हाल ही में रिलीज हुई फिल्म 'द कश्मीर फाइल्स' (The Kashmir Files) से चर्चा में आए फारूक अहमद डार उर्फ बिट्टा कराटे (Bitta Karate) एक पुराना इंटरव्यू वायरल हो रहा है. इस इंटरव्यू में बिट्टा ने 20 कश्मीरी पंडितों की हत्या करने की बात कबूली थी. आज तक को दिए इंटरव्यू में बिट्टा कराटे कहता है कि उसने 20 कश्मीरी पंडितों का मर्डर किया था. इसके अलावा इंडिया टुडे से बातचीत में बिट्टा ने कश्मीर के अलगाववादी नेताओं के पाकिस्तान कनेक्शन पर भी बयान दिया था.
साल 1991 में दिए इंटरव्यू में बिट्टा कहता है कि अगर उसे अपनी मां या भाई का कत्ल करने का आदेश भी मिलता तो वह उनकी भी हत्या करने से नहीं हिचकता. बिट्टा ये भी बताता है कि कैसे उसने 22 वर्षीय कश्मीरी पंडित सतीश कुमार टिक्कू की हत्या से घाटी में कत्लेआम का सिलिसला शुरू किया था. बता दें कि 1991 में हिरासत में रहने के दौरान बिट्टा ने ये इंटरव्यू दिया था.
पाकिस्तान से ट्रेनिंग, कश्मीर में दहशत
जम्मू-कश्मीर लिबरेशन फ्रंट (JKLF) के नेता बिट्टा कराटे यानी Farooq Ahmed Dar को वीडियो में यह कहते हुए सुना जा सकता है कि उसका पहला शिकार सतीश कुमार टिक्कू था. सतीश को क्यों मारा? इसके जवाब में बिट्टा का कहना था कि शायद वह RSS से था. बिट्टा ने दावा किया था कि उसने कश्मीरी पंडितों को या तो सिर या दिल में गोली मारी थी. वो ये भी कहता है कि उसका निशाना कभी नहीं चूकता था. हालांकि, बाद में वह अदालत में हत्या करने के अपने बयान से पलट गया था.
बिट्टा ने इंटरव्यू में माना था कि वह पाकिस्तान से ट्रेनिंग लेकर कश्मीर आया और आतंकी बना. उसने आरोप लगाया कि स्थानीय प्रशासन ने कश्मीरियों पर बहुत जुल्म किया, जिससे आक्रोशित होकर वो आतंकवाद की ओर मुड़ गया. उस वक्त उसकी उम्र महज 20-21 साल थी. उसने यह भी बताया कि आम लोगों को मारने के लिए वह पिस्टल का इस्तेमाल करता और सुरक्षा बलों पर हमले के लिए एक-47 यूज करता था.
कौन है बिट्टा कराटे?
बिट्टा कराटे अलगाववादी नेता है, कश्मीर में निर्दोष लोगों की हत्या और आतंकवाद से संबंधित आरोपों में जेल में डाला गया था. उसे सार्वजनिक सुरक्षा अधिनियम के तहत भी गिरफ्तार किया गया था. बिट्टा पर 19 से अधिक उग्रवाद से संबंधित मामले थे. 2008 में अमरनाथ विवाद के दौरान भी उसे गिरफ्तार किया गया था.
बिट्टा मार्शल आर्ट में ट्रेंड था, इसलिए उसके नाम के आखिर में लोग कराटे लगाने लगे. बिट्टा कराटे ने करीब 16 साल सलाखों के पीछे बिताए, आखिर में 23 अक्टूबर, 2006 को टाडा अदालत ने उसे जमानत पर रिहा कर दिया. बिट्टा के संगठन जेकेएलएफ ने 1994 में एकतरफा युद्धविराम की घोषणा की और एक अहिंसक आंदोलन शुरू करने का फैसला किया. हालांकि, इसके पहले उसने और उसके संगठन ने बंदूक के दम पर खूब हिंसा फैलाई, जिसके बारे में खुद बिट्टा ने कबूल किया है.
2017 में इस कश्मीरी अलगाववादी नेता के कारनामों को इंडिया टुडे की विशेष जांच रिपोर्ट 'ऑपरेशन विलेन ऑफ द वैली' में उजागर किया गया था. उसे और उसके लोगों को पाकिस्तान से पैसे मिलने की बात स्वीकार करते हुए कैमरे में कैद किया गया था. इंडिया टुडे के खुलासे के बाद राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने कश्मीर में कुछ अलगाववादी नेताओं पर जांच का शिकंजा कसा था.
और पढ़ें