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लव जेहाद के खिलाफ कानून लाने की तैयारी, बीजेपी शासित राज्यों की बढ़ती जा रही दिलचस्पी!

जेहाद के खिलाफ कानून को लेकर अब तक बीजेपी शासित राज्यों की सरकारें ही मुखर हैं जबकि कांग्रेस या अन्य गैर बीजेपी राज्य मसलन पंजाब, राजस्थान, पश्चिम बंगाल और केरल या फिर छत्तीसगढ़ की सरकारें चर्चा तक नहीं कर रहीं.

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यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी लव जेहाद के खिलाफ कानून लाने जा रहे (फाइल-ट्विटर)
यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी लव जेहाद के खिलाफ कानून लाने जा रहे (फाइल-ट्विटर)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • धर्म परिवर्तन की बढ़ती घटनाओं पर अंकुश लाने की कवायद
  • कांग्रेस शासित राज्यों के अलावा बंगाल, केरल नहीं कर रहे जिक्र
  • MP-ओड़िशा में पहले से ही धर्म परिवर्तन के खिलाफ कानून

बल्लभगढ़ में कथित लव जेहाद की आड़ में हुई युवती की हत्या के बाद अब कई राज्य इसे लेकर कानून बनाने जा रहे हैं. विश्व हिन्दू परिषद (वीएचपी) सहित कुछ संगठन भी इसमें अपने सुझाव देने को आगे बढ़े हैं. उत्तर प्रदेश, हरियाणा,  मध्य प्रदेश और कर्नाटक ने तो ऐलान भी कर दिया है कि इस संवेदनशील मसले पर विधानसभा में सरकार सख्त प्रावधानों वाले विधेयक लाएगी.

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राज्य सरकारों की ओर से लाए गए प्रावधानों में लोभ, लालच, दबाव, धमकी या शादी का झांसा देकर धर्म परिवर्तन करने की आए दिन होने वाली घटनाओं पर समय रहते निगरानी रखी जा सके.

साथ ही यह भी ध्यान देने वाली बात है कि इस मसले पर अब तक बीजेपी शासित राज्यों की सरकारें ही मुखर हैं, जबकि कांग्रेस या अन्य गैर बीजेपी राज्य मसलन पंजाब, राजस्थान, पश्चिम बंगाल और केरल या फिर छत्तीसगढ़ की सरकारें चर्चा तक नहीं कर रहीं.

सबसे पहले इस मसले पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री मुखर हुए. सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा कि जैसा कि इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अपने एक फैसले में साफ कहा है कि महज शादी करने के लिए किया गया धर्म परिवर्तन अवैध होगा. प्रदेश सरकार इस बाबत सख्त प्रावधानों वाला कानून लाएगी और फिर ऐसी हरकत करने वालों का राम नाम सत्य ही होगा.

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मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भी कानून व्यवस्था के हालात की समीक्षा के लिए उच्च स्तरीय अधिकारियों के साथ बैठक में साफ कहा कि बेटियों के साथ ऐसी धोखाधड़ी करने वालों के खिलाफ सरकार सख्त कानून बनाएगी. विवाह का झांसा देकर धर्म परिवर्तन नैतिक रूप से तो अवैध है ही इसे कानूनी तौर पर भी गैर कानूनी बनाया जाएगा.

बल्लभगढ़ की घटना के फौरन बाद हरियाणा के गृह मंत्री अनिल विज ने भी घोषणा की कि ऐसी घटनाओं ने समाज और सरकार दोनों को सतर्क कर दिया है. अब जरूरत है ऐसे सख्त कानून की जिससे ऐसी घटनाओं के दोषी किसी भी सूरत में बच ना पाएं और निर्दोष मारे ना जाएं.

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दूसरी ओर, विश्व हिन्दू परिषद (वीएचपी) ने भी सरकारों से आग्रह किया है कि शीघ्र सख्त कानून बनाया जाए. इस सिलसिले में वीएचपी सरकारों को अपनी विशेषज्ञ टीम की ओर से सुझाव भी देने जा रही है. वीएचपी के कार्यकारी अध्यक्ष एडवोकेट आलोक कुमार ने आजतक को बताया कि परिषद की ओर से सरकारों को कई तरह के सुझाव दिए जाएंगे.

वीएचपी की ओर से दिए जाने वाले कुछ सुझाव
- धर्म परिवर्तन करने वाले को पहले राज्य सरकार और प्रशासन को एक निश्चित अवधि पहले नोटिस देना होगा. ताकि सरकारी आंकड़ों में एक-एक चीज दर्ज रहे.

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- अपने-अपने घर वालों को भी सूचना देना लाजिमी है ताकि वो अपनी ओर से एहतियात बरत सकें. ये एहतियात कानूनी यानी विरासत या वसीयत संबंधित, नैतिक या फिर पारिवारिक भी हो सकते हैं.


-सिर्फ विवाह या बहु पत्नी विवाह की सुविधा के मकसद से भी धर्म परिवर्तन करना अवैध घोषित हो. इसकी सजा भी सिर्फ नाम मात्र की नहीं बल्कि सख्त हो. यानी अपनी आस्था का मार्ग तय करने की संवैधानिक स्वच्छंदता तो हो, लेकिन एक कानूनी प्रक्रिया के तहत. सिर्फ जबानी जमा खर्च से ना हो बल्कि पूरे कानूनी हिसाब से हो.

इतिहास में देखें तो ओड़िशा देश का पहला राज्य है जिसने 1967 में ही शादी विवाह या बहु विवाह के लिए धर्म परिवर्तन के खिलाफ कानून बनाया था. फिर 1968 में मध्य प्रदेश ने भी ऐसा ही कानून बनाया था, लेकिन इनके प्रावधान काफी लचीले थे. तब राज्य विधि आयोग ने भी इनके सख्त किए जाने की सिफारिश की थी क्योंकि इन कानूनों के रहते भी तब के ओडिशा, मध्य प्रदेश और बिहार में बड़ी तादाद में धर्म परिवर्तन हुए.

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