस बिपिन रावत की हेलिकॉप्टर हादसे में मौत के बाद से यह पद खाली था.
अब रक्षा मंत्रालय ने बयान जारी करके कहा कि सरकर ने रिटायर्ड लेफ्टिनेंट जनरल अनिल चौहान (Lieutenant General Anil Chauhan) को देश का अगला चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) बनाने का फैसला किया है. चौहान साथ ही डिपार्टमेंट ऑफ मिलिट्री अफेयर्स के सचिव भी रहेंगे. लेकिन यह जानना जरूरी है कि लेफ्टिनेंट जनरल अनिल चौहान ने ऐसे कौन से काम किए हैं, जिनसे देश की सुरक्षा बनी रही.
थ्री-स्टार लेफ्टिनेंट जनरल अनिल चौहान देश के पहले सैन्य अधिकारी हैं, जो रिटायरमेंट के बाद बतौर सीडीएस फोर-स्टार जनरल बनाए जाएंगे. इस समय तीनों सेनाओं को जो प्रमुख हैं, चौहान उनसे सीनियर हैं. लेफ्टिनेंट जनरल चौहान नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल सेक्रेटेरियट (NSCS) में मिलिट्री एडवाइजर रहे हैं. यानी नेशनल सिक्योरिटी एडवाइजर (NSA) अजीत डोभाल के साथ मिलकर इन्होंने कई शानदार मिशन और ऑपरेशंस को अंजाम दिया है.
लेफ्टिनेंट जनरल अनिल चौहान को चीन से संबंधित मामलों की बहुत जानकारी है. वो चीन की हर चाल को समझते हैं. क्योंकि उन्होंने ईस्टर्न कमांड में काफी लंबा काम किया है. वहां के कमांडर भी रहे हैं. वहीं से रिटायर भी हुए. सिर्फ इतना ही नहीं अनिल चौहान स्वदेशी हथियारों और स्वदेशी रक्षा तकनीकों के विकास के हिमायती माने जाते हैं. उनका मानना है कि इससे विदेशों पर निर्भरता कम होगी.
1981 में 11 गोरखा राइफल्स में ज्वाइन किया. इसी राइफल से पूर्व सीडीएस बिपिन रावत भी आए थे. इसके बाद नॉर्दन कमांड में बारामुला सेक्टर के इंफैन्ट्री डिविजन में कमांडर थे. तब मेजर जनरल के पद पर थे अनिल चौहान. इसके बाद लेफ्टिनेंट जनरल बनने पर उन्होंने उत्तर-पूर्व में कॉर्प्स के कमांडिंग ऑफिसर बने. इसके बाद पूर्वी कमांड के जनरल ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ बनाए गए.
पूर्वी कमांड के कमांडर रहते हुए लेफ्टिनेंट जनरल अनिल चौहान चीन से सटी सीमाओं पर कॉम्बैट तैयारियों को तेजी से बढ़ाया. उन्होंने अरुणाचल प्रदेश और सिक्किम में चीन को आगे बढ़ने से रोका. साल 2019 में जब बालाकोट एयरस्ट्राइक हुआ. तब वो भारतीय सेना के डायरेक्टर जनरल ऑफ मिलिट्री ऑपरेशंस (DGMO) थे. उनके लीडरशिप में ही पाकिस्तान के अंदर मौजूद जैश-ए-मोहम्मद आतंकी संगठन के शिविरों पर हवाई हमला बोला गया था.