लोग अभी कोरोना वायरस के प्रकोप को भूले भी नहीं थे कि एक और नए वायरस ने चिंताएं बढ़ा दी हैं. अभिनेता अक्षय कुमार से लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन तक कोरोना के कुछ केस अभी भी पूरी दुनिया में मिल रहे है. इस बीच गुजरात में एक और नया वायरस पैर पसार रहा है. इस नई बला का नाम है चांदीपुरा वायरस.
अब तक इसके 27 संदिग्ध मामले सामने आ चुके हैं और 15 लोगों की मौत हो चुकी है. राज्य के 12 जिलों में संदिग्ध मामले सामने आए हैं. 27 में से 24 केस गुजरात के हैं और अन्य 3 दूसरे राज्यों से गुजरात आए हैं. सबसे ज्यादा मामले साबरकांठा और अरावली में मिले हैं जहां 4-4 लोग चांदीपुरा से संक्रमित पाए गए. रहस्यमयी मौतों के सैंपल जब लैब भेजे गए तब नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी (NIV) ने एक चार साल की बच्ची में चांदीपुरा वायरस की पुष्टि की.
क्या है चांदीपुरा वायरस?
चांदीपुरा वायरस एक RNA वायरस है, जो सबसे ज्यादा मादा फ्लेबोटोमाइन मक्खी से फैलता है. इसके फैलने के पीछे मच्छर में पाए जाने वाले एडीज जिम्मेदार हैं. इस वायरस को साल 2004 से 2006 और 2019 में आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र और गुजरात में रिपोर्ट किया गया.
कहां से आया चांदीपुरा वायरस?
साल 1966 में पहली बार महाराष्ट्र में चांदीपुरा से जुड़ा केस मिला था. नागपुर के चांदीपुर में इस वायरस की पहचान हुई थी, इसलिए इसका नाम चांदीपुरा वायरस पड़ गया. पहले केस की जांच में पता चला कि यह वायरस रेत में घूम रही एक मक्खी के कारण फैला था. साल 2003-04 में इस वायरस का सबसे बुरा प्रकोप देखने को मिला था जब महाराष्ट्र, उत्तरी गुजरात और आंध्र प्रदेश में 300 से ज्यादा बच्चों की मौत हो गई थी.
चांदीपुरा वायरस के लक्षण क्या हैं?
चांदीपुरा वायरस होने से रोगी को बुखार, सिरदर्द, बदन दर्द और ऐंठन की शिकायत होती है. इसमें फ्लू जैसे ही लक्षण होते हैं और तेज एन्सेफलाइटिस होती है. एन्सेफलाइटिस एक ऐसी बीमारी है, जिससे दिमाग में सूजन की शिकायत होती है. कुछ मरीजों में सांस की समस्या और खून की कमी जैसे लक्षण भी देखे जा चुके हैं. वहीं डॉक्टर्स का कहना है कि यह वायरस मक्खियों से ज्यादा फैलता है. पहले 24 से 72 घंटे बेहद अहम है. क्योंकि उसी वक्त इसकी घातकता ज्यादा होती है अगर इतने समय मे अस्पताल पहुंच गए तो इलाज मुमकिन है.
चांदीपुरा वायरस से कैसे बचें?
रेत में पाई जाने वाली मक्खियों से बचाव ही चांदीपुरा वायरस से बचाव का पहला चरण है. इसके लिए कीटनाशक का इस्तेमाल किया जा सकता है. मक्खी और मच्छरों से बचने के लिए फुल कपड़े पहनें और मच्छरदानी का इस्तेमाल करें. साथ ही वायरस से प्रभावित क्षेत्रों के लोगों को चांदीपुरा वायरस के जोखिमों और बचाव के बारे में जागरूक करके भी इससे काफी हद तक बचा जा सकता है.
चांदीपुरा वायरस का इलाज क्या है?
चांदीपुरा वायरस का कोई खास एंटीवायरल इलाज या वैक्सीन नहीं है. लक्षणों का इलाज और जटिलताओं से बचकर ही चांदीपुरा को रोका जा सकता है. गंभीर लक्षणों वाले मरीजों, खासकर बच्चों को अक्सर अस्पताल में भर्ती कराया जाता है. शरीर को हाइड्रेट करना सबसे अहम है, खासकर उल्टी होने की स्थिति में. बुखार को कम करने के लिए दवाएं ले सकते हैं. गंभीर न्यूरोलॉजिकल लक्षणों, जैसे सांस और न्यूरोलॉजिकल जटिलताओं के केस में इंटेंसिव केयर की जरूरत पड़ सकती है.