मणिपुर में शांति बहाल करने के लिए केंद्र सरकार द्वारा 5 अप्रैल को बुलाई गई बैठक में भाग लेने के लिए मैतेई और कुकी समुदायों के अलग-अलग प्रतिनिधिमंडल दिल्ली पहुंचे हैं. दोनों पक्षों के सूत्रों ने इसकी पुष्टि की है. गृह मंत्रालय की यह पहल राज्य में जारी जातीय हिंसा को समाप्त करने के प्रयासों का हिस्सा है. मई 2023 से जारी इस हिंसा में अब तक 250 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है और हजारों लोग बेघर हो गए हैं.
मैतेई समुदाय की ओर से ऑल मणिपुर यूनाइटेड क्लब्स ऑर्गेनाइजेशन (AMUCO) और फेडरेशन ऑफ सिविल सोसाइटी ऑर्गेनाइजेशंस (FOCS) के तीन-तीन सदस्य बैठक में शामिल होंगे. AMUCO के अध्यक्ष नंदा लुवांग, वरिष्ठ सलाहकार इतो टोंगबाम और डॉ. धनबीर लैशराम इस प्रतिनिधिमंडल का हिस्सा हैं.
FOCS का एक अन्य दल भी बैठक में भाग लेगा, जो मैतेई समुदाय के हितों की वकालत कर रहा है. वहीं, कुकी समुदाय की ओर से जोमी काउंसिल, ह्मार इम्पी और कुकी जो काउंसिल के प्रतिनिधि बैठक में भाग लेने दिल्ली गए हैं.
कुकी समुदाय की शर्तें
दो दिन पहले, मणिपुर के कांगपोकपी जिले में स्थित कुकी नेतृत्व ने वार्ता के लिए तीन शर्तें रखी थीं. मैतेई और कुकी समुदायों के बहुल वाले क्षेत्रों में एक-दूसरे की आवाजाही पर प्रतिबंध लगाया जाए. शांति वार्ता के लिए कम से कम छह महीने के लिए संघर्ष विराम लागू किया जाए. इस संघर्ष विराम के दौरान औपचारिक और ठोस संवाद प्रक्रिया शुरू की जाए. फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि केंद्र सरकार ने इन शर्तों को स्वीकार किया है या नहीं.
मणिपुर हिंसा की पृष्ठभूमि
मणिपुर में हिंसा तब शुरू हुई जब पहाड़ी जिलों में ‘आदिवासी एकजुटता मार्च’ का आयोजन किया गया. यह मार्च मैतेई समुदाय की अनुसूचित जनजाति (ST) दर्जे की मांग के विरोध में किया गया था. केंद्र सरकार दोनों पक्षों को वार्ता की मेज पर लाने के लिए लगातार प्रयास कर रही है. इसी क्रम में, 13 फरवरी को एन. बीरेन सिंह के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफे के बाद मणिपुर में राष्ट्रपति शासन लागू कर दिया गया था.