scorecardresearch
 

मांगलिक होना या न होना, तलाक का आधार नहीं हो सकता: बॉम्बे हाईकोर्ट

एक शख्स ने आरोप लगाया है कि शादी के वक्त उसकी पत्नी और ससुराल वालों ने कुंडली में फेरबदल कर उसे धोखा दिया. इस शख्स के मुताबिक पत्नी की जन्मतिथि को इस तरह बदल दिया गया था कि कुंडली में वो मांगलिक दिखे.

Advertisement
X
बॉम्बे हाईकोर्ट (फाइल फोटो)
बॉम्बे हाईकोर्ट (फाइल फोटो)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • पति ने पत्नी की कुंडली में फेरबदल का आरोप लगाया
  • कुंडली में फेरबदल को क्रूरता कहते हुए मांगा तलाक
  • बॉम्बे हाईकोर्ट ने रद्द कर दी तलाक याचिका

बॉम्बे हाईकोर्ट की नागपुर बेंच ने एक शख्स की ओर से दाखिल तलाक की अर्जी को नामंजूर कर दिया है. इस शख्स ने आरोप लगाया था कि शादी के वक्त उसकी पत्नी और ससुराल वालों ने कुंडली में फेरबदल कर उसे धोखा दिया. इस शख्स के मुताबिक पत्नी की जन्मतिथि को इस तरह बदल दिया गया था कि कुंडली में वो मांगलिक दिखे. पहले इस शख्स ने फैमिली कोर्ट में तलाक की अर्जी दी थी, वहां भी ये नामंजूर हो गई थी. इसके बाद उसने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया.  

Advertisement

जस्टिस एएस चंद्रूकर और जस्टिस एनबी सूर्यवंशी ने व्यवस्था दी कि पत्नी गैर-मांगलिक हो या उसकी जन्मतिथि अलग हो, इससे क्रूरता का कोई केस नहीं बनता. बेंच ने कहा, “अगर ये मान भी लिया जाए कि जन्मतिथि को गलत बताया गया तो इससे याचिकाकर्ता (पति) और प्रतिवादी (पत्नी) के वैवाहिक रिश्ते पर कोई असर नहीं पड़ता, जैसे कि हम व्यवस्था दे चुके हैं कि याचिकाकर्ता ये साबित करने में नाकाम रहा है कि वो मांगलिक है और मांगलिक लड़की से शादी करने का इरादा रखता था.”  

पति ने याचिका में दावा किया था कि उसे गलत सूचना दी गई थी कि उसकी पत्नी मांगलिक है और इसके लिए गलत जन्मतिथि बताई गई. ऐसे में पत्नी और उसके घरवालों ने उसके साथ धोखाधड़ी की जो कि एक तरह की क्रूरता है.  

इस पर पत्नी की ओर से कोर्ट में कहा गया कि शादी तय करते वक्त कुंडलियों का आदान-प्रदान नहीं हुआ था. पत्नी ने इस बात से भी इनकार किया कि पति के घरवालों को उसकी जन्मतिथि और शैक्षिक योग्यता के बारे में गलत जानकारी दी गई.  

Advertisement

पत्नी की ओर से ये दावा भी किया गया है कि उसके पति और सास ने उस पर शारीरिक हमला किया. इस वजह से उसे ससुराल वाला घर छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ा. फैमिली कोर्ट में पत्नी ने ये भी कहा था कि वो पति के साथ रहने के लिए तैयार है, इसलिए तलाक की अर्जी को खारिज किया जाए.  

कोर्ट ने पति के उस बयान को भी संज्ञान में लिया है जिसमें उसने कहा था कि “वो अपनी जिंदगी में कुंडली के आधार पर फैसले नहीं लेता.” एक बयान में उसने ये भी कहा था कि “शादी दोनों परिवारों की पृष्ठभूमि, घर और सारी जानकारी की पुष्टि होने के बाद ही हुई थी.” 

याचिकाकर्ता के पिता ने भी अपनी गवाही में कहा था कि उनके पास ऐसा कोई दस्तावेज नहीं है जिससे कि साबित किया जा सके कि वो मांगलिक है. कोर्ट ने ये टिप्पणी भी कि ''गैर-मांगलिक से शादी करने में पति के खिलाफ जैसा कुछ नहीं है, वो शादी से पहले प्राइवेट जॉब में था, और शादी के बाद उसे सरकारी नौकरी मिल गई.''

कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता की ओर से उसके साथ शादी के वक्त धोखाधड़ी होने का आरोप अस्वीकार्य है और खारिज किए जाने लायक है. कोर्ट ने याचिकाकर्ता की ओर से तलाक के लिए दिए इस आधार में भी कोई दम नहीं बताया कि पत्नी उसे छोड़ कर चली गई. कोर्ट ने कहा, ‘सामने लाए गए साक्ष्यों के मुताबिक प्रतिवादी (पत्नी) की ये दलील मंजूर करने लायक है कि उसके साथ हुए बुरे बर्ताव और जीवन को खतरे की वजह से उसे पति का घर छोड़ने का फैसला लेना पड़ा.’ 

Advertisement

 

Advertisement
Advertisement