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वैक्सीनेशन से पहले हो कोविड टेस्ट, 48 फीसदी लोगों की मांग, स्टडी में सामने आया फैक्ट!

16,000 लोगों पर किए गए एक सर्वे के मुताबिक 48 फीसदी लोग चाहते हैं कि सरकार टीकाकरण से पहले कोविड परीक्षण अनिवार्य हो. हालांकि 27 प्रतिशत लोगों का मानना है कि ऐसा नहीं होना चाहिए.

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देश में नहीं थम रहा है कोरोना संक्रमण (फोटो-PTI)
देश में नहीं थम रहा है कोरोना संक्रमण (फोटो-PTI)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • कोरोना से ठीक होने के 6 महीने बाद लगवाएं वैक्सीन
  • वैक्सीन से पहले कोरोना टेस्ट की बढ़ी मांग
  • वैक्सीन सेंटर पर कोरोना फैलने का बढ़ा खतरा

कोरोना संक्रमण को रोकने के लिए वैक्सीनेशन सबसे मददगार कदम है. एक सर्वे में करीब 48 फीसदी लोगों का मानना है कि सरकार को वैक्सीनेशन से पहले कोरोना टेस्ट को अनिवार्य कर देना चाहिए. केवल 27 फीसदी लोगों का मानना है कि ऐसा नहीं होना चाहिए. कुछ डॉक्टरों का मानना है कि बिना लक्षण वाले मरीजों को टीका लगाने पर कोई प्रभाव नहीं होता है. हालांकि उन्होंने कहा कि जो भी लोग वैक्सीनेशन के लिए जाएं, वे कोरोना प्रोटोकॉल का पालन जरूर करें. बिना लक्षण वाले मरीज कोरोना वायरस को वैक्सीनेशन सेंटर पर नहीं फैला सकते.

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द सेंटर्स फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन का सुझाव है कि ऐसे लोग जिन्हें मौजूदा SARS-CoV-2 संक्रमण है, उनका टीकाकरण तब तक के लिए टाल देना चाहिए, जब तक वे गंभीर बीमारी से पूरी तरह से स्वास्थ न हो जाएं. तभी वैक्सीनेशन हो जब वे आइसोलेशन की प्रक्रिया से बाहर आ जाएं. 

द नेशनल टेक्निकल एडवाइजरी ग्रुप ऑफ इम्युनाइजेशन इन इंडिया(एनटीएजीआई) का सुझाव है कि जो लोग कोरोना संक्रमित हुए हैं, उन्हें कोरोना वैक्सीन की पहली डोज 6 महीने के बाद लेनी चाहिए. इस मामले का जिक्र करते हुए लोगों से उनकी राय पूछी गई तो ज्यादातर लोगों ने कहा कि वैक्सीन की पहली डोज से पहले रैपिड एंटीजन टेस्ट को अनिवार्य कर दिया जाना चाहिए. यह सर्वे भारत के 278 जिलों में16,000 लोगों पर किया गया.

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48 फीसदी लोग मानते हैं पहले टीकाकरण से पहले हो कोरोना टेस्ट

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ज्यादातर विशेषज्ञों का मानना है कि भारत में 80 फीसदी कोरोना संक्रमित लोगों में कोरोना के कोई लक्षण नहीं हैं. जो लोग वैक्सीन की पहली डोज लगवाने जा रहे हैं, उनमें कोरोना संक्रमित भी हो सकते हैं. कई लोगों को डर है कि उनकी स्थिति टीकाकरण के बाद और गंभीर हो जाएगी, क्योंकि कुछ लोगों में वैक्सीन लगने के बाद तबीयत खराब होने के भी मामले सामने आए हैं.  

लोकल सर्किल्स सर्वे टीम के मुताबिक 48 फीसदी लोगों ने वैक्सीनेशन के पहले टीकाकरण के लिए हां कहा और 27 फीसदी लोगों ने इसे नकार दिया. सर्वे में इस सवाल के जवाब में कुल 8,658 लोगों ने अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त की.

टीकाकरण के बाद हुआ संक्रमण- 54 फीसदी लोगों का मत

टीकारण की पहली और दूसरी डोज के बाद भी कुछ लोग कोरोना संक्रमित हुए हैं. इसे समझने के लिए लोगों से सवाल किया गया कि कितने लोगों को आप जानते हैं, जिन्हें टीका लगने के बाद 14 दिनों के बाद कोरोना संक्रमण हुआ है. इसके जवाब में 20 फीसदी लोगों ने कहा कि वे जानते हैं कि 5 या इससे ज्यादा लोग कोरोना संक्रमित हुए हैं. वहीं 15 फीसदी लोगों ने कहा कि वे महज 3 से 4 लोगों को जानते हैं को वैक्सीनेट होने के बाद भी कोरोना का शिकार हुए. वहीं 12 फीसदी लोगों ने कहा कि वे 2 लोगों को जानते हैं, वहीं 7 फीसदी लोगों का जवाब था कि वे सिर्फ एक शख्स को जानते हैं, जो टीकारण के बाद भी कोरोना संक्रमण का शिकार हुआ हो.

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ठीक होने के 6 महीने बाद लगवाएं वैक्सीन

35 फीसदी लोगों का कहना है कि वे किसी को नहीं जानते, जो वैक्सीन की पहली डोज लगवाने के एक सप्ताह के भीतर कोरोना संक्रमण का शिकार हुआ हो.  11 फीसदी लोगों ने कहा कि वे कुछ नहीं कह सकते. एनटीएजीआई ने यह भी कहा कि जो लोग कोरोना से रिकवर हो चुके हैं, उन्हें कोरोना की अगली डोज के लिए 6 महीने इंतजार करना चाहिए. सरकार का भी कहना है कि लैब रिपोर्ट सामने आने के बाद SARS-CoV-2 संक्रमित लोगों को ठीक होने के 6 महीने बाद ही वैक्सीन लगवानी चाहिए.

(श्रेया सिन्हा की रिपोर्ट)


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