करीब एक साल से केंद्र सरकार के तीन नए कृषि कानूनों का विरोध कर रहे किसानों की मेहनत रंग लाई और आज मोदी सरकार ने इन्हें वापस लेने का ऐलान कर दिया. अब तीनों कृषि कानूनों को वापस लिए जाने के केंद्र सरकार के फैसले पर मुख्य विपक्षी पार्टी कांग्रेस की अध्यक्ष सोनिया गांधी ने भी प्रतिक्रिया दी है.
सोनिया गांधी ने इसे अन्नादाताओं की जीत और सरकार के अहंकार की हार करार दिया है. सोनिया गांधी ने फैसले पर खुशी जताते हुए कहा, लगभग 12 महीने के गांधीवादी आंदोलन के बाद आज देश के 62 करोड़ अन्नदाताओं-किसानों-खेतिहर मजदूरों के संघर्ष और इच्छाशक्ति की जीत हुई.
उन्होंने कहा, आज उन 700 से अधिक किसान परिवारों की कुर्बानी रंग लाई, जिनके परिवारजनों ने न्याय के इस संघर्ष में अपनी जान न्योछावर कर दी. आज सत्य, न्याय और अहिंसा की जीत हुई.
तानाशाह शासकों का अहंकार हारा: सोनिया गांधी
इतना ही नहीं सोनिया गांधी ने केंद्र सरकार पर हमला बोलते हुए कहा, 'आज सत्ता में बैठे लोगों द्वारा किसानों के खिलाफ बुना गया षड़यंत्र भी हारा और तानाशाह शासकों का अहंकार भी. आज रोजी-रोटी और किसानी पर हमला करने की साजिश भी हारी. आज खेती-विरोधी तीनों काले कानून हारे और अन्नदाता की जीत हुई.'
सोनिया गांधी ने एनडीए सरकार को किसान विरोधी बताया. उन्होंने कहा, पिछले सात सालों से बीजेपी सरकार ने लगातार खेती पर अलग-अलग तरीके से हमला बोला है. चाहे बीजेपी सरकार बनते ही किसान को दिए जाने वाले बोनस को बंद करने की बात हो, या फिर किसान की जमीन के उचित मुआवज़ा कानून को अध्यादेश लाकर समाप्त करने का षडयंत्र हो.
सोनिया गांधी ने कहा, इस सरकार ने किसानों के खिलाफ काम किया है. चाहे प्रधानमंत्री के वादे के मुताबिक किसान को लागत+50% मुनाफा देने से इनकार कर देना हो, या फिर डीज़ल और कृषि उत्पाद की लागतों में भारी भरकम वृद्धि हो, या फिर तीनों खेती विरोधी काले कानूनों के जरिए किसानों पर हमला.
किसानों की खराब हालत के लिए सरकार जिम्मेदार: सोनिया
कांग्रेस अध्यक्ष ने किसानों की आय को लेकर भी मोदी सरकार पर तंज कसा. उन्होंने कहा, आज जब भारत सरकार के NSO के मुताबिक किसान की औसत आय ₹27 प्रतिदिन रह गई हो, और देश के किसान पर औसत कर्ज ₹74,000 हो, तो सरकार और हर व्यक्ति को दोबारा सोचने की जरूरत है कि खेती किस प्रकार से सही मायनों में मुनाफे का सौदा बने. किसान को उसकी फसल की सही कीमत यानि MSP कैसे मिले.
सोनिया गांधी ने कहा, किसान और खेतिहर मजदूर को यातना नहीं, याचना भी नहीं, न्याय और अधिकार चाहिये. यह हम सबका कर्तव्य भी है और संवैधानिक जिम्मेदारी भी.
उन्होंने कहा, प्रजातंत्र में कोई भी निर्णय सबसे चर्चा कर, सभी प्रभावित लोगों की सहमति और विपक्ष के साथ राय मशवरा के बाद ही लेना चाहिए. उम्मीद है कि मोदी सरकार ने कम से कम भविष्य के लिए कुछ सीख ली होगी.
कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने अंत में कहा, मुझे उम्मीद है कि बीजेपी सरकार और प्रधानमंत्री अपना राजहठ और अहंकार छोड़कर किसान कल्याण की नीतियों को लागू करने की ओर ध्यान देंगे, MSP सुनिश्चित करेंगे और भविष्य में ऐसा कोई कदम उठाने से पहले राज्य सरकारों, किसान संगठनों और विपक्षी दलों के बीच सहमति बनाएंगे.
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