कांग्रेस एक जमाने में देश की दिशा और दशा तय करने वाली पार्टी हुआ करती थी, लेकिन आज छोटे-छोटे मुद्दों में ऐसी उलझी हुई है कि कन्फ्यूजन ही कन्फ्यूजन नजर आता है. टॉप लीडरशिप से लेकर सीनियर लीडर तक फैसला लेने से पहले अटक रहे हैं. आखिर मोदी को हारने का दम भरने वाली कांग्रेस को हुआ क्या है?
इधर भी कन्फ्यूजन है, उधर भी कन्फ्यूजन हैं. द ग्रांड ओल्ड पार्टी कांग्रेस में कन्फ्यूजन ही कन्फ्यूजन है. मोदी विरोधी मोर्चा भी कन्फ्यूजन ही कन्फ्यूजन में है. इतना कन्फ्यूजन है कि सबकुछ सुलझने की बजाय उलझता हुआ नजर आ रहा है. इस कंफ्यूजन से जो समझ में आया वो यही है कि सिर्फ और सिर्फ मीटिंग का दौर जारी है, लेकिन समाधान का अता-पता नहीं हैं.
कांग्रेस के अंदर 6 बड़े कंफ्यूजन
कन्फ्यूजन नंबर-1: अधीर रंजन चौधरी हटेंगे या रहेंगे पता नहीं
कन्फ्यूजन नंबर-2: कैप्टन और सिद्धू मानेंगे या नहीं
कन्फ्यूजन नंबर-3: उत्तराखंड में रावत को कमान मिलेगी या नहीं
कन्फ्यूजन नंबर-4: राजस्थान में गृहयुद्ध खत्म होगा या नहीं
कन्फ्यूजन नंबर-5: महाराष्ट्र में अघाड़ी में किचकिच है या नहीं
कन्फ्यूजन नंबर-6: शरद पवार चेहरा होंगे या कोई और
भूलभुलैया की तरह सबकुछ गोल-गोल घूम रहा है. चुनावी रणनीति के चाणक्य प्रशांत किशोर पहले शरद पवार से मिलते हैं, फिर कैप्टन से मिलते हैं और फिर राहुल गांधी से मिलते हैं. मीटिंग पर मीटिंग चल रही है. अंदर से खबर आती है कि 2024 के लिए मोदी हराओ मोर्चा तैयार है. अब ऑल इज वेल हैं, लेकिन नतीजा ठाक के तीन पात.
लोकसभाः अधीर रंजन पर अनिश्चितता
मॉनसून सत्र में अधीर रंजन चौधरी को बदला जाए या नहीं इसी पर कांग्रेस अभी माथापच्ची कर रही है दूसरी ओर बीजेपी ने कैबिनेट विस्तार से लेकर राज्यसभा में अपना नेता तक चुन लिया है. सूत्रों का कहना है कि लोकसभा में कांग्रेस के नेता अधीर रंजन चौधरी (Adhir Ranjan Chaudhary) को उनके पद (लोकसभा में कांग्रेस नेता) से हटाया जा सकता है.
पंजाबः तारीख पर तारीख
कांग्रेस में फैसले पेंडिंग हैं और कन्फ्यूजन भी है. जबकि बीजेपी में सबकुछ क्लियर है. आखिर कांग्रेस में इनता कफ्यूजन क्यों है.
पंजाब में कांग्रेस मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह और नवजोत सिंह सिद्धू के बीच शीतयुद्ध में बार-बार सीजफायर का दावा करती है. लेकिन यहां सबकुछ गोलमाल है.
सिद्धू आम आदमी पार्टी की तारीफ में कसीदें पढ़ रहे हैं और अरविंद केजरीवाल बार-बार सिद्धू प्रेम की गंगा बहा रहे हैं. इधर सियासी सेंटिंग का खेल चल रहा है और उधर कांग्रेस यही कह रही है कि सिद्धू का अंदाज-ए-बया कुछ और है.
उत्तराखंडः नेता तलाशने में कांग्रेस कन्फ्यूजन!
तारीख पर तारीख आती जा रही है लेकिन तकरार खत्म होता नहीं दिख रहा. उत्तराखंड में अगले साल चुनाव होने हैं. बीजेपी मुख्यमंत्री बदलो प्रतियोगिता में व्यस्त है लेकिन कांग्रेस एक चेहरा तलाशने में कन्फ्यूज है. हरीश रावत के नाम की चर्चा तो बहुत दिनों से है लेकिन फैसला अभी पेडिंग है.
राजस्थानः क्या हुआ तेरा वादा!
वहीं राजस्थान में सचिन पायलट का सियासी विमान बार-बार सियासी रनवे पर फिसल रहा है, मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और पायलट में कलह पर सुलह जंग छीड़ी हुई है. पायलट आलाकमान से पूछ रहे हैं, क्या हुआ तेरा वादा.
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महाराष्ट्रः अघाड़ी सरकार में कन्फ्यूजन!
पायलट जहां बार-बार वादा याद दिला रहे हैं, तो वहीं महाराष्ट्र में अघाड़ी सरकार में कन्फ्यूजन है, 2024 में कांग्रेस सबके साथ जाएगी या अकेले.
लोकसभा चुनाव को लेकर कंफ्यूजन फुल!
यही कन्फ्यूजन 2024 के लोकसभा चुनाव को लेकर भी है, जितने नेता उतने राग, शिवसेना कह रही है कि नरेंद्र मोदी के खिलाफ पवार का चेहरा सबसे असरदार होगा, लेकिन चेहरा कौन होगा इसे लेकर कन्फ्यूजन फुल है.
शरद पवार के नाम की बैटिंग संजय राउत कर रहे हैं, लेकिन शरद पवार चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर के साथ हुई अपनी और राहुल गांधी की मीटिंग को 2024 से इतर बता रहे हैं. यानी हर लेवल पर कन्फ्यूज है. अगर अभी इतना कन्फ्यूजन हैं तो समझिए 2024 में क्या होगा. (आजतक ब्यूरो)