दिल्ली के उपराज्यपाल वी. के. सक्सेना ने लेखिका अरुंधति रॉय और कश्मीर केंद्रीय विश्वविद्यालय में अंतर्राष्ट्रीय कानून के पूर्व प्रोफेसर डॉ. शेख शौकत हुसैन के खिलाफ साल 2010 में यहां एक कार्यक्रम में कथित तौर पर भड़काऊ भाषण देने के मामले में कठोर गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम के तहत मुकदमा चलाने की मंजूरी दे दी है. अधिकारियों ने बताया कि रॉय और कश्मीर केंद्रीय विश्वविद्यालय के पूर्व प्रोफेसर शेख शौकत हुसैन के खिलाफ मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट, नयी दिल्ली की अदालत के आदेश के बाद प्राथमिकी दर्ज की गई थी.
इस एफआईआर को लेकर राजनीतिक दलों की प्रतिक्रियाएं भी सामने आ रही हैं. जम्मू-कश्मीर की पूर्व सीएम महबूबा मुफ्ती, कांग्रेस नेता हरिप्रसाद बीके और तृणमूल कांग्रेस की सांसद महुआ मोइत्रा ने इस एफआईआर की आलोचना की है.
विपक्ष ने एक सुर में की एफआईआर की आलोचना
पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा, 'अरुंधति रॉय विश्व प्रसिद्ध लेखिका और एक बहादुर महिला हैं जो फासीवाद के खिलाफ एक शक्तिशाली आवाज के रूप में उभरी हैं, उन पर कठोर यूएपीए के तहत मामला दर्ज किया गया है. भारत सरकार मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करते हुए अपनी क्रूरता जारी रखे हुए है. कश्मीर के एक पूर्व लॉ प्रोफेसर पर मामला दर्ज करना भी हताशा का काम है.'
टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा ने पोस्ट करते हुए कहा, 'अगर अरुंधति रॉय पर यूएपीए के तहत मुकदमा चलाकर बीजेपी यह साबित करने की कोशिश कर रही है कि वे वापस आ गए हैं, तो ऐसा नहीं है. और वे कभी भी उसी तरह वापस नहीं आएंगे जैसे वे पहले थे. इस तरह के फासीवाद के खिलाफ भारतीयों ने वोट दिया है.'
कांग्रेस नेता हरिप्रसाद बीके ने एक्स पर लिखा, 'मैं अरुंधति रॉय पर मुकदमा चलाने के लिए एलजी की मंजूरी की कड़ी निंदा करता हूं. वह एक शानदार, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रसिद्ध लेखिका और एक अग्रणी बुद्धिजीवी हैं. फासीवाद असहमति को कुचलने पर पनपता है, खासकर बुद्धिजीवियों, कलाकारों, लेखकों, कवियों और कार्यकर्ताओं से. बीजेपी असहमति जताने वालों को विचलित करने और उन्हें अपनी विफलताओं से ध्यान हटाने के लिए प्रतिदिन संकट पैदा करती है. अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और लोकतांत्रिक मूल्यों पर यह हमला अस्वीकार्य है.'
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था मामला
आपको बता दें कि इस मामले में कश्मीर के एक सामाजिक कार्यकर्ता सुशील पंडित की शिकायत पर 28 अक्टूबर, 2010 को प्राथमिकी दर्ज की गई थी. रॉय और हुसैन ने 21 अक्टूबर 2010 को यहां कॉपरनिकस मार्ग स्थित एलटीजी ऑडिटोरियम में ‘आजादी – एकमात्र रास्ता’ के बैनर तले आयोजित एक सम्मेलन में कथित तौर पर भड़काऊ भाषण दिए थे.अधिकारी ने कहा, ‘सम्मेलन में जिन मुद्दों पर चर्चा हुई और जिन पर बात हुई, उनसे कश्मीर को भारत से अलग करने का प्रचार हुआ.’