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Article-370: दिग्विजय के ऑडियो पर बोली कांग्रेस- JK के रेजॉल्यूशन में है हमारा स्टैंड

दिग्विजय सिंह के आर्टिकल-370 पर दिए बयान पर कांग्रेस ने कहा कि जम्मू-कश्मीर की स्थिति पर एक रेजॉल्यूशन कांग्रेस वर्किंग कमेटी में पास हुआ था. कांग्रेस का स्टैंड, इस रेजॉल्यूशन में है और तमाम वरिष्ठ नेता भी उसी स्टैंड को देखें.  

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कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह
कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह
स्टोरी हाइलाइट्स
  • कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह के बयान पर घमासान
  • कांग्रेस ने याद दिलाया जम्मू-कश्मीर पर एक रेजॉल्यूशन
  • आर्टिकल-370 पर कांग्रेस का स्टैंड

कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह के आर्टिकल-370 पर दिए बयान को लेकर बीजेपी हमलावर है. बीजेपी के आरोपों का जवाब देते हुए कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता पवन खेड़ा ने कहा कि जम्मू-कश्मीर की स्थिति पर एक रेजॉल्यूशन कांग्रेस वर्किंग कमेटी में (6 अगस्त, 2019) पास हुआ था. पवन खेड़ा ने कहा कि कांग्रेस का स्टैंड, इस रेजॉल्यूशन में है और तमाम वरिष्ठ नेताओं से भी अपील व निवेदन करूंगा कि उसी स्टैंड को देखें.  

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केंद्र सरकार पर साधा निशाना 

कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा कि इस सरकार का आंकड़ों से सांप-नेवले वाला रिश्ता है. पिछले सात साल में ये दृश्य बड़ा सामान्य हो गया है. वो नौकरियां हो, अर्थव्यवस्था हो, जीडीपी हो, नौकरियों पर हो, या बेरोजगारी पर हो. पार्लियामेंट में अक्सर लोकसभा और राज्यसभा में ये देखा गया है कि एनडीए का मतलब ही नो डेटा अवेलेबल है.  

कोरोना को लेकर लगाया ये आरोप 

कांग्रेस ने कहा कि अहमदाबाद के सिविल अस्पताल में कितनी मौतें हुईं, सरकार के दावे पूरी तरह गलत है. सरकारी आंकड़ों में 10 अप्रैल व 9 मई के बीच में पूरे राज्य में 3,578 मौतें बताई गईं और अहमदाबाद में 698 मौतें बताई गईं. सच्चाई क्या निकली कि अकेले अहमदाबाद के सिविल अस्पताल में इसी दौरान 3,416 मौतें कोविड से हुईं. ये सिर्फ एक अस्पताल की बात है, सोचिए पूरे राज्य की क्या स्थिति होगी? अलग-अलग शहरों से रिपोर्ट आई है- सूरत, राजकोट, वडोदरा, भरूच आदि. हाईकोर्ट ने भी गुजरात सरकार को लताड़ लगाई है.  

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मध्य प्रदेश में भी हम सबने रिपोर्ट देखी कि किस तरह से मुक्तिधामों से रजिस्टर गायब किए जा रहे हैं कि कहीं आप जैसे खोजी पत्रकारों को कोई आंकड़े ना मिल जाएं. जैसा कि कांग्रेस ने कहा कि ये (बीजेपी) आंकड़ों से डरते हैं. 

कांग्रेस नेता ने कहा कि मध्य प्रदेश में जिस तरह से आंकडे छुपाए जा रहे हैं, ऐसे लगता है प्रतिस्पर्धा हो रही है. गुजरात, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, बिहार, कर्नाटक, तमाम राज्य आपस में प्रतिस्पर्धा में हैं कि कैसे छुपाया जाए.  

वाराणसी को लेकर किये ये दावे  

पवन खेड़ा ने कहा कि वाराणसी महत्वपूर्ण शहर है. सरकार ने अप्रैल में 227 मौतें दिखाई जबकि अकेले मणिकर्णिका घाट पर अप्रैल माह के एक सप्ताह में 1,500 दाह संस्कार हुए. इसी दौरान वाराणसी के 13 कब्रिस्तानों में 1,680 मृतकों को दफनाया गया. बताइए ये आंकड़ा सरकार के दावों से इतना दूर क्यों है? 

हम यह मांग करते हैं कि नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इन राज्यों के मुख्यमंत्रियों को तुरंत प्रभाव से इस्तीफा देना चाहिए. साथ ही प्रधानमंत्री ये यह मांग करते हैं कि एक निष्पक्ष न्यायिक जांच पूरे देश में करवाई जाए कि कोविड से कितनी मौतें हुई हैं. जिम्मेदारी फिक्स की जाए, बताया जाए कि इसके लिए कौन जिम्मेदार है?

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