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कानून आने से पहले ही विरोध प्रदर्शन शुरू, UCC पर CPIM का बागी रुख

समान नागरिक संहिता को लेकर रार जारी है. सीपीआईएम ने फैसला किया है कि वह UCC के खिलाफ अभियान शुरू करेगी. CPIM ने कहा कि, समान नागरिक संहिता को लागू करने की घोषणा कर देश के बहुलवाद को खत्म करने का प्रयास किया जा रहा है.इसके साथ ही सीपीआईएम ने कांग्रेस पर अवसरवादी रवैया अपनाने का आरोप लगाया है.

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यूनिफॉर्म सिविल कोड पर सीपीआईएम अपनाएगी बागी रुख (फाइल फोटो)
यूनिफॉर्म सिविल कोड पर सीपीआईएम अपनाएगी बागी रुख (फाइल फोटो)

सीपीआईएम समान नागरिक संहिता के खिलाफ अभियान शुरू करेगी, कोझिकोड में यूसीसी पर राज्य स्तरीय सेमिनार आयोजित करेगी. सीपीआईएम भी मणिपुर मुद्दे पर व्यापक अभियान और विरोध प्रदर्शन आयोजित करेगी. सीपीआईएम और सीपीआई सांसदों का एक प्रतिनिधिमंडल मणिपुर का दौरा करेगा.

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कांग्रेस पर लगाया आरोप
इसके साथ ही सीपीआईएम ने कांग्रेस पर अवसरवादी रवैया अपनाने का आरोप लगाया है. कहा कि 'यूसीसी पर सेमिनार में भाग लेने के लिए सभी गैर-सांप्रदायिक लोगों को आमंत्रित किया जाएगा, लेकिन कांग्रेस को निमंत्रण नहीं दिया जाएगा. इस मामले पर कांग्रेस का रुख अजीब है. कांग्रेस के राष्ट्रीय से लेकर स्थानीय स्तर तक के नेताओं का अलग-अलग रुख है. राहुल गांधी और अन्य लोग स्पष्ट रुख नहीं रख पा रहे हैं.'
 
देश के बहुलवाद को खत्म करने की कोशिश
समान नागरिक संहिता को खारिज करने का अनुरोध करने वाली मुस्लिम विद्वान संस्था को भी आमंत्रित किया जाएगा. सीपीआईएम के राज्य सचिव एमवी गोविंदन ने स्पष्ट किया कि पार्टी यूसीसी पर समान रुख रखने वाले किसी भी व्यक्ति के साथ जुड़ेगी. सीपीआईएम ने कहा कि, समान नागरिक संहिता को लागू करने की घोषणा कर देश के बहुलवाद को खत्म करने का प्रयास किया जा रहा है.

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सीपीआईएम के राज्य सचिव एमवी गोविंदन ने कहा कि आरएसएस और संघ परिवार प्रधानमंत्री के माध्यम से समान नागरिक संहिता के लिए अभियान चला रहे हैं और कांग्रेस इस संबंध में सुसंगत रुख अपनाने में असमर्थ है. उन्होंने कहा, 'कानून आयोग ने इस पर स्पष्टता बना दी है और अब वे इसे हिंदुत्व एजेंडा, एक सांप्रदायिक एजेंडा लागू करने के लिए ला रहे हैं. जब आरएसएस 100 साल का जश्न मनाता है, तो वे एक एकीकृत भारत बनाना चाहते हैं. यह उन सभी के लिए आने का समय है जो एक धर्मनिरपेक्ष भारत चाहते हैं समान नागरिक संहिता के खिलाफ आगे बढ़ें. 

यूसीसी पर किस पार्टी का क्या है रुख
शिवसेना (यूबीटी) के उद्धव ठाकरे मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के पदाधिकारियों के साथ मुलाकात के दौरान साफ कर चुके हैं कि हम यूसीसी का समर्थन करते हैं. हालांकि, उन्होंने ये भी कहा है कि अलग-अलग वर्गों पर इसका क्या असर होगा? हम केंद्र सरकार से इसे लेकर स्पष्टीकरण की मांग करते हैं. वहीं, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) ने बीच की राह पकड़ ली है. एनसीपी ने कहा है कि हमने न तो यूसीसी का समर्थन किया है और ना ही विरोध. हम तो बस इतना कह रहे हैं कि बड़े फैसले जल्दबाजी में नहीं लिए जाते. 

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जेडीयू ने कहा पॉलिटिकल स्टैंड
बिहार की सत्ताधारी जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) के प्रवक्ता केसी त्यागी ने इसे पॉलिटिकल स्टैंड बताया है. इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (आईयूएमएल) ने यूसीसी का विरोध किया है. तमिलनाडु की सत्ताधारी डीएमके ने कहा है कि यूसीसी पहले हिंदुओं के लिए लागू किया जाना चाहिए. बीजेपी के पुराने गठबंधन सहयोगियों में शिरोमणि अकाली दल भी यूसीसी के विरोध में उतर आया है. राष्ट्रीय जनता दल ने कहा है कि ये हिंदू-मुसलमान का मसला नहीं है. हिंदुओं में भी विविधता है, आदिवासी रिवाज हैं. सरकार को इस मुद्दे पर गंभीरता दिखानी चाहिए. कई दलों की ओर से इसे लेकर अभी कोई बयान नहीं आया है.
 

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