चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) जनरल बिपिन रावत ने बुधवार को रक्षा क्षेत्र की कार्य संस्कृति में सुधार लाने और गुणवत्ता नियंत्रण बढ़ाने पर ध्यान देने की बात कही. इसके साथ ही उन्होंने भारत के रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों और आयुध कारखानों को फिर से चालू करने का आह्वान किया.
जनरल बिपिन रावत ने यह भी कहा कि भारत के कुछ विंटेज मिलिट्री प्लेटफॉर्म्स रेट्रोफिट्स के साथ, उन देशों को निर्यात किए जा सकते हैं, जिनमें खुद की रक्षा करने के लिए वांछित गोलीबारी की कमी है.
रक्षा निर्यात पर आयोजित एक सेमिनार को संबोधित करते हुए बिपिन रावत ने भारत के रक्षा व्यय के वितरण पर "कठोर नजर" रखने की बात कही. साथ ही यह भी कहा कि संसाधनों के समुचित उपयोग के लिए खर्च का एक यथार्थवादी विश्लेषण भी किया जाना चाहिए.
किसी देश पर निर्भरता खत्म करनी होगीः बिपिन रावत
प्रतिबंधों का सामना करने वाले देशों से उपकरणों की खरीद में होने वाली कठिनाइयों के बारे में जनरल रावत ने कहा कि भारत को अपनी सैन्य आवश्यकताओं के लिए निरंतर "प्रतिबंधों के खतरे" या किसी एक देश पर निर्भर होने की स्थिति से बाहर आ जाना चाहिए.
अक्टूबर 2018 में, भारत ने एस-400 एयर डिफेंस मिसाइल सिस्टम्स पांच इकाइयों को खरीदने के लिए रूस के साथ 5 अरब डॉलर के समझौते पर हस्ताक्षर किया था, इसके बावजूद ट्रंप प्रशासन की ओर से चेतावनी दी गई कि इसे आगे जारी रखा जाता है तो अमेरिकी प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं.
अमेरिका ने रूस पर सख्त CAATSA नियम के तहत प्रतिबंध लगा दिए थे. यह कानून रूस से रक्षा हार्डवेयर खरीदने वाले देशों के खिलाफ भी दंडात्मक कार्रवाई का प्रावधान करता है.
जनरल रावत ने कहा कि घरेलू उद्योग के लिए मंच का विस्तार तेजी से आगे बढ़ने के मार्ग प्रशस्त करने के लिए किया गया है, सरकार द्वारा सैन्य परिसंपत्तियों के स्वदेशी उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए कई सुधार किए जा रहे हैं.
उन्होंने कहा कि हमें आधुनिकीकरण, उनकी कार्य संस्कृति और गुणवत्ता नियंत्रण के संदर्भ में हमारे आयुध कारखानों और अन्य रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों को पुनर्जीवित करने की आवश्यकता है.