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कोरोना: अप्रैल में 139, मई में 203 टन मेडिकल कचरा रोजाना निकला, CSE के आंकड़े जारी

पिछले कुछ महीनों में कोरोना की दूसरी लहर के दौरान भारत में बड़ी तबाही देखी गई है. अस्पताल के डॉक्टर्स, नर्सेज आदि लगातार कई घंटों तक रोजाना अपने काम में जुटे रहे, जिससे ज्यादा-से-ज्यादा कोरोना मरीजों की जान बचाई जा सके. हालांकि, इस दौरान बायोमेडिकल वेस्टेज में भी बढ़ोतरी हुई है. आंकड़ों के अनुसार, देश अप्रैल में कोविड-19 से संबंधित बायोमेडिकल कचरे का उत्पादन प्रति दिन 139 टन हुआ है.

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कोरोना की दूसरी लहर में बायोमेडिकल वेस्ट में हुई बढ़ोतरी
कोरोना की दूसरी लहर में बायोमेडिकल वेस्ट में हुई बढ़ोतरी
स्टोरी हाइलाइट्स
  • भारत में बायोमेडिकल वेस्ट में बढ़ोतरी हुई है
  • कोरोना की दूसरी लहर के दौरान तेजी से बढ़ा है बायोमेडिकल वेस्ट
  • सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट ने आंकड़े जारी किए

बीते कुछ सालों में भारत में बायोमेडिकल वेस्ट (BMW) के उत्पादन में बढ़ोतरी हुई है. साल 2017 से 2019 के बीच में यह 559 टन प्रति दिन से बढ़कर 619 टन प्रति दिन पर पहुंच गया है. 69 फीसदी के साथ बिहार और 47 फीसदी के साथ कर्नाटक सबसे खराब रहे हैं. वहीं, इसी अवधि के दौरान, देश में अधिकृत स्वास्थ्य सुविधाओं की संख्या 84,805 से लगभग दोगुनी होकर 153,885 हो गई है. साथ ही, अनधिकृत स्वास्थ्य सुविधाओं की संख्या में भी बढ़ोतरी हुई है और यह 57,010 से बढ़कर 66,713 हो चुकी है. कोरोना की दूसरी लहर में भी बायोमेडिकल वेस्टेज पहले की तुलना में काफी बढ़ा है. 

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दूसरी ओर, देश में खतरनाक वेस्ट उत्पन्न करने वाली यूनिट्स की संख्या में 3.5 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है, वहीं खतरनाक वेस्ट उत्पादन में लगभग 7 फीसदी की कमी भी आई है. सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट (सीएसई) द्वारा विश्व पर्यावरण दिवस पर ये आंकड़े रिलीज किए गए हैं. ये आंकड़े कोरोना महामारी के दौरान खतरनाक कचरे और खासकर बायोमेडिकल कचरे को गलत तरीके से खत्म किए जाने से पैदा होने वाली चुनौतियों को उजागर करता है.

पर्यावरण और विकास के प्रमुख मुद्दों पर डेटा और आंकड़ों का यह एक वार्षिक संग्रह है. रिपोर्ट में यह भी पता चलता है कि कोरोना वायरस की देश में पिछले दिनों आई दूसरी लहर के दौरान इससे संबंधित बायोमेडिकल वेस्ट के उत्पादन में उल्लेखनीय बढ़ोतरी भी हुई है. रिपोर्ट में कहा गया है, ''भारत में अप्रैल 2021 में कोविड-19 से संबंधित बायोमेडिकल कचरे का उत्पादन प्रति दिन 139 टन हुआ है. मई में यह आंकड़ा और बढ़कर 203 टन प्रतिदिन हो गया है. इस हिसाब से इसमें 46 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है.''

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ई-बुक रिलीज करते हुए, सीएसई की महानिदेशक सुनीता नारायण ने कहा, "ये संख्याएं आपको एक ट्रेंड बताती हैं कि क्या चीजें बेहतर या बदतर हो रही हैं. यह तब और भी अधिक महत्वपूर्ण हो जाता है, जब आप किसी संकट, चुनौती और अवसर को समझने के लिए ट्रेंड का इस्तेमाल करते हैं.'' उन्होंने आगे कहा, "एक ऐसे समय में जब हमारे पास उपलब्ध डेटा की गुणवत्ता आमतौर पर खराब होती है.

इस तरह का संग्रह विशेष रूप से पत्रकारों के लिए बेहद मददगार हो सकता है. डेटा की गुणवत्ता में सुधार तभी हो सकता है जब हम इसे नीति के लिए इस्तेमाल करते हैं. महामारी की ही बात करें तो, जरा सोचिए कि हमने इस पिछले एक साल में कितना नुकसान उठाया है, क्योंकि हमारे पास टेस्टिंग, मौतों की संख्या, सीरोलॉजिकल सर्वेक्षण, या वेरिएंट की जीनोमिक सिक्वेंसिंग पर पर्याप्त या सटीक डेटा उपलब्ध नहीं है. हर मामले में डेटा नीति बनाने में काफी अहम होता है.''

 

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