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छत्तीसगढ़ शराब घोटाला: सुप्रीम कोर्ट ने ED की गिरफ्तारी पर उठाए सवाल, जांच एजेंसी से मांगा जवाब

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को छत्तीसगढ़ में कथित शराब घोटाले के संबंध में आरोपी पूर्व आईएएस अधिकारी अनिल टुटेजा के मामले में जांच के तरीके पर ईडी से सवाल किया. शीर्ष अदालत ने सवाल किया कि उन्हें समन क्यों जारी किया गया और जल्दबाजी में गिरफ्तार क्यों किया गया?

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सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को छत्तीसगढ़ में कथित शराब घोटाले के संबंध में आरोपी पूर्व आईएएस अधिकारी अनिल टुटेजा के मामले में जांच के तरीके पर ईडी से सवाल किया. शीर्ष अदालत ने सवाल किया कि उन्हें समन क्यों जारी किया गया और जल्दबाजी में गिरफ्तार क्यों किया गया? कोर्ट ने ईडी से स्पष्टीकरण मांगा है कि समन कैसे तामील किया गया और उन्हें ईडी कार्यालय कैसे ले जाया गया.

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छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट के आदेश के खिलाफ दायर की थी याचिका
कोर्ट पूर्व आईएएस अधिकारी अनिल टुटेजा की उस याचिका पर सुनवाई कर रहा था, जिसमें उन्होंने छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के उस आदेश के खिलाफ याचिका दायर की थी, जिसमें राज्य में कथित शराब घोटाले के संबंध में उनके खिलाफ भ्रष्टाचार और मनी लॉन्ड्रिंग के मामलों को रद्द करने से इनकार कर दिया गया था.

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पाया कि टुटेजा को ईडी ने तब बुलाया था, जब एसीबी उनसे अपने कार्यालय में पूछताछ कर रही थी और एजेंसी के समक्ष पेश होने को कहा था. कुछ घंटों बाद उन्हें एक और समन जारी किया गया.

कोर्ट ने कहा, 'कृपया हमें यह प्रक्रिया समझाएं. वह एसीबी कार्यालय में हैं, ईडी दोपहर 12:00 बजे और फिर शाम 5:30 बजे समन जारी करता है. इतनी जल्दी क्या है?'  कोर्ट ने एजेंसी से पूछा कि वह बताए कि आरोपी स्वेच्छा से ईडी के पास आया था और एसीबी अधिकारी उसके साथ ईडी कार्यालय क्यों गए?

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पूरी रात पूछताछ अक्षम्य है: कोर्ट
कोर्ट ने कहा, अगर ईडी को पता था कि एसीबी कार्यालय में उससे पूछताछ की जा रही है तो 12:30 का समय क्यों दिया गया? कोर्ट ने टिप्पणी की, 'जब आपको पता था कि एसीबी उससे पूछताछ कर रही है तो दो बार समन जारी करने की क्या जल्दी थी?' टुटेजा के वकील ने कोर्ट को बताया कि ईडी ने पूरी रात उससे पूछताछ की. कोर्ट ने कहा, यह किस तरह की प्रथा है? पूरी रात किसी व्यक्ति से पूछताछ की जाती है. यह अक्षम्य है. 

कोर्ट ने कहा कि अगर इस बारे में स्पष्टीकरण नहीं दिया गया तो उसे इस बारे में कुछ कहना होगा और इस तरह की प्रथाओं पर कड़ी कार्रवाई करनी होगी. उन्हें (ईडी) याद रखना चाहिए कि अनुच्छेद 21 नाम की कोई चीज होती है.

इसके बाद अदालत ने ईडी को एक अतिरिक्त हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया, जिसमें बताया गया कि पीएमएलए अधिनियम की धारा 50 के तहत किस तरह से समन जारी किया गया और किस तरह से याचिकाकर्ता को ईडी कार्यालय ले जाया गया और सुबह-सुबह उसे गिरफ्तार दिखाया गया. अदालत मामले की अगली सुनवाई 5 नवंबर को करेगी.

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