दर्शन सोलंकी सुसाइड केस में हैंडराइटिंग एक्सपर्ट की रिपोर्ट आ गई है. एक्सपर्ट ने सुसाइड नोट की हैंडराइटिंग से जुड़ी ये रिपोर्ट SIT को सौंप दी है. हैंडराइटिंग एक्सपर्ट ने अपनी रिपोर्ट में बताया की जो सुसाइड नोट पुलिस ने बरामद किया है, उसकी लिखावट दर्शन सोलंकी की है. पुलिस ने अब तक दर्शन सोलंकी आत्महत्या मामले में 35 लोगों के बयान दर्ज किए हैं.
सहपाठी से लड़ाई के बाद काफी डरा था सोलंकी
एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि सुसाइड नोट में जिस छात्र का नाम लिखा है,उसने अपने बयान में पुलिस को बताया किया कि सोलंकी उससे लड़ाई के बाद काफी डरा हुआ था. हालांकि उसने उससे कई बार माफी भी मांगी थी. छात्र ने किस बात को लेकर माफी मांगी, ये बात वह अपने बयान में नहीं बता रहा है. आत्महत्या करने से एक हफ्ते पहले से दर्शन सोलंकी काफी डरा सहमा रहता था.
IIT मुंबई का छात्र था सोलंकी
बता दें कि दर्शन सोलंकी IIT मुंबई का छात्र था और उसने इमारत से कूद कर आत्महत्या कर ली थी. इस मामले की जाँच करने के लिए मुंबई पुलिस कमिश्नर ने SIT बनाई थी जिसकी अध्यक्षता जॉइंट कमिश्नर क्राइम लखमी गौतम कर रहे हैं. जांच के दौरान SIT को पता चला है कि दर्शन सोलंकी की आत्महत्या के पीछे उसके सहपाठी द्वारा परेशान किया जाना एक वजह थी. SIT ने आगे बताया की सोलंकी के रूम से एक सुसाइड नोट मिला जिसमें लिखा था, “a### has killed me”
पूछताछ में पुलिस को यह भी पता चला की इस मामले में संदिग्ध से सोलंकी को बहुत डर लगता था पर आख़िर वो क्यों डरता था इसका जवाब पुलिस को नहीं मिल रहा है. अधिकारी यह भी पता लगाने में जुट जांच गए हैं कि आखिर वास्तव में दोनों के बीच क्या हुआ था.
पीड़ित पिता ने सीएम शिंदे को लिखा था पत्र
इस मामले में 30 मार्च को दर्शन के पिता की ओर से एक पत्र लिखे जाने की बात सामने आई थी, जो उन्होंने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे को लिखा था. इस पत्र में उन्होंने आरोप लगाया है कि बेटे की मौत की प्राथमिकी दर्ज करने में उनके परिवार को पुलिस से उत्पीड़न का सामना करना पड़ रहा है. उन्होंने कहा कि पुलिस और विशेष जांच दल (एसआईटी) के सदस्यों के रवैये से परिवार 'पूरी तरह से हैरान और निराश है और पुलिस प्राथमिकी दर्ज करने से इंकार कर रही है. परिवार ने पत्र की एक प्रति उपमुख्यमंत्री और राज्य का गृह मंत्रालय संभाल रहे देवेंद्र फडणवीस और मुंबई के पुलिस आयुक्त विवेक फनसालकर को भी भेजी है.
जातिगत भेदभाव का भी आरोप
दर्शन के परिवार ने दावा किया है कि अनुसूचित जाति (एससी) समुदाय से संबंधित होने के कारण उन्हें IIT बॉम्बे में भेदभाव का सामना करना पड़ा और उनकी मौत में संदिग्ध साजिश नजर आती है. हालांकि, संस्थान द्वारा गठित जांच कमेटी ने जाति-आधारित भेदभाव से इंकार कर दिया था. कमेटी ने संकेत दिया है कि छात्र की खुदकुशी के पीछे शैक्षणिक प्रदर्शन ठीक न होना हो सकता है. वहीं पुलिस आत्महत्या स्थल से मिले सुसाइड नोट की लिखावट जांचने के लिए एक्सपर्ट के पास भेजा था, जिसकी रिपोर्ट SIT को मिल गई है.