
पूर्वी लद्दाख में सर्दी ने धीरे धीरे असर दिखाना शुरू कर दिया है, लेकिन चीन की हरकतें बदस्तूर जारी हैं. चीन तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र में लगातार अपनी जमीनी सेना और वायु सेना की क्षमताओं को बढ़ा रहा है.
ल्हासा हेलीपोर्ट के विस्तार के बाद चीनी पीपुल्स लिबरेशन ऑर्मी (PLA) की आर्मी एविएशन तिब्बत हेलीकॉप्टर ब्रिगेड को और बढ़ा रही है.
भारत और चीन के बीच सीमा पर इस साल अप्रैल से गतिरोध जारी है. इसी घटनाक्रम के बीच ल्हासा के उत्तर में 220 किलोमीटर की दूरी पर स्थित नाकचू में हेलीपोर्ट निर्माण प्रोजेक्ट पर तेज गति से काम किया गया. हेलीपोर्ट भारत की पूर्वी सीमा से 350 किमी दूर स्थित है, लेकिन रणनीतिक तौर पर चीन के लिए बहुत अहम है.
सितंबर में इंडिया टुडे ने ल्हासा में एक हेलीकॉप्टर ट्रांसपोर्ट की स्थापना के बारे में सूचना दी थी, जिसका इस्तेमाल शार्ट नोटिस पर ही सैनिकों को युद्ध में उतारने के लिए किया जा सकता है. हेलीपोर्ट के उत्तरी और दक्षिणी छोर पर 25 मीटर X 60 मीटर के कम से कम 24 बड़े हैंगर्स पर काम पूरा हो चुका है.
पिछले पांच साल से नाकचू में एक एयरपोर्ट बनाए जाने के कयास लगाए जा रहे थे, लेकिन जमीन पर कोई प्रगति नहीं देखी गई थी. इंडिया टुडे ओपन सोर्स इंटेलीजेंस टीम (OSINT) की पहुंच में ऐसी ताजा सैटेलाइट तस्वीरें हैं जिनसे नाकचू शहर के दक्षिणी छोर पर बड़े हेलीपोर्ट के निर्माणाधीन होने के संकेत मिलते हैं.
पीएलए ने अप्रैल 2020 तक इस हेलीपोर्ट के निर्माण शुरू होने की योजना बनाई थी और निर्माण 1 अप्रैल से शुरू हो गया.
निर्माण स्थल से लगभग 500 मीटर दक्षिण-पूर्व में तिब्बतियों की एक छोटी सी बस्ती को नाकचू सीसीपी (चीन कम्युनिस्ट पार्टी) की ओर से खाली करा लिया गया था. जल्दी ही यहां से इसका नामोंनिशान भी पूरी तरह मिटा दिए जाने की संभावना है. ताजा हाई रिजोल्यूशन गूगल अर्थ तस्वीरों से पता चलता है कि इस तरह के भवन निर्माण में मॉड्यूलर तरीके को अपनाया गया. ताकि प्रोजेक्ट में लगने वाले समय और लागत को घटाया जा सके.
हेलीपोर्ट के लगभग 500 मीटर उत्तर-पूर्व में निर्माण कार्य को सपोर्ट देने के लिए एक बड़ा सीमेंट मिक्सर प्लांट बनाया गया है. क्षेत्र में बड़े पैमाने पर लेवलिंग का काम, रनवे का ग्रेडिंग वर्क और इमारतों का निर्माण जिस गति से हो रहा है, उससे लगता है कि पीएलए का लक्ष्य इस प्रोजेक्ट को सर्दी के पूरे रंग में आने से पहले ही पूरा करना है. सैटेलाइट तस्वीरों में लाल छत वाले स्टोरेज बैरेक्स और निर्माण कर्मचारियों की रिहाइश वाली जगहों को देखा जा सकता है.
विशिष्टताएं
ताजा तस्वीरों में तेज रफ्तार से चल रहा ग्रेडिंग वर्क 1,000 मीटर लंबे और 50 मीटर चौड़े रनवे का संकेत देता है. यहां हेलीकॉप्टर पार्किंग के लिए 30 मीटर x 25 मीटर के 18 हैंगर देखे जा सकते हैं. कम से कम तीन से छह हैंगर 35 मीटर x 25 मीटर आकार के निर्माणाधीन हैं जो संभवत: बड़े हेलीकॉप्टर्स के लिए लगते हैं. हैंगर्स के बीच स्थित मुख्य इमारत हेलीपोर्ट की कमान और नियंत्रण के लिए है.
हेलीपोर्ट के केंद्र में हवाई यातायात नियंत्रण (एटीसी) टॉवर के लिए एक राउंड बेस भी तैयार किया जा रहा है. लगभग 750 मीटर लंबाई का एक बड़ा एप्रन हैंगर के सामने निर्माणाधीन है.
कई नई इमारतें निर्माणाधीन हैं जो संभवतः प्रशासनिक सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए बनाई जा रही हैं. निर्माणाधीन दो इमारतें शायद सैनिकों को समायोजित करने के लिए हैं. इस जगह पर जल्द ही और कई इमारतें देखी जा सकती हैं. इस हेलीपोर्ट की ओर से जिस तरह की चुनौतियां पेश की जा सकती हैं, उसे देखते हुए भारत की वायुसेना को इस पर पैनी नजर रखने की जरूरत है.
(कर्नल विनायक भट (रिटायर्ड) इंडिया टुडे के लिए एक सलाहकार हैं. वे सैटेलाइट तस्वीरों के विश्लेषक हैं, उन्होंने 33 साल तक भारतीय सेना में सर्विस की.)