scorecardresearch
 

लक्ष्य सेन को उम्र धोखाधड़ी विवाद में राहत, सुप्रीम कोर्ट ने कर्नाटक HC के आदेश पर लगाई रोक

सेन बंधुओं ने अपनी याचिका में तर्क दिया है कि कर्नाटक उच्च न्यायालय ने अपने आदेश में खिलाड़ी के रूप में उनके इतिहास को ध्यान में नहीं रखा. लक्ष्य और चिराग ने कहा है कि उनकी जन्म तिथि सरकारी दस्तावेजों, सीबीएसई रिकॉर्ड, चिकित्सा प्रमाणपत्रों और पासपोर्ट में लगातार दर्ज की गई है.

Advertisement
X
भारतीय शटलर लक्ष्य सेन. (PTI Photo)
भारतीय शटलर लक्ष्य सेन. (PTI Photo)

सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस सुधांशु धूलिया और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की पीठ ने बैडमिंटन खिलाड़ी लक्ष्य सेन के मामले में कर्नाटक हाई कोर्ट के उस आदेश पर रोक लगा दी है, जिसमें उनकी जन्मतिथि (उम्र) को लेकर धोखाधड़ी के आरोपों की जांच की अनुमति दी गई थी. शीर्ष अदालत ने कर्नाटक हाई कोर्ट को नोटिस भी जारी किया है. अर्जुन अवॉर्डी बैडमिंटन खिलाड़ी लक्ष्य सेन और उनके भाई चिराग सेन ने जन्मतिथि विवाद में कर्नाटक हाई कोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी.

Advertisement

लक्ष्य और चिराग परजूनियर टूर्नामेंट में भाग लेने के लिए फर्जी बर्थ सर्टिफिकेट जमा कराने का आरोप है. सुप्रीम कोर्ट में दायर विशेष अनुमति याचिका (SLP) में सेन बंधुओं ने दावा किया है कि ये आरोप झूठे और मनगढ़ंत हैं. दोनों ने कहा है कि उनके खिलाफ दुर्भावना से प्रेरित होकर ये शिकायत दर्ज कराई गई है. लक्ष्य और चिराग ने सुप्रीम कोर्ट में दायर अपनी अपील में कहा है कि उनके खिलाफ यह दुर्भावनापूर्ण शिकायत उस व्यक्ति की ओर से दर्ज कराई गई है, जिसके बेटी को प्रकाश पादुकोण बैडमिंटन अकादमी में एंट्री नहीं मिल सका था.

यह भी पढ़ें: VIDEO: 'मेरा फोन प्रकाश सर ने ले लिया...', लक्ष्य सेन की बात पर PM मोदी बोले- अगली बार भी उनको भेजूंगा

सुप्रीम कोर्ट में सेन बंधुओं का पक्ष उनके वकील रोहिणी मूसा, बद्री विशाल और आयुष नेगी ने रखा. उन्होंने अपनी याचिका में तर्क दिया है कि कर्नाटक उच्च न्यायालय ने अपने आदेश में खिलाड़ियों के इतिहास को ध्यान में नहीं रखा. लक्ष्य और चिराग ने कहा है कि उनकी जन्म तिथि सरकारी दस्तावेजों, सीबीएसई रिकॉर्ड, चिकित्सा प्रमाणपत्रों और पासपोर्ट में लगातार दर्ज की गई है. ये सभी दस्तावेज दोनों भाइयों की आयु की प्रामाणिकता की पुष्टि करते हैं. इस संबंध में उनकी दो बार दिल्ली एम्स में मेडिकल जांच भी की गई है. दोनों ही बार मेडिकल रिपोर्ट में लक्ष्य और चिराग की घोषित आयु को डॉक्टरों द्वारा आंकी गई आयु के अनुरूप पाया गया है.

Advertisement

केंद्रीय सतर्कता आयोग (CVC), भारतीय खेल प्राधिकरण (SAI), और भारतीय बैडमिंटन संघ (BAI) ने लक्ष्य सेन और उनके भाई चिराग सेन पर लगे फर्जी बर्थ सर्टिफिकेट जमा करने के आरोपों की स्वतंत्र जांच की है और इन सभी खेल संस्थानों ने दोनों को इस मामले में क्लीन चिट दी है. इसके बावजूद, याचिकाकर्ता ने दुर्भावनापूर्ण इरादे से इस मामले को निजी शिकायत के माध्यम से आगे बढ़ाया, जिसके परिणामस्वरूप विवादित FIR दर्ज की गई. जस्टिस सुधांशु धूलिया और जस्टिस केवी चंद्रन की पीठ के समक्ष मंगलवार को पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता आर्यमा सुंदरम ने तर्क दिया कि अंतरराष्ट्रीय स्तर के बैडमिंटन खिलाड़ियों के अधिकारों और प्रतिष्ठा की रक्षा के लिए कर्नाटक उच्च न्यायालय के फैसले और जांच पर रोक लगाना आवश्यक है.

यह भी पढ़ें: बैडमिंटन के भीष्म पितामह माने जाते हैं लक्ष्य सेन के दादा... ओलंपिक में पूरा नहीं हुआ पोते का सपना

लक्ष्य सेन की उम्र को लेकर क्या है विवाद?

ओलंपियन लक्ष्य सेन, उनके भाई चिराग सेन, पिता धीरेंद्र सेन, मां निर्मलासेन और कोच यू विमल कुमार के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था, जिसमें आरोप लगाया गया था कि उन्होंने दोनों भाइयों- लक्ष्य और चिराग के जन्म दस्तावेजों में हेराफेरी की है. दायर मामले में आरोप लगाया जा रहा है कि उनकी उम्र ढाई साल कम कर दी गई ताकि वे जूनियर टूर्नामेंट में हिस्सा ले सकें.

Advertisement

लक्ष्य के खिलाफ मामला किसने दर्ज कराया?

लक्ष्य सेन, उनके भाई, माता पिता और कोच के खिलाफ यह मामला नागराजा एमजी द्वारा दायर किया गया था, जिसके कारण दिसंबर 2022 में इन सभी के खिलाफ आईपीसी की धाराओं 420 (धोखाधड़ी), 468 (धोखाधड़ी के उद्देश्य से जालसाजी), और 471 (जाली रिकॉर्ड को वास्तविक के रूप में उपयोग करना) के तहत एफआईआर दर्ज की गई. नागराजा एमजी बेंगलुरु में एक बैडमिंटन एकेडमी चलाते हैं. बैडमिंटन वर्ल्ड फेडरेशन (BWF) के आधिकारिक रिकॉर्ड के अनुसार, लक्ष्य सेन का जन्म 2001 में हुआ था. लेकिन नागराजा ने दावा किया कि भारतीय बैडमिंटन स्टार का जन्म 1998 में हुआ था. 

कर्नाटक हाई कोर्ट ने अपने फैसले में क्या कहा?

कर्नाटक उच्च न्यायालय के न्यायधीश एमजी उमा ने 19 फरवरी को लक्ष्य सेन की ओर से दायर रिट याचिका को यह कहते हुए खारिज कर दिया था, 'रिकॉर्ड पर रखी गई सामग्री (अदालत के समक्ष सबूत के तौर पर पेश किए गए दस्तावेज) को देखने के बाद प्रथम दृष्टया आरोप सही साबित होते हैं. इसलिए अदालत को इस मामले में जांच को रोकने या आपराधिक कार्यवाही की शुरुआत को रद्द करने का कोई कारण नहीं मिलता है. शिकायतकर्ता द्वारा न्यायालय के समक्ष पर्याप्त सामग्रियां रखी गई हैं जो सूचना के अधिकार अधिनियम के तहत प्राप्त किए गए दस्तावेज हैं. ऐसी परिस्थितियों में, मुझे याचिका (लक्ष्य सेन की याचिका) पर विचार करने का कोई कारण नहीं दिखता.' 

Advertisement

यह भी पढ़ें: Lakshya Sen: बैडमिंटन स्टार लक्ष्य सेन के खिलाफ FIR दर्ज, उम्र में धोखाधड़ी का लग रहा आरोप

कर्नाटक HC में नागराज ने क्या साक्ष्य प्रस्तुत किये?

नागराजा ने सूचना का अधिकार (आरटीआई) अधिनियम के माध्यम से प्राप्त दस्तावेज प्रस्तुत किए, जिसमें युवा मामलों के मंत्रालय की एक जांच रिपोर्ट भी शामिल थी. इसमें आरोप लगाया गया था कि लक्ष्य सेन के पिता फर्जी रिकॉर्ड बनाने के दोषी थे.

अदालत में लक्ष्य सेन के वकीलों ने क्या तर्क दिए थे?

लक्ष्य सेन के पक्ष के वकीलों ने दावा किया कि आरोप निराधार हैं और शिकायतकर्ता नागराजा का इरादा बैडमिंटन स्टार और उनके परिजनों को अपमानित करना है. उन्होंने कहा कि केंद्रीय सतर्कता आयोग द्वारा 2018 में धीरेंद्र सेन द्वारा प्रस्तुत जन्म रिकॉर्ड को स्वीकार करने के बाद इस मुद्दे को पहले ही बंद कर दिया गया था. लक्ष्य सेन के वकीलों ने यह भी दावा किया कि नागराजा ने अपनी बेटी के 2020 में प्रकाश पादुकोण बैडमिंटन अकादमी के लिए क्वालीफाई नहीं करने पर निराशा के कारण ओलंपियन शटलर और उनके परिजनों ​के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई थी. 

Live TV

Advertisement
Advertisement