वस्तु एवं सेवा कर (GST) के बकाये को लेकर केंद्र सरकार पर खासा दबाव है. गैर बीजेपी शासित राज्यों की ओर से जीएसटी बकाये के लिए केंद्र से लगातार मांग की जा रही है. अब पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को जीएसीटी बकाए के लिए चिट्ठी लिखी है.
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने पीएम मोदी को लिखी चिट्ठी में कहा है कि राज्यों ने अपनी टैक्सिंग पावर का 70 फीसदी छोड़ दिया. और इस पर आम सहमति बनी कि आर्थिक नुकसान की भरपाई के लिए जीएसटी कलेक्शन से अगले 5 साल तक मुआवजा दिया जाएगा. चिट्ठी में उन्होंने लिखा कि मैं प्रधानमंत्री से अनुरोध करती हूं कि जीएसटी काउंसिल में केंद्र और राज्यों के बीच खत्म हो रहे विश्वास को लेकर हस्तक्षेप करें.
केंद्र सरकार पर राज्यों के प्रति विश्वास और नैतिक जिम्मेदारी को लेकर विश्वासघात करने का आरोप लगाते हुए ममता ने कहा कि केंद्र 'संघवाद के आधार का उल्लंघन कर रहा है.'
'मोदी ने सीएम रहते किया था विरोध'
अपनी चिट्ठी में, ममता ने यह भी कहा कि आश्वासनों के बावजूद, राज्यों को दो 'एकतरफा विकल्पों के साथ जोर दिया जा रहा था, जबकि दोनों में राज्यों को कमी और करोड़ों रुपये उधार लेने की आवश्यकता होती है, उनमें से कई अपने कर्मचारियों को वेतन देने में असमर्थ हैं.'
उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा, 'राज्यों की मदद करने के बजाए, क्या केंद्र के लिए राज्यों को सहायता रोकना और उन पर अधिक वित्तीय बोझ डालना उचित है.' उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि अगर भारत सरकार राज्यों को जीएसटी बकाये की कमी की भरपाई के लिए पैसे उधार लेती है तो बेहतर होगा.
ममता बनर्जी ने पीएम नरेंद्र मोदी को याद दिलाते हुए लिखा कि जब वह गुजरात के मुख्यमंत्री थे, तब उन्होंने विभिन्न आधारों पर जीएसटी लागू करने का विरोध किया था. उन्होंने कहा कि स्वर्गीय अरुण जेटली ने भी दिसंबर 2013 में स्पष्ट और सार्वजनिक रूप से कहा कि एकमात्र कारण है कि बीजेपी क्यों जीएसटी कार्यान्वयन का विरोध कर रही है क्योंकि बीजेपी ने तब जीएसटी के मुआवजे को लेकर भारत सरकार पर भरोसा नहीं किया था, राज्यों को नुकसान हो रहा था!
7 राज्यों ने ठुकराया प्रस्ताव
देश के 7 राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश ने जीएसटी के मुआवजे पर केंद्र सरकार की ओर से दिए गए प्रस्ताव को ठुकरा दिया है. राज्यों को केंद्र सरकार को औपचारिक जवाब देना है, लेकिन वे इस पेशकश के खिलाफ लामबंद होने लगे हैं.
केरल और पंजाब सहित सात गैर बीजेपी शासित राज्यों ने इस मामले में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा दिए गए 2 विकल्पों को मानने से इनकार कर दिया है. केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी ने भी केंद्र सरकार के विकल्पों को ठुकरा दिया है. विकल्प का विरोध करने वाले राज्यों में दिल्ली, राजस्थान, पंजाब, छत्तीसगढ़, पश्चिम बंगाल, तेलंगाना और केरल शामिल हैं.
27 अगस्त को वस्तु एवं सेवा कर काउंसिल की 41वीं बैठक में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बताया कि राज्यों को 2 विकल्प दिए गए हैं.
जीएसटी को 2017 में 1 जुलाई से लागू किया गया था. जीएसटी कानून में यह तय किया गया था कि इसे लागू करने के बाद शुरुआती 5 साल में राज्यों को राजस्व का जो भी नुकसान होगा, उसकी भरपाई केंद्र सरकार करेगी. राज्यों को मई, जून, जुलाई और अगस्त यानी पिछले 4 महीने का मुआवजा नहीं मिला है. सरकार ने हाल में वित्त मामलों की स्थायी समिति को बताया कि उसके पास राज्यों को मुआवजा देने के लिए पैसे नहीं हैं.
जीएसटी कलेक्शन में सरकार को झटका
इससे पहले केंद्र सरकार को जीएसटी कलेक्शन के मोर्चे पर एक बार फिर बड़ा झटका लगा है. अगस्त में जीएसटी (GST) कलेक्शन 86,449 करोड़ रुपये रहा. जबकि पिछले साल इसी अवधि की तुलना में करीब 12 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है.
पिछले साल अगस्त में जीएसटी कलेक्शन 98,202 करोड़ रुपये रहा था. इस साल अगस्त में यह कलेक्शन गिरकर 86,449 करोड़ रुपये पर आ गया है. इससे पहले जुलाई में जीएसटी कलेक्शन 87,422 करोड़ रुपये रहा था. इस तरह से पिछले महीने की तुलना में भी कम कलेक्शन हुआ है.
जुलाई की तुलना में सरकार को जीएसटी से 973 करोड़ रुपये कम आय अगस्त में हुई है. सरकारी आंकड़े के मुताबिक जीएसटी कलेक्शन जून महीने में 90,917 करोड़ रुपये का रहा था.
वित्त मंत्रालय द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक अगस्त में जीएसटी कलेक्शन 86,449 करोड़ रुपये रहा. इसमें से केंद्रीय जीएसटी 15,906 करोड़, एसजीएसटी के तौर पर 21,064 करोड़, आईजीएसटी 42,264 करोड़ (19,179 रुपये गुड्स के आयात से) और 7,215 करोड़ रुपये सेस से आए. सेस में गुड्स के आयात से संग्रहीत 673 करोड़ रुपये शामिल हैं.