कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धरमैया ने राज्य के शैक्षणिक संस्थानों में हिजाब पहनने पर जारी प्रतिबंध को खत्म कर दिया है. उन्होंने कहा कि पहनने और भोजन का चयन व्यक्तिगत मामला है. उनके इस फैसले के बाद राजनीति तेज हो गई है. बीजेपी ने इस फैसले की आलोचना करते हुए कहा कि सीएम सिद्धारमैया का निर्णय वोटों की खातिर लिया गया निर्णय है और हमारे शैक्षणिक स्थानों की धर्मनिरपेक्ष प्रकृति के बारे में चिंता पैदा करता है.
सिद्धरमैया ने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा, ‘वे कहते हैं ‘सबका साथ, सबका विकास’ लेकिन टोपी, बुर्का पहनने वालों और दाढ़ी रखने वालों को दरकिनार कर देते हैं. क्या उनका यही मतलब है.’
सीएम का बयान
मैसूरु जिले के नंजनगुड में तीन पुलिस थानों के उद्घाटन के अवसर पर मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने कहा, 'हम हिजाब पर प्रतिबंध वापस लेंगे. हिजाब पर अब कोई प्रतिबंध नहीं है और महिलाएं हिजाब पहनकर जा सकती हैं. मैंने प्रतिबंध आदेश वापस लेने का निर्देश दिया है. पोशाक और भोजन का चुनाव आपकी पसंद है मैं तुम्हें क्यों रोकूँ? जो चाहे पहनो. जो चाहो खाओ. मैं जो चाहूं मैं खाऊंगा, तुम जो चाहो तुम खाओ. मैं धोती पहनता हूं, तुम पैंट शर्ट पहनते हो तो इसमें ग़लत क्या है? वोट के लिए राजनीति नहीं करनी चाहिए.'
बीजेपी का कांग्रेस सरकार पर हमला
सिद्धारमैया के इस बयान के बाद विपक्षी दल बीजेपी कांग्रेस सरकार पर हमलावर हो गई है. कर्नाटक बीजेपी के अध्यक्ष बीवाई विजयेंद्र ने कहा, 'शैक्षणिक संस्थानों में धार्मिक पोशाक की अनुमति देकर सिद्धारमैया सरकार युवा दिमागों को धार्मिक आधार पर विभाजित करने को बढ़ावा दे रही है. विभाजनकारी प्रथाओं पर शिक्षा को प्राथमिकता देना महत्वपूर्ण है जहां छात्र धार्मिक प्रथाओं के प्रभाव के बिना शिक्षाविदों पर ध्यान केंद्रित कर सकें.'
केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने कहा, 'कांग्रेस शरिया कानून के तहत हिजाब से प्रतिबंध हटाया है. अगर राहुल गांधी कांग्रेस और इंडिया गठबंधन की सरकार में देश में बनी तो इसी तरह से इस्लामी कानून सरिया कानून लागू होगा. यह सनातन धर्म को खत्म करने का एक तरह से सुनियोजित तरीका है.'
हिजाब प्रतिबंध खत्म किए जाने के फैसले पर कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा नेता बीएस येदियुरप्पा ने कहा, 'किसी ने भी इस हिजाब फैसले को वापस लेने की मांग नहीं की.. लेकिन उन्होंने केवल अपने बारे में बात की. इसमें हिंदू और मुस्लिम एक साथ हैं कि हर छात्र एक जैसी वर्दी पहनेगा. यहां तक कि अदालतें भी इससे सहमत थीं. मुसलमानों को खुश करने के लिए सिद्धारमैया ने ये बात कही. उन्हें अपना बयान वापस लेना चाहिए.'
कांग्रेस बोली- बीजेपी कर रही है राजनीति
कर्नाटक सरकार में मंत्री प्रियांक खड़गे ने कहा, 'मुझे नहीं लगता कि बीजेपी संविधान के बारे में जानती है. हम सब कुछ कानून के दायरे में ही कर रहे हैं.. बीजेपी को संविधान पढ़ना चाहिए.. कोई भी कानून/नीति/योजना जो भी हो कर्नाटक के लिए अच्छा नहीं है और प्रगति को नजरअंदाज कर रहा है तो यदि आवश्यकता हुई तो उस कानून या नीति को हटा दिया जाएगा.'
कर्नाटक के प्राथमिक और माध्यमिक शिक्षा मंत्री मधु बंगारप्पा ने हिजाब प्रतिबंध वापसी विवाद पर कहा, 'मैं सीएम के साथ चर्चा करूंगा और फिर चीजों को आगे बढ़ाऊंगा.. इसका किसी भी तरह की राजनीति से कोई लेना-देना नहीं है.. इस मुद्दे का राजनीतिकरण नहीं किया जाना चाहिए . राज्य की शिक्षा नीति में संस्कृति, अध्ययन और अन्य चीजें शामिल हैं. बीजेपी यह नहीं बताएगी कि उन्होंने क्या प्रगति की है.'
जब कोर्ट ने सरकार के बैन का किया था समर्थन
आपको बता दें कि पिछले साल तत्कालीन बीजेपी की राज्य सरकार ने प्राथमिक और माध्यमिक शिक्षा विभाग ने एक सर्कुलर जारी कर स्कूलों और कॉलेजों में हिजाब पर बैन लगा दिया था. इस फैसले को लेकर तब काफी राजनीति हुई थी. मामला कोर्ट की चौखट तक पहुंच गया था लेकिन कोर्ट ने सरकार के बैन के आदेश का समर्थन करते हुए कहा कि शिक्षण संस्थानों के छात्र-छात्राओं को पहले से निर्धारित यूनिफॉर्म ही पहनना होगा.