India Today Conclave 2023: भारत के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने शनिवार को इंडिया टुडे कॉन्क्लेव में कहा कि अदालत में जजों का काम उनके काम का एक अंश मात्र होता है. उन्होंने बताया कि जो काम हम सुबह 10:30 बजे से शाम 4 बजे के बीच करते हैं, वह हमारे काम का एक हिस्सा है. उन्होंने जस्टिस इन द बैलेंस: माई आईडिया ऑफ इंडिया एंड द इम्फॉर्टेंस ऑफ सेपेरेशन ऑफ पावर्स इन ए डेमोक्रेसी विषय पर अपने विचार रखते हुए कहा कि हर शनिवार को सुप्रीम कोर्ट का हर जज अपने आदेश को डिक्टेट करता है, रविवार को फिर उसी आदेश को पढ़ता है, जो उसे सोमवार को सुनाना है, इसलिए सुप्रीम कोर्ट के सभी जज सातों दिन काम करते हैं.
उन्होंने बताया कि अमेरिका की सुप्रीम कोर्ट एक महीने में 8-9 दिन और साल में केवल 80 दिन ही काम करती है, जबकि वहां कोर्ट तीन महीने नहीं चलती. इसी तरह ऑस्ट्रेलिया में हाई कोर्ट एक महीने में दो हफ्ते सुनवाई करती है. साल में 100 से कम दिन ही बेंच बैठती है. वहां कोर्ट की दो महीने की छुट्टी रहती है. सिंगापुर में कोर्ट साल में 145 दिन काम करती है लेकिन ब्रिटेन और भारत में कोर्ट 200 दिन काम करते हैं.
उन्होंने कहा कि लोगों को यह पता ही नहीं है कि भारत में छुट्टियों में जजों का ज्यादातर वक्त उन आदेशों को लिखने में चला जाता है, जो सुरक्षित रख लिए जाते हैं क्योंकि पूरे हफ्ते उनके पास समय ही नहीं होता, वे केसों की सुनवाई में ही उलझे रहते हैं.
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न्यायपालिका में टेक्नोलॉजी चेंज लाना मेरा लक्ष्य
सीजेआई ने कोर्ट में पेंडिंग केसों पर कहा कि यह सच है कि हमारे पास ऐसे केसों की संख्या ज्यादा है लेकिन हम इस पर काम कर रहे हैं और आप देख सकते हैं कि पेंडिंग केसों की संख्या में काफी कमी आई है.
वह बोले- न्यायपालिका में टेक्नोलॉजी चेंज लाना हमारा लक्ष्य है. जैसे कोविड काल में हमने किया. हम पूरा सिस्टम वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग पर ले आए, लेकिन अब हमें इसके आगे जाकर सोचना है. मैं चाहता हूं नागरिकों को यह पता होना चाहिए कोर्ट में क्या हो रहा है, इसलिए लाइव स्ट्रीमिंग शुरू की गई. हमने संविधान में स्वीकृत सभी भारतीय भाषाओं में AI के जरिए आदेशों का अनुवाद भी शुरू कर दिया है.
जजों पर किसी तरह का दबाव नहीं
जस्टिस चंद्रचूड़ ने कोर्ट पर बाहरी दबाव के सवाल पर कहा, ' जज के तौर पर मुझे काम करते हुए 23 साल हो गए हैं लेकिन आज तक किसी ने मुझे यह नहीं बताया कि किसी केस का फैसला कैसे किया जाए.' उन्होंने कहा कि सरकार की ओर से न्यायपालिका पर कोई दबाव नहीं है. मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति मामले में आया SC का फैसला इस बात का सबूत है कि न्यायपालिका पर कोई दबाव नहीं है. ऐसे बहुत से मामले हैं, जिसमें केंद्र सरकार और राज्य सरकारें शामिल होती हैं लेकिन कोर्ट अपने विवेक के आधार पर फैसला देती हैं.
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जजों की नियुक्ति प्रक्रिया होगी और पारदर्शी
सीजेआई ने कॉलेजियम सिस्टम के सपोर्ट में अपने विचार रखते हुए कहा कि यह एक जटिल और पारदर्शी प्रॉसेस है. जजों की नियुक्ति के लिए हम सबसे पहले दावेदारों की मेरिट देखते हैं. इसके बाद उनके लिए गए फैसलों को स्टडी करते हैं. उनकी वरिष्ठता का भी ध्यान दिया जाता है. कॉलेजियम यह भी देखता है कि जो दावेदार है, उसमें जेंडर, कम्युनिटी, अल्पसंख्यक के स्तर पर कितना खुलापन है.
उन्होंने बताया कि हाई कोर्ट से अगर कोई सिफारिश आती है तो उसकी फाइल सुप्रीम कोर्ट, केंद्र सरकार, राज्य सरकार के पास भेजी है. उन्होंने बताया कि हम जजों की नियुक्ति प्रक्रिया को और भी पारदर्शी करने जा रहे हैं. उन्होंने बताया कि हम दावेदारों से जुड़ी सूचनाओं को अपलोड करने जा रहे हैं.
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कुमार गंधर्व, बॉब डिलन को सुनता हूं
सीजेआई ने बताया कि उन्हें जितना इंडियन क्लासिकल पसंद है, उतना ही वे वेस्टर्न म्यूजिक सुनते हैं. उन्होंने बताया कि वह कुमार गंधर्व और बॉब डिलन के बहुत बड़े प्रशंसक हैं. उन्होंने बताया कि सोशल मीडिया आज की समय की जरूरत है लेकिन वे ट्विटर को फॉलो नहीं करता हूं. उन्होंने बताया कि वह काम से फुर्सत मिलने पर पढ़ना पसंद करते हैं.
हमारी सर्विस कंडीशन बहुत अच्छी
CJI डी वाई चंद्रचूड़ ने जजों की क्वालिटी को लेकर कहा कि वह इस बात से बहुत खुश हैं कि उनके पास बेहतरीन जज हैं. उन्होंने कहा- मेरे विचार से हमारी सर्विस कंडीशन बहुत अच्छी है लेकिन यह और बेहतर हो सकती है. सीजेआई बोले- मेरी नजर में कोई भी मामला कभी बहुत बड़ा या बहुत छोटा नहीं होता. नागरिकों का सबसे छोटा दुःख भी मेरे लिए एक बहुत बड़े मुद्दे की तरह ही होता है.