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Farmers Protest: भाजपा नेताओं के वो बयान जिससे नाराज हैं किसान

एक तरफ सर्द मौसम में जहां किसान खुली सड़कों पर आंदोलन कर रहे हैं वहीं कुछ नेताओं की तरफ से ऐसे बयान भी दिए जा रहे हैं जो विवाद का केंद्र बन गए हैं. खासकर बीजेपी नेताओं के बयान में किसान आंदोलन पर ही सवाल उठाए जा रहे हैं.

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किसान आंदोलन के दौरान एक युवा (फोटो-PTI)
किसान आंदोलन के दौरान एक युवा (फोटो-PTI)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • दिल्ली बॉर्डर पर करीब तीन हफ्तों से आंदोलन कर रहे हैं किसान
  • गिरते तापमान के बीच बुजुर्ग किसानों की हिम्मत भी नहीं टूटी
  • सत्तापक्ष लगातार उठा रहा है किसान आंदोलन पर सवाल

कृषि कानूनों के खिलाफ चल रहे किसान आंदोलन को लेकर तमाम किस्म की बयानबाजी हो रही हैं. आंदोलन की आत्मा तक पर सवाल उठाए जा रहे हैं. खासकर, सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी के नेताओं की तरफ से ऐसे बयान दिए जा रहे हैं जो किसानों की नाराजगी को हवा दे रहे हैं. ताजा बयान मध्य प्रदेश के कृषि मंत्री कमल पटेल का है जिन्होंने प्रदर्शन कर रहे किसान संगठनों को 'कुकुरमुत्ता' कहकर संबोधित किया है.

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मध्य प्रदेश की बीजेपी सरकार में कृषि मंत्री कमल पटेल ने यह बयान सोमवार (14 दिसंबर) को उज्जैन में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान दिया. कमल पटेल ने कहा, ''ये किसान संगठन 'कुकुरमु्त्तों' की तरह उग आए हैं. ये किसान नहीं हैं, बल्कि व्हीलर डीलर और एंटी नेशनल हैं.'' कमल पटेल के इस बयान पर किसानों में नाराजगी है. लेकिन ये पहला मामला नहीं है जब सत्ताधारी पक्ष की तरफ से ऐसा बयान आया हो, इससे पहले भी कुछ ऐसे बयान दिए गए हैं जो किसानों के आंदोलन पर ही सवाल उठाने वाले थे.  

एमपी की एक और मंत्री ऊषा ठाकुर ने भी कृषि कानूनों पर केंद्र सरकार का समर्थन करते हुए किसानों को निशाने पर लिया. मंत्री ऊषा ठाकुर ने कहा कि पंजाब और हरियाणा में उच्च कोटि के दलाल प्लानिंग के साथ किसान आंदोलन चला रहे हैं और इसमें टुकड़े-टुकड़े गैंग भी शामिल हो गई है. 

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केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने उठाए सवाल
केंद्र में मोदी सरकार के मंत्री भी आंदोलन को लेकर ऐसा बयान दे चुके हैं जो चर्चा और विवाद का केंद्र बने. किसान संगठनों के साथ मीटिंग करने वाले केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने कहा है कि ये आंदोलन अब किसानों का नहीं रह गया है, क्योंकि इसमें वामपंथी और माओवादी तत्व शामिल हो गए हैं. गोयल ने कहा था कि आंदोलन के जरिए ऐसे लोगों की जेल से रिहाई की मांग की जा रही हैं जो राष्ट्र विरोधी गतिविधियों के लिए सजा काट रहे हैं. 

आंदोलन में बुजुर्ग किसान

गौरतलब है कि दिल्ली के टिकरी बॉर्डर पर चले रहे किसान आंदोलन में ऐसे पोस्टर लगे नजर आए थे जिन पर लिखा था ''झूठे केसों में गिरफ्तार किए गए बुद्धिजीवियों और विद्यार्थी कार्यकर्ता को रिहा करो.'' ये पोस्टर सामने आने के बाद लगातार बीजेपी और सरकार के कुछ लोगों की तरफ से कहा जा रहा है कि किसान आंदोलन को लेफ्टिस्टों ने हाईजैक कर लिया है. 

दानवे ने बताया चीन-पाकिस्तान का हाथ

पीयूष गोयल के अलावा केंद्रीय मंत्री रावसाहेब दानवे भी किसान आंदोलन को लेकर विवादित बयान दे चुके हैं. दानवे महाराष्ट्र के जालना में आरोग्य केंद्र के उद्घाटन के लिए गए थे, यहां उन्होंने मंच से भाषण देते हुए कहा था कि देश में जो किसान आंदोलन चल रहा है उसके पीछे चीन और पाकिस्तान का हाथ है. इतना ही नहीं, आंदोलन के साथ आतंकवाद और खालिस्तान का दाग भी लगाया जा रहा है. इस बात को लेकर हर तरफ नाराजगी भी देखी जा रही है कि किसान आतंकवादी या खालिस्तानी कैसे हो सकता है. 

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हरियाणा के कृषि मंत्री जेपी दलाल भी रानासाहेब दानवे जैसा ही बयान दे चुके हैं. जेपी दलाल ने कहा है कि किसान का नाम आगे करके बहुत सारे लोग हैं, विदेशी ताकतें हैं, चीन है, पाकिस्तान है, भारत के दुश्मन देश हैं, वो सरकार को अस्थिर करना चाहते हैं.

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यूपी के कानपुर से लोकसभा सांसद और बीजेपी नेता सत्यदेव पचौरी भी कृषि कानूनों के विरोध में दिल्ली बॉर्डर पर चले आंदोलन पर सवाल उठा चुके हैं. जागरण की खबर के अनुसार, पचौरी ने एक बयान में कहा है कि किसान आंदोलन के जरिए खालिस्तान समर्थक फिर से अपने पैर जमा रहे हैं और इन लोगों के मंसूबे विध्वंसकारी हैं. पचौरी ने यहां तक कहा कि जिनके जरिए इंदिरा गांधी को मारा गया था, कांग्रेस उनके ही साथ है. पचौरी ने ये भी कहा कि कुछ राष्ट्रविरोधी ताकतें इस आंदोलन से जुड़ रही हैं.

एक और केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने भी किसान आंदोलन को लेकर टिप्पणी की है. गिरिराज ने कहा है कि आंदोलन में किसानों के हित की बात नहीं हो रही है, इस आंदोलन में विदेशी ताकत घुस रही है और खालिस्तान व शरजील इमाम के पोस्टर लगाए जा रहे हैं. 

'99 फीसदी से ज्यादा किसान मोदी सरकार के साथ'
एक तरफ जहां किसानों के 30 से ज्यादा संगठन दिल्ली के सिंघु, टिकरी और गाजीपुर बॉर्डर समेत अन्य कुछ इलाकों में भारी संख्या में डटे हुए हैं वहीं दूसरी तरफ सत्ताधारी दल की तरफ से ये भी कहा जा रहा है कि देश का किसान बीजेपी के साथ है. जयपुर में बीजेपी के महासचिव अरुण सिंह ने एक बयान में ये दावा किया कि देश का 99 फीसदी से ज्यादा किसान मोदी सरकार के साथ हैं. उन्होंने ये भी आरोप लगाया था कि जो किसान आंदोलन चल रहा है उसमें कांग्रेस तेल डाल रही है. 

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फोटो-पीटीआई

अरुण सिंह के इसी बयान पर मुहर लगाते हुए केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने हाल में हुए राजस्थान पंचायत चुनाव के नतीजों का हवाला दिया था. जावड़ेकर ने कहा था कि पंचायत चुनाव में बीजेपी को बड़ी जीत इस बात का सबूत है कि यहां के वोटर जो मुख्य रूप से किसान हैं उन्होंने बीजेपी पर विश्वास जताया है. जावड़ेकर ने पंचायत चुनाव की जीत को नए कृषि कानूनों पर किसानों की मुहर बताया है. 

कुल मिलाकर सरकार और सत्ताधारी दल की तरफ से कई ऐसे बयान सामने आ चुके हैं जो किसान आंदोलन की विश्वसनीयता और नीयत पर ही सवाल खड़े रहे हैं. किसान नेता भी कह रहे हैं कि सरकार आंदोलन में फूट डालना चाहती है. रिहाई की मांग वाले पोस्टर पर किसान नेताओं की तरफ से सफाई भी दी गई. सिंघु बॉर्डर पर बैठे किसान नेता कमलप्रीत पन्नू ने कहा था कि हमारी 32 जत्थेबंदी की मीटिंग का वो हिस्सा नहीं है जिन्होंने शरजील इमाम और दिल्ली दंगों के आरोपियों के पोस्टर स्टेज पर लगाए हैं, हमारा उनसे कोई लेना देना नहीं है. किसान नेताओं का यह भी कहना है कि सरकार ने आंदोलन को भड़काने और फूट डालने की पूरी कोशिश की है लेकिन हमारा आंदोलन शांतिपूर्ण रहेगा और हम आंदोलन को जीत तक जारी रखेंगे. 

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