ओडिशा के बालासोर में हुए भीषण रेल हादसे ने देश के दिल को दहला दिया है. इस हादसे न सिर्फ देश में बल्कि पूरी दुनिया को झकझोर दिया है. इस 2 जून को देश ने सबसे घातक ट्रेन हादसों में से एक देखा, जिसमें 288 लोग अब तक मारे जा चुके हैं और लगभग 1,175 घायल हो गए. इस ट्रेन दुर्घटना में शुक्रवार को ओडिशा के बालासोर जिले में बेंगलुरु-हावड़ा सुपरफास्ट एक्सप्रेस, शालीमार-चेन्नई सेंट्रल कोरोमंडल एक्सप्रेस और एक मालगाड़ी शामिल थी.
शुक्रवार को हुई दुर्घटना के बाद से अब तक रेस्क्यू का काम जारी है. ट्रेन के कुछ डिब्बे एक-दूसरे के ऊपर चढ़ गए और उन्हें बुलडोजर से उतारा जा रहा है. इस हादसे में शामिल एक ट्रेन कोरोमंडल एक्सप्रेस भी थी. यह ट्रेन पहले भी तीन बार हादसे की भेंट चढ़ चुकी है.
पहले भी कोरोमंडल का हो चुका है हादसा
13 फरवरी, 2009 को हुई कोरोमंडल एक्सप्रेस की दुर्घटना एक और गवाह है. वह भी शुक्रवार का ही दिन था, जब हावड़ा-चेन्नई कोरोमंडल एक्सप्रेस जाजपुर क्योंझर रोड के पास पटरी से उतर गई थी. इस हादसे में करीब 15 लोगों की मौत हो गई और कई घायल हो गए. हादसे की वजहें अब तक पता नहीं चल पाई हैं.
2002 में पटरी से उतरी थी ट्रेन
कोरोमंडल ट्रेन दुर्घटनाओं के इतिहास में कई घटनाएं शामिल हैं. खराब ट्रैक की स्थिति के कारण, 15 मार्च, 2002 को हावड़ा-चेन्नई कोरोमंडल एक्सप्रेस तमिलनाडु के नेल्लोर जिले में पडुगुपाडु रोड ओवर-ब्रिज पर पटरी से उतर गई थी.
2009 में 15 लोगों की गई थी जान
इसके बाद 13 फरवरी, 2009 को हावड़ा-चेन्नई कोरोमंडल एक्सप्रेस जाजपुर क्योंझर रोड के पास पटरी से उतर गई. इस हादसे में 15 लोगों की मौत हो गई और कई घायल हो गए थे.
2011 में 32 की गई थी जान
इसके बाद 6 दिसंबर 2011 को आंध्र प्रदेश में नेल्लोर के पास कोरोमंडल पटरी से उतर गई थी. इस हादसे में 32 यात्रियों की मौत हो गई थी और कई अन्य घायल हो गए थे. इसके बाद 14 जनवरी 2012 को लिंगराज रेलवे स्टेशन के पास चेन्नई-हावड़ा कोरोमंडल एक्सप्रेस के जनरल डिब्बे में आग लग गई थी. हालांकि इस हादसे में कोई घायल नहीं हुआ था.