विदेश से एमबीबीएस की डिग्री लेकर आए भारतीय डॉक्टरों को कोविड काल में अपनी चिकित्सा सेवा देने की इजाजत देने के लिए दायर याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार और मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया को नोटिस जारी किया है. सरकार को इस याचिका में उठाए गए सवालों के जवाब सुप्रीम कोर्ट को दो हफ्ते में देने हैं.
याचिकाकर्ताओं की ओर से कपिल सिब्बल ने दलील देते हुए कहा कि कोविड संकट के समय जब मेडिकल छात्रों को सरकार मरीजों की सेवा का अवसर मानदेय यानी स्टाइपेन के साथ दे रही है तो इन मेडिकल स्नातकों को मौका देने में क्यों हिचक रही है.
कपिल सिब्बल ने कहा कि विदेश से मेडिकल डिग्री लेकर आए डॉक्टर्स की चार श्रेणियां हैं. उनमें से एक ऐसे दर्जे के डॉक्टर्स भी हैं जो परीक्षाएं पास करने के बाद इंटर्नशिप भी पूरी कर चुके हैं. इन सबके बावजूद खुद के रजिस्ट्रेशन का इंतजार ही कर रहे हैं. लिहाजा कोर्ट सरकार को उचित निर्देश दे ताकि उन डॉक्टरों का भी इस्तेमाल ऐसे संकटकाल में किया जा सके.
जस्टिस एल नागेश्वर राव और जस्टिस अनिरुद्ध बोस की खंडपीठ ने इन याचिकाओं पर याचिकाकर्ता की ओर से दलीलें सुनने के बाद नोटिस जारी की है. ये याचिकाएं इंडियन फॉरेन मेडिकल स्टूडेंट्स वेलफेयर एमसीआई गुरुकुल ट्रस्ट के साथ-साथ एसोसिएशन ऑफ एमडी फिजिशियन ने दाखिल की है.
'ग्लोबल पेरेंटिंग डे' पर बोले सिसोदिया- बच्चों में मानसिक तनाव को दूर करने को माइंडफुलनेस कारगर'
कोरोना संकट में मदद करना चाहते हैं!
याचिका में नेशनल बोर्ड ऑफ एग्जामिनेशन से कम से कम एक बार अभी के लिए नियमों से राहत देने की गुहार लगाई गई है. ताकि इस कोविड संकट के दौरान विदेशी मेडिकल कॉलेजों या विश्वविद्यालयों से मेडिकल डिग्री हासिल कर लौटे डॉक्टर्स को देश की सेवा करने का मौका देने का रास्ता साफ हो सके.
याचिका में मांग की गई है कि सुप्रीम कोर्ट केंद्र सरकार को आदेश दे कि 2020 के पासआउट विदेशी एमबीबीएस डॉक्टर्स को स्क्रीनिंग टेस्ट क्वालिफाइंग से पहले इंटर्नशिप करने की इजाजत दी जाए. परीक्षा बाद में भी कराए जाएं तो कम से कम कोविड के दौरान डॉक्टर्स अपनी सेवा तो दे सकें.
कम नंबर पर पास होने की मांग!
डॉक्टर्स को उस इम्तिहान में ग्रेस मार्क देकर 130-35 के प्राप्तांक पर भी उत्तीर्ण किया जाए ताकि देश के मेडिकल कॉलेज या विदेशी मेडिकल कॉलेजों से उत्तीर्ण भारतीय छात्रों के साथ दशकों से हो रहे भेदभाव को खत्म किया जा सके. अभी नेपाल सहित कुछ ही देशों से पासआउट छात्रों को ही इंटर्नशिप में रियायत मिलती है. याचिका में मांग की गई है कि एफएमजीएस डॉक्टर्स को इस संकटकाल में सेवा का मौका देने के लिए सरकार इनको भी चिकित्सा बेड़े में शामिल करें.
यह भी पढ़ें-
जायडस कोरोना वैक्सीन को बच्चों पर भी आजमाया जा रहा है- डॉ. वीके पॉल
गुजरात में मृतकों के नाम पर हो रहा है वैक्सीनेशन, लापरवाही या घोटाला?