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'आतंकी साजिश में शामिल होने का कोई सबूत नहीं', गौतम नवलखा को जमानत देते हुए बोला बॉम्बे HC

नवलखा को दी गई जमानत की शर्तें उनके सह आरोपियों प्रोफेसर आनंद तेलतुम्बड़े और महेश राउत की तरह की हैं. इन्हें भी दिसंबर 2017 में पुणे में एल्गार परिषद कॉन्क्लेव के संबंध में गिरफ्तार किया गया था. पुलिस का कहना है कि इससे अगले दिन ही भीमा कोरेगांव युद्ध स्मारक के पास हिंसा भड़क गई थी. 

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Human rights activist Gautam Navlakha is an accused in the Elghar Parishad-Maoist links case. (File Photo)
Human rights activist Gautam Navlakha is an accused in the Elghar Parishad-Maoist links case. (File Photo)

2018 एल्गार परिषद मामले में सामाजिक कार्यकर्ता गौतम नवलखा को मंगलवार को बॉम्बे हाईकोर्ट ने जमानत दे दी थी. नवलखा को जमानत देते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि प्रथम दृष्टया ऐसे कोई साक्ष्य नहीं मिले हैं कि उन्होंने किसी तरही की आतंकी गतिविधि की साजिश रची थी या उसमें शामिल थे.

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जस्टिस एएस गडकरी और जस्टिस एसजी दिगे की पीठ ने अपने फैसले में कहा कि जितनी भी सामग्री उपलब्ध कराई गई, उससे पता चलता है कि नवलखा ने किसी तरह की आतंकी गतिविधि में शामिल नहीं थे.

पीठ ने नवलखा की ओर से दायर जमानत याचिका पर यह फैसला दिया. हालांकि, कोर्ट अपने फैसले पर तीन हफ्ते की रोक लगा दी ताकि एनआईए सुप्रीम कोर्ट का रुख कर सके.

पीठ ने कहा कि एनआईए की ओर से पेश किए गए सबूतों के आधार पर प्रथम दृष्टया पता चलता है कि यह मानने के उचित आधार हैं कि नवलखा के खिलाफ लगाए गए आरोप सही हैं. गवाहों के बयान से पता चलता है कि नवलखा सीपीआई (माओवादी) का सदस्य था और इस पर यूएपीए की धारा 13 और 38 के प्रावधानों के तहत ही केस दर्ज होगा. इन दोनों धाराओं में अधिकतम सजा दस साल से अधिक नहीं हो सकती. 

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किन शर्तों पर दी गई नवलखा को जमानत? 

नवलखा को दी गई जमानत की शर्तें उनके सह आरोपियों प्रोफेसर आनंद तेलतुम्बड़े और महेश राउत की तरह की हैं. इन्हें भी दिसंबर 2017 में पुणे में एल्गार परिषद कॉन्क्लेव के संबंध में गिरफ्तार किया गया था. पुलिस का कहना है कि इससे अगले दिन ही भीमा कोरेगांव युद्ध स्मारक के पास हिंसा भड़क गई थी. 

बता दें कि इस साल अप्रैल में विशेष कोर्ट ने नवलखा को जमानत देने से इनकार करते हुए कहा था कि प्रथम दृष्टया सबूतों से पता चलता है कि नवलखा प्रतिबंधित सीपीआई संगठन का सक्रिय सदस्य है. एनआईए का आरोप है कि एल्गार परिषद का कार्यक्रम भारत सरकार के खिलाफ बहुत बड़ी साजिश थी.

नवलखा ने विशेष कोर्ट के आदेश के खिलाफ हाईकोर्ट का रुख किया था. उन्हें अगस्त 2018 में गिरफ्तार किया गया था और वह तभी से तलोजा सेंट्रल जेल में बंद थे. नवंबर 2022 में सुप्रीम कोर्ट ने नवलखा को उनकी खराब सेहत का हवाला देकर हाउस अरेस्ट की मंजूरी दे दी थी. 

नवलखा की पहले की याचिका का विरोध करते हुए एनआईए ने दावा किया था कि नवलखा का पाकिस्तान के आईएसआई के जनरल से भी संपर्क था. मालूम हो कि एल्गार परिषद मामले में गिरफ्तार 16 सामाजिक कार्यकर्ताओं में से जिन लोगों की जमानत दी गई है, उनमें नवलखा सातवें आरोपी हैं. 

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प्रोफेसर आनंद तेलतुम्बड़े, कवि वरवरा राव, वकील सुधा भारद्वाज, वर्नोन गॉन्जेल्विस, अरुण फरेरा और महेश राउत जमानत पर बाहर हैं. वरवरा राव को खराब स्वास्थ्य की वजह से जमानत दी गई है. 

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