किसान बिल को लेकर संसद से लेकर सड़क तक रार जारी है. सोमवार को राज्यसभा चेयरमैन ने हंगामा करने वाले आठ सांसदों को सस्पेंड कर दिया. इस मसले पर कांग्रेस की ओर से जबरदस्त विरोध किया जा रहा है. सोमवार को कांग्रेस की ओर से प्रेस कॉन्फ्रेंस की गई और आरोप लगाया गया कि लोकतंत्र का गला घोंटा जा रहा है.
कांग्रेस नेता केसी वेणुगोपाल, रणदीप सुरजेवाला और अधीर रंजन चौधरी ने इस मसले पर सरकार को घेरा. कांग्रेस ने आरोप लगाया कि संसद में संविधान का गला घोंटा जा रहा है और खेत में किसान की आजीविका का मोदी के राजतंत्र को बचाने के लिए देश में और संसद में प्रजातंत्र को खत्म किया जा रहा है.
कांग्रेस की ओर से आरोप लगाया गया कि मोदी सरकार को किसानों से कोई लेना देना नहीं है, वह अपने चंद फाइनेंसर को बचाने में लगी है. मोदी जी ने देश की संसद को गुजरात के तानाशाह मॉडल में कन्वर्ट कर दिया.
कांग्रेस नेताओं ने कहा कि आज एक लोकतंत्र को ऑटोक्रेसी में बदल दिया गया है, जहां पर धक्केशाही-तानाशाही के जरिए विपक्ष की आवाज को दबाया जा रहा है. सांसदों को सस्पेंड कर किसानों की आवाज दबाई गई है, किसान मोदी सरकार को कभी माफ नहीं करेगा.
कांग्रेस की ओर से सवाल किया गया कि काले कानूनों पर डिविजन मांगना कैसे असंसदीय है? क्या मार्शल के द्वारा सांसदों को धक्के मारना, राज्यसभा टीवी की आवाज बंद कर देना, उपसभापति के खिलाफ प्रस्ताव को खारिज करना संसदीय है?
गौरतलब है कि किसानों के आंदोलन के जरिए कांग्रेस अपनी पार्टी में जान फूंकने में लगी है. कांग्रेस को लगता है कि विपक्ष को एकजुट करने का इससे बेहतर मौका नहीं मिल सकता, यही वजह है कि वह एक मजबूत मुद्दे पर जनता में सीधा संदेश देना चाहती.
कांग्रेस जल्द ही इस मसले पर आगे की रणनीति तैयार करेगी, जिसपर बैठक बुलाई गई है. कांग्रेस अपने राज्यों को किसान इन्चार्जों से मंथन करेगी और जनता तक बात पहुंचाएगी.