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चीन पर बयान देकर घिरे सैम पित्रोदा, कांग्रेस ने भी किया किनारा, जयराम रमेश बोले- ये पार्टी के विचार नहीं

जयराम रमेश ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा, 'सैम पित्रोदा द्वारा चीन पर व्यक्त किए गए कथित विचार निश्चित रूप से भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के विचार नहीं हैं. चीन हमारी विदेश नीति, बाह्य सुरक्षा, और आर्थिक क्षेत्र की सबसे बड़ी चुनौती बना हुआ है. कांग्रेस पार्टी ने चीन के प्रति मोदी सरकार के दृष्टिकोण पर बार-बार सवाल उठाए हैं, जिसमें 19 जून 2020 को प्रधानमंत्री द्वारा सार्वजनिक रूप से चीन की दी गई क्लीन चिट भी शामिल है.'

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ओवरसीज कांग्रेस के अध्यक्ष सैम पित्रोदा
ओवरसीज कांग्रेस के अध्यक्ष सैम पित्रोदा

कांग्रेस ने सोमवार को चीन पर ओवरसीज कांग्रेस के अध्यक्ष सैम पित्रोदा की टिप्पणियों से खुद को अलग कर लिया और कहा कि ये पार्टी के विचार नहीं हैं. कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने एक्स पर कहा, 'सैम पित्रोदा द्वारा कथित तौर पर चीन पर व्यक्त किए गए विचार भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के विचार नहीं हैं.'

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कांग्रेस की तरफ से यह स्पष्टीकरण सैम पित्रोदा के उस बयान पर आया है जिसमें उन्होंने कहा था कि 'मैं चीन से खतरे को नहीं समझ पा रहा हूं. मुझे लगता है कि इस मुद्दे को अक्सर बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया जाता है, क्योंकि अमेरिका में दुश्मन को परिभाषित करने की प्रवृत्ति है.'

'ये कांग्रेस के विचार नहीं'

जयराम रमेश ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा, 'सैम पित्रोदा द्वारा चीन पर व्यक्त किए गए कथित विचार निश्चित रूप से भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के विचार नहीं हैं. चीन हमारी विदेश नीति, बाह्य सुरक्षा, और आर्थिक क्षेत्र की सबसे बड़ी चुनौती बना हुआ है. कांग्रेस पार्टी ने चीन के प्रति मोदी सरकार के दृष्टिकोण पर बार-बार सवाल उठाए हैं, जिसमें 19 जून 2020 को प्रधानमंत्री द्वारा सार्वजनिक रूप से चीन की दी गई क्लीन चिट भी शामिल है.'

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उन्होंने कहा, 'चीन पर हमारा सबसे हालिया बयान 28 जनवरी 2025 को जारी किया गया था. यह भी अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है कि संसद को इस स्थिति पर चर्चा करने और इन चुनौतियों का प्रभावी समाधान निकालने के लिए सामूहिक संकल्प व्यक्त करने का अवसर नहीं दिया जा रहा है.'

चीन पर क्या बोले सैम पित्रोदा

सैम पित्रोदा ने कहा, 'मेरा मानना है कि अब समय आ गया है कि सभी देश आपस में सहयोग करें, टकराव नहीं. हमारा दृष्टिकोण शुरू से ही टकराव वाला रहा है और इस रवैये से दुश्मन पैदा होते हैं जो बदले में देश के अंदर समर्थन जुटाते हैं. हमें इस पैटर्न को बदलने की जरूरत है और यह मानना बंद करना होगा कि चीन पहले दिन से ही दुश्मन है.'

उन्होंने कहा, 'यह न केवल चीन के लिए बल्कि सभी के लिए अनुचित है. अब वक्त आ गया है कि हम बातचीत बढ़ाना सीखें. सहयोग करें, सहकारिता करें और सह-निर्माण करें, सिर्फ आदेश और नियंत्रण ही नहीं.'

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