दिल्ली के ओल्ड राजेंद्र नगर स्थित RAU'S IAS स्टडी सेंटर के बेसमेंट में हुए हादसे में गिरफ्तार 4 आरोपियों की जमानत याचिका पर सोमवार को दिल्ली की एक अदालत में सुनवाई हुई. इस दौरान मामले की जांच कर रही सीबीआई से कोर्ट ने पूछा कि उन्होंने इस मामले में उन लोगों को जवाबदेह क्यों नहीं ठहराया जिन्होंने इतना कमजोर गेट बनाया?.
जानें कोर्ट ने क्या कहा?
सुनवाई के दौरान जस्टिस अंजू बजाज चंदना ने कहा, 'हमने फ्लाईओवर गिरने के बारे में सुना है...अगर ठेकेदार घटिया सामग्री का इस्तेमाल करता है तो यह एक गंभीर मामला है.' ऐसे में उन लोगों की भी जवाबदेही तय होनी चाहिए, जिन्होंने इतना कमजोर गेट बनाया. सोमवार को हुई इस सुनवाई में आरोपी सह-मालिकों की ओर से पेश वकील अमित चड्ढा ने अदालत को बताया, 'पूरी संपत्ति वाणिज्यिक है और इसका उपयोग कोचिंग के लिए किया जा रहा है. आरोपी सिर्फ जमीन मालिक हैं. वकील ने बताया कि उन्होंने RAU'S IAS सेंटर को बेसमेंट में लाइब्रेरी चलाने के लिए भी नहीं कहा है.'
वकील ने तर्क दिया कि मालिकों के खिलाफ ज्यादा से ज्यादा लापरवाही का मामला बनता है न कि गैर इरादतन हत्या का.
हालांकि, सीबीआई ने इन दलीलों का विरोध किया और कहा कि मालिकों को हर महीने 4 लाख रुपये मिल रहे थे. वहां 3 छात्रों की मौत हुई है. यह मामला गंभीर है.'
दोनों ओर की दलील सुनने के बाद कोर्ट ने कहा कि वहां इससे पहले भी जमजमाव होता था. इसका मतलब है कि मालिकों को पता था कि यहां किसी दिन गंभीर हादसा हो सकता है.
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पुलिस ने एसयूवी चालक को किया था गिरफ्तार
बता दें कि इस मामले में पुलिस ने एक एसयूवी चालक को भी गिरफ्तार किया था. पुलिस ने कहा था गाड़ी चालक की रफ्तार ज्यादा थी, जिसके चलते पानी का विस्थापन हुआ और प्रेशर से गेट टूट गया. हालांकि, इस मामले में कोर्ट ने पुलिस को फटकार लगाते हुए आरोपी की जमानत याचिका मंजूर कर ली थी.
बता दें कि दिल्ली के ओल्ड राजेंद्र राजेंद्र नगर में बेसमेंट में चल रहे कोचिंग सेंटर में पानी भरने से एक छात्र और दो छात्राओं की मौत हो गई थी. इस मामले की जांच सीबीआई कर रही है.