कर्नाटक सरकार ने मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट को सूचित किया कि तीन ग्रामीण जिलों में चालू शैक्षणिक वर्ष में कक्षा 5वीं, 8वीं और 9वीं के लिए बोर्ड परीक्षा आयोजित करने की अधिसूचना वापस ले ली गई है. दिलचस्प बात यह है कि केंद्र सरकार के दूसरे सबसे वरिष्ठ विधि अधिकारी सॉलिसिटर जनरल (एसजी) तुषार मेहता कांग्रेस शासित राज्य की ओर से पेश हुए.
एसजी तुषार मेहता ने जस्टिस बेला माधुर्य त्रिवेदी और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की पीठ को बताया कि अदालत के स्थगन आदेश के बावजूद परीक्षा आयोजित करने के लिए ऐसी अधिसूचना जारी करने में राज्य की ओर से गलती हुई है. मेहता ने कहा कि अधिसूचना की वापसी हो चुकी है. यह गलती से जारी हो गई थी. इसे कोर्ट चाहे तो रिकॉर्ड पर दर्ज कर सकता है.
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सुप्रीम कोर्ट ने पूछा कि राज्य सरकार उम्मीदवारों के माता-पिता और बच्चों को परेशान करने पर क्यों तुला हुई है? ऐसा प्रतीत होता है कि राज्य सरकार के अंदर कुछ अहंकार की समस्या है. इस पर एसजी तुषार मेहता ने दलील दी कि तीन जिलों में अंक देने में कुछ त्रुटियां हुई थीं, यही कारण था कि सार्वजनिक परीक्षा आयोजित करने की अधिसूचना जारी की गई. हालांकि, अदालत के स्थगन आदेश को ध्यान में रखते हुए इसे वापस ले लिया गया है.
एसजी मेहता ने कहा कि राज्य को बच्चों की चिंता है. उनके भविष्य को नुकसान पहुंचाने का हमारा कोई इरादा नहीं है. यह हमारी गलती थी और हमने इसे वापस ले लिया है. इसके बाद एसजी मेहता की दलीलों पर गौर करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने मामले की सुनवाई अगले सप्ताह तय की. शीर्ष अदालत ने अप्रैल में कर्नाटक उच्च न्यायालय के आदेश के क्रियान्वयन पर रोक लगा दी थी, जिसमें कर्नाटक राज्य शिक्षा बोर्ड (केएसईएबी) से संबद्ध स्कूलों की कक्षा 5वीं, 8वीं, 9वीं और 11वीं के लिए 'परीक्षाएं' आयोजित करने के राज्य के फैसले को बरकरार रखा गया था.
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कर्नाटक हाई कोर्ट ने 22 मार्च के अपने फैसले में राज्य की इस दलील को स्वीकार कर लिया था कि परीक्षाओं को पारंपरिक अर्थों में 'बोर्ड परीक्षा' के रूप में नहीं देखा जा सकता है और इसके संचालन को चुनौती देने वाली सभी याचिकाएं खारिज कर दी थीं. इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के निर्णय को चुनौती देने वाली गैर-सहायता प्राप्त निजी स्कूल प्रबंधन एसोसिएशन (अपीलकर्ता) की अपील पर सुनवाई करते हुए ऐसी परीक्षाओं के परिणामों की घोषणा पर रोक लगा दी थी.