scorecardresearch
 

जोखिम उठाते हैं मुखबिर, मिले उचित मेहनताना, बॉम्बे हाईकोर्ट का आदेश

एक मुखबिर ने साल 1991 में कस्टम विभाग को हीरे की तस्करी के बारे में सूचना दी थी, जिस पर कस्टम विभाग ने छापेमारी कर करीब 90 लाख रुपए के हीरे बरामद किए थे. इसके बाद प्रशासन से मुखबिर को तीन लाख रुपये की शुरुआती इनामी रकम मिली थी. लेकिन 2010 में उसकी मौत के बाद प्रशासन ने मुखबिर की विश्वसनीयता पर ही सवाल उठा दिए थे.

Advertisement
X
बॉम्बे हाईकोर्ट
बॉम्बे हाईकोर्ट

बॉम्बे हाईकोर्ट ने एक अहम फैसले में कहा है कि मुखबिरों (Infromers) को अहम जानकारियां प्रशासन तक पहुंचाने के लिए बहुत जोखिम उठाना पड़ता है. इसके लिए उन्हें इनाम दिया जाना चाहिए. हाईकोर्ट का यह आदेश एक मुखबिर की विधवा की याचिका पर आया है.

Advertisement

महिला के पति (मुखबिर ) ने साल 1991 में कस्टम विभाग को हीरे की तस्करी के बारे में सूचना दी थी, जिस पर कस्टम विभाग ने छापेमारी कर करीब 90 लाख रुपए के हीरे बरामद किए थे. 

उनकी पत्नी ने कहा कि 2010 में मौत से पहले उनके पति (मुखबिर) ने इनाम के लिए संबंधित विभाग के चक्कर काटे थे. उनके पति को प्रशासन से शुरुआत में तीन लाख रुपये की राशि मिली थी. दुर्भाग्य से 1992 में एक दुर्घटना में उनके पति की आंखों की रोशनी चली गई थी, जिस वजह से वह बकाया राशि के लिए प्रशासन से नियमित तौर पर संपर्क नहीं कर सके. उन्होंने कमिश्नर से अपील भी की थी कि वह 1992 में एक दुर्घटना में अपनी आंखों की रोशनी खो चुके हैं, ऐसे में जल्द से जल्द उनकी मदद की जाए. लेकिन 25 अगस्त 2010 को उनकी मौत हो गई.

Advertisement

इसके बाद उनकी पत्नी ने बॉम्बे हाईकोर्ट का रुख कर इंसाफ की मांग की. उनकी पत्नी ने अदालत को बताया कि मुखबिरों को दिया जा रहा इनाम पॉलिसी के अनुरूप नहीं है.

उनकी पत्नी की याचिका पर पहली बार जवाब देते हुए प्रशासन ने उनके पति (मुखबिर) को बकाया इनामी राशि नही दिए जाने के कारणों का उल्लेख किया था. उन्होंने कहा था कि 2014 में रिवार्ड कमीटी ने आशंका जताई थी कि क्या याचिकाकर्ता के पति ही असल मुखबिर थे.
इस पर उनकी पत्नी ने कहा था कि इससे पहले उनके पति को बिना किसी विवाद के ईनाम की पहली किश्त दी गई थी. तो अब इस तरह के सवाल क्यों उठाए गए. 

जस्टिस नितिन जामदार और जस्टिस अभय आहूजा की पीठ ने कहा कि जब प्रशासन ने यह स्वीकार कर लिया कि याचिकाकर्ता के पति (मुखबिर) को शुरुआती इनामी राशि दी गई थी तो इससे यह सिद्ध हो गया कि उनकी पत्नी ही बाकी धनराशि पाने की असली हकदार हैं. 

Advertisement
Advertisement