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चीतों की मौत पर SC में सुनवाई बंद: केंद्र ने कहा, यह परियोजना सही रास्ते पर, हर साल चीते खरीदे जाएंगे

अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने न्यायमूर्ति बी आर गवई की अध्यक्षता वाली तीन-न्यायाधीशों की पीठ को बताया कि चीता की मौत अपेक्षित तर्ज पर थी. क्योंकि जब एक जगह से दूसरी जगह ले जाया जाता है तो कुछ मौतें होती हैं. उन्होंने कहा कि इस परियोजना के लिए बहुत सारी तैयारी है.

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चीतों की मौत पर SC में सुनवाई बंद
चीतों की मौत पर SC में सुनवाई बंद

केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि चीता प्रोजेक्ट सही रास्ते पर है और इस प्रोजेक्ट के तहत हर साल 12-14 चीते खरीदे जाएंगे. केंद्र ने बताया कि समस्याएं हैं, लेकिन ये चिंताजनक नहीं हैं. अदालत ने अपने आदेश में आवेदन का निपटारा करते हुए कहा कि उसे चीता परियोजना को सफल बनाने के प्रयासों के बारे में केंद्र के बयानों पर अविश्वास करने का कोई कारण नहीं मिला और कोर्ट ने कहा कि इस परियोजना को न्यायपालिका के बजाय क्षेत्र के विशेषज्ञों के विवेक पर छोड़ देना बेहतर है.

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अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने न्यायमूर्ति बी आर गवई की अध्यक्षता वाली तीन-न्यायाधीशों की पीठ को बताया कि चीता की मौत अपेक्षित तर्ज पर थी. क्योंकि जब एक जगह से दूसरी जगह ले जाया जाता है तो कुछ मौतें होती हैं. उन्होंने कहा कि इस परियोजना के लिए बहुत सारी तैयारी है, और यह दुनिया में अनोखी परियोजनाओं में से एक है. सॉलिसिटर जनरल ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि हर साल 12-14 नए चीते लाए जाएंगे. समस्याएं तो हैं लेकिन इसमें चिंताजनक कुछ भी नहीं है.

सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने पीठ को बताया कि ज्यादा गर्मी शावकों की मौत का एक कारण है. भाटी ने पीठ को बताया, 'हमने जीवित चीतों के स्वास्थ्य की निगरानी के लिए 11 सदस्यीय विशेषज्ञ समिति का गठन किया है.'

तीन शावकों की मौत पर सफाई देते हुए एएसजी भाटी ने कहा कि अफ्रीकी महाद्वीप में सर्दियों का मौसम होता है, जबकि भारत में गर्मी ज्यादा होती है. चीतों के बाड़े का तापमान ज्यादा होना भी उनके लिए मुश्किल होता है. नामीबिया और दक्षिण अफ्रीका के कम तापमान के मुकाबले यहां का तापमान ज्यादा रहता है. शावक मांद में थे और फिर अत्यधिक गर्मी शुरू हो गई और इससे संक्रमण और पानी की कमी हई.

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इस पर पीठ ने पूछा, 'क्या इसकी उम्मीद नहीं थी? जब आप उन्हें यहां लाए तो आपने क्या कदम उठाए? उनको यहां लाते समय आपका दृष्टिकोण क्या था?"

इस सवाल का जवाब देते हुए एएसजी ने कहा कि जीवित जानवरों का इलाज किया गया था और उन पर कड़ी निगरानी रखी जा रही थी. उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत लाए गए केवल छह चीतों की मौत हुई है, नौ की नहीं, जैसा कि मीडिया में बताया गया है.

 

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