कांग्रेस (Congress) ने सोमवार को कहा कि पिछली तिमाही के जीडीपी आंकड़ों में गिरावट मैन्युफैक्चरिंग ग्रोथ "अप्रभावी" बढ़ोतरी और 'मेक इन इंडिया' की विफलता को उजागर करती है, जो 'मेक-बिलीव इन इंडिया' बन गया है. कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने एक बयान में कहा, "जुलाई-सितंबर 2024 की तिमाही के लिए तीन दिन पहले जारी किए गए जीडीपी विकास के आंकड़ों से "नाटकीय गिरावट" का पता चलता है.
उन्होंने कहा कि समान रूप से उल्लेखनीय और चिंताजनक बात यह है कि मैन्युफैक्चरिंग ग्रोथ घटकर 2.2 फीसदी रह गई है, जबकि निर्यात बढ़ोतरी दर भी घटकर 2.8 फीसदी रह गई है. ये आंकड़े प्रधानमंत्री के दशक भर पुराने उस वादे की निराशाजनक वास्तविकता को झुठलाते हैं, जिसमें उन्होंने भारत को मैन्युफैक्चरिंग एक्सपोर्ट का नया ग्लोबल हब बनाने का वादा किया था.
'मेक इन इंडिया' पर सवाल
जयराम रमेश ने अपने बयान में दावा किया, "दुर्भाग्यपूर्ण वास्तविकता यह है कि सरकार की 'मेक इन इंडिया' स्कीम शुरू होने के दस साल बाद, भारत का मैन्युफैक्चरिंग स्थिर है और हमारा एक्सपोर्ट लड़खड़ा रहा है." बता दें कि कांग्रेस नेता का यह बयान पार्टी नेता राहुल गांधी द्वारा इसी तरह की चिंता जताए जाने के एक दिन बाद आया है.
बीजेपी ने आरोप लगाया है कि कांग्रेस द्वारा 'चुनिंदा आंकड़ों और आधे सच के साथ आर्थिक विनाश की तस्वीर पेश करने का प्रयास' भ्रामक है. बीजेपी नेता अमित मालवीय ने कहा, "5.4 फीसदी जीडीपी विकास दर पर रोना हास्यास्पद है, जबकि यह ग्लोबल लेवल पर सबसे ज्यादा है."
अमित मालवीय ने राहुल गांधी की आलोचना का खंडन करते हुए कहा, "आपकी लगातार विनाशकारी बातें न केवल निराधार हैं, बल्कि तरक्की को स्वीकार करने में असमर्थता को भी दर्शाती हैं."
कांग्रेस लीडर जयराम रमेश ने दावा किया कि भारत के सकल मूल्य वर्धन में विनिर्माण का हिस्सा 2011-12 में 18.1 फीसदी से गिरकर 2022-23 में 14.3 फीसदी हो गया है और मैन्युफैक्चरिंग वर्कर्स की तादाद 2017 में 51.3 मिलियन से गिरकर 2022-23 में 35.65 मिलियन हो गई है. उन्होंने कहा कि वैश्विक व्यापारिक निर्यात में भारत की हिस्सेदारी भी काफी हद तक स्थिर हो गई है और भारत के सकल घरेलू उत्पाद के हिस्से के रूप में निर्यात में गिरावट आ रही है.
उन्होंने दावा किया कि वैश्विक निर्यात में भारत की हिस्सेदारी में बढ़ोतरी 2005-15 की अवधि में बहुत तेजी से हुई, जो काफी हद तक प्रधानमंत्री के रूप में डॉ. मनमोहन सिंह के कार्यकाल के अनुरूप है. वस्त्र जैसे सभी अहम रोजगार-प्रधान सेक्टर्स में निर्यात 2013-14 में 15 बिलियन अमरीकी डॉलर से गिरकर 2023-2024 में 14.5 बिलियन अमरीकी डॉलर हो गया है और भारत बांग्लादेश और वियतनाम जैसे देशों से बहुत पीछे रह गया है.
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'एक तिहाई से ज्यादा MSMEs बंद...'
कांग्रेस नेता ने दावा किया, "ये निराशाजनक नतीजे आखिरकार मोदी सरकार की मैन्युफैक्चरिंग में निजी निवेश को बढ़ावा देने में विफलता का नतीजा हैं. कर कटौती और उत्पादन से जुड़े प्रोत्साहनों को लेकर जो प्रचार किया जा रहा है, वह वास्तविकता से मेल नहीं खाता. एक के बाद एक सेक्टर में इस बात के सबूत मिल रहे हैं कि कैसे चीन से लगातार सस्ते आयात भारतीय विनिर्माण को नष्ट कर रहे हैं. अकेले गुजरात में स्टेनलेस स्टील उत्पादन उद्योग में एक तिहाई से ज्यादा MSMEs चीन से ऐसे आयात के कारण बंद पड़े हैं."
जयराम रमेश ने आरोप लगाया, "मेक इन इंडिया अब सिर्फ मेक-बिलीव इन इंडिया बन गया है."
विनिर्माण और खनन सेक्टर्स के खराब प्रदर्शन और कमजोर खपत की वजह से इस फाइनेंशियल ईयर की जुलाई-सितंबर तिमाही में भारत की आर्थिक वृद्धि दर करीब दो साल के निचले स्तर 5.4 फीसदी पर आ गई, लेकिन शुक्रवार को जारी आंकड़ों से पता चला कि देश सबसे तेजी से बढ़ने वाली बड़ी अर्थव्यवस्था बना हुआ है.
वित्त वर्ष 2023-24 की जुलाई-सितंबर तिमाही में सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में 8.1 फीसदी और चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही (अप्रैल-जून 2024) में 6.7 फीसदी की बढ़ोतरी हुई थी.
वित्तीय वर्ष 2022-23 की तीसरी तिमाही (अक्टूबर-दिसंबर 2022) में जीडीपी वृद्धि का पिछला निम्न स्तर 4.3 फीसदी दर्ज किया गया था. आंकड़ों से यह भी पता चला है कि निजी अंतिम उपभोग व्यय (PFCE) की बढ़ोतरी इस साल अप्रैल-जून में 7.4 फीसदी से घटकर सितंबर तिमाही में 6 फीसदी हो गई.