भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के नेता अश्विनी उपाध्याय ने सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका दाखिल कर कालाधन, बेनामी संपत्ति और आय से अधिक कमाई को शत-प्रतिशत जब्त करने तथा भ्रष्टाचारियों को आजीवन कारावास देने की गुहार लगाई है. सुप्रीम कोर्ट में वकील अश्विनी उपाध्याय की ओर से दायर याचिका में कहा गया है कि वर्तमान समय में लागू भ्रष्टाचार विरोधी कानून बहुत ही लचर कमजोर और अप्रभावी है. इसकी वजह से कालाधन, बेनामी संपत्ति और आय से अधिक संपत्ति की समस्या खत्म नहीं हो रही है. इस लचर और कमजोर कानून के कारण भारत करप्शन परसेप्शन इंडेक्स में टॉप 50 देशों में कभी स्थान नहीं बना पाया. ट्रांसपैरेंसी इंटरनेशनल ने इस वर्ष भारत को 80वें स्थान पर रखा है.
अश्विनी उपाध्याय ने अपनी याचिका में कहा है कि यदि उनकी जनहित याचिका में दाखिल पांच सुझावों को ईमानदारी से लागू किया जाए तो देश में हर साल सात लाख करोड़ रुपये से अधिक की बचत होगी. केंद्र, राज्य और स्थानीय निकायों का इस वर्ष का कुल बजट लगभग 70 लाख करोड़ रुपये है, लेकिन घूसखोरी, दलाली और कमीशनखोरी के कारण कुल बजट का दस प्रतिशत अर्थात लगभग सात लाख करोड़ रुपये कालाधन बन जाएगा.
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याचिका में क्या कहा गया
याचिका में कहा गया कि केंद्र सरकार यदि सौ रुपये से बड़े नोट तत्काल बंद करे, पांच हजार रुपये से ज्यादा नकदी लेनदेन पर रोक लगाए, पचास हजार रुपये से महंगी संपत्ति को आधार से लिंक करे, कालाधन, बेनामी संपत्ति और आय से अधिक संपत्ति को शत प्रतिशत जब्त करे तथा भ्रष्टाचारियों को सश्रम आजीवन कारावास की सजा देने के लिए कानून बनाये तो भ्रष्टाचार समाप्त हो जाएगा. इतना ही नहीं सात लाख करोड़ रुपये की बचत होगी.
भ्रष्टाचार विरोधी कानूनों में अधिकतम सजा मात्र सात साल है. इस कानून में यह भी स्पष्ट नहीं है कि भ्रष्टाचारियों की कितनी संपत्ति जब्त की जाएगी. इसलिए कालाधन, बेनामी संपत्ति और आय से अधिक संपत्ति को शत प्रतिशत जब्त करने तथा भ्रष्टाचारियों को सश्रम आजीवन कारावास की सजा देने के लिए तत्काल कानून बनाना आवश्यक है. बीजेपी नेता ने सुप्रीम कोर्ट से इस दिशा में सरकार को उचित निर्देश देने की मांग की है.